हर साल 9 अगस्त को नेशनल बुक लवर्स डे मनाया जाता है। इस खास दिन पर साहित्य प्रेमी और पाठक किताबों के प्रति अपने लगाव को साझा करते हैं। इसी कड़ी में वरिष्ठ नेता और प्रख्यात लेखक शशि थरूर ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विशेष संदेश साझा किया। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें दोस्तों की शुभकामनाओं के बाद ही इस दिन के बारे में पता चला, जिसके बाद उन्होंने किताबों और पढ़ने की संस्कृति पर अपने विचार व्यक्त किए।
नेशनल बुक लवर्स डे का महत्व और शशि थरूर की प्रतिक्रिया
शशि थरूर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि 9 अगस्त को आने वाले इस दिन के जरिए उन्हें उस अहसास की याद आती है जो पढ़ने से मिलता है। अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने लिखा, "स्याही और कल्पना के मेल से होने वाले शांत जादू की याद आज तरोताजा हो गई।" उन्होंने आगे कहा कि चाहे कोई पुरानी पसंदीदा किताब को दोबारा पढ़ रहा हो या किसी नई रचना की शुरुआत कर रहा हो, किताबों का अनुभव हमेशा अनोखा होता है।
डिजिटल दौर में किताबों की अहमियत और थरूर की साहित्यिक पहचान
एक राजनेता होने के साथ-साथ शशि थरूर एक स्थापित लेखक भी हैं। उन्होंने भारतीय राजनीति, इतिहास, संस्कृति और भाषा जैसे विविध विषयों पर कई प्रसिद्ध किताबें लिखी हैं। आज के समय में जब स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और शॉर्ट वीडियो का दौर हर जगह छाया हुआ है, तब किताबों के प्रति रुझान बनाए रखना एक चुनौती माना जाता है। ऐसे में नेशनल बुक लवर्स डे जैसे अवसर लोगों को पन्नों की दुनिया में लौटने और एकाग्रता के साथ पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
शशि थरूर के इस संदेश पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई पाठकों ने उनकी लिखी किताबों का जिक्र करते हुए लिखा कि उन्होंने ही लोगों में दोबारा पढ़ने की आदत को जगाया है। वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने यह भी टिप्पणी की कि आधुनिक समय में डिजिटल गैजेट्स और मनोरंजन के नए साधनों के कारण किताबों को पढ़ने का समय और प्राथमिकता घट रही है।



























