गौतम बुद्ध नगर स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में उत्कर्ष नारी सम्मान युवा स्वाभिमान, प्रेरणा विमर्श-2026 के समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में भाग लेते हुए योगी आदित्यनाथ ने भारतीय संस्कृति के मूलभूत सिद्धांतों और समाज में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन दर्शन केवल एक पूजा पद्धति नहीं है, बल्कि यह देश के अस्तित्व, मानवीय चेतना और सामाजिक संतुलन का आधार है।
सनातन दर्शन और नारी शक्ति पर विचार
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन को साझा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की वास्तविक चेतना उसकी सनातन परंपरा में समाहित है। उन्होंने व्याख्या करते हुए कहा कि यदि सनातन को भारत की जीवन-दृष्टि माना जाए, तो नारी शक्ति उस जीवन-दृष्टि का सच्चा स्पंदन है। उनके अनुसार महिलाओं के सम्मान और उनकी सक्रिय सहभागिता के बिना किसी भी राष्ट्र का आध्यात्मिक या व्यावहारिक विकास संभव नहीं है। इस चिंतन को उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर भी रेखांकित किया, जहां उन्होंने कार्यक्रम से जुड़ा अपना संदेश साझा किया।
सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता
सार्वजनिक विमर्श में सनातन संस्कृति को भारत की आत्मा के रूप में लगातार रेखांकित किया जाता रहा है। ग्रेटर नोएडा के इस मंच से यह संदेश भी सामने आया कि वसुधैव कुटुंबकम के व्यापक विचार में किसी प्रकार की संकीर्णता या कट्टरता के लिए कोई स्थान नहीं है। विभिन्न वैचारिक सम्मेलनों में भी यह बात उभरती रही है कि सनातन परंपरा ने सदैव नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा और संपूर्ण मानवता का मार्ग प्रशस्त किया है। युवा पीढ़ी को सही दिशा देने के लिए संस्कार, बौद्धिक विवेक और राष्ट्रबोध को आवश्यक तत्व माना गया है, जिससे आत्मनिर्भर समाज का निर्माण हो सके।
नोएडा के बारे में
नोएडा उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख उपनगरीय क्षेत्र है, जो देश की राजधानी दिल्ली से सटा हुआ है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका औपचारिक प्रशासनिक नाम गौतम बुद्ध नगर है, जो लगभग 203 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के संक्षिप्त रूप से पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र सुनियोजित सेक्टरों में विभाजित है। आधुनिक बुनियादी ढांचे और करीब 5 लाख की आबादी के साथ यह शहर उत्तर भारत के प्रमुख औद्योगिक और शैक्षिक केंद्रों में गिना जाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस संबोधन और सोशल मीडिया संदेश पर आम नागरिकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई समर्थकों ने उनके नेतृत्व और विचारों की सराहना करते हुए सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रति समर्थन जताया, वहीं कुछ लोगों ने कानून-व्यवस्था, जातिगत सामाजिक समीकरणों और प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं।


























