बिहार के शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के सरकारी प्राथमिक और उच्च विद्यालयों के परिसरों में मीडियाकर्मियों और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स की गतिविधियों पर रोक लगाने का फरमान जारी किया गया है। विभाग के इस कदम के बाद शैक्षणिक संस्थानों की व्यवस्था को लेकर एक नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद शुरू हो गया है। इस हालिया प्रशासनिक आदेश के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अखिलेश यादव ने तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि स्कूलों के भीतर मीडिया के प्रवेश को रोकना दरअसल वहां की प्रशासनिक बदहाली और जमीनी हकीकत को जनता की नजरों से छुपाने का एक प्रयास है।
प्रशासनिक फरमान और मीडिया पर पाबंदी
शिक्षा विभाग के निर्देश के तहत सरकारी स्कूलों में अनधिकृत रूप से कैमरा ले जाने, वीडियो बनाने और लाइव रिपोर्टिंग करने पर कड़ा प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। इस आदेश के पीछे तर्क दिया गया कि इस तरह की रिपोर्टिंग से कक्षाओं की पढ़ाई बाधित होती है और विद्यालय का माहौल प्रभावित होता है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्कूलों के भीतर मौजूद कमियों और खराब व्यवस्था को उजागर होने से बचाना है। बीते कुछ समय में सोशल मीडिया पर कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे, जिनमें विद्यालयों के बुनियादी ढांचे की खस्ताहाली दिखाई गई थी।
बुनियादी सुविधाओं की कमी पर उठे गंभीर सवाल
अखिलेश यादव ने अपने बयान में सरकारी विद्यालयों के भीतर मौजूद कमियों की एक विस्तृत सूची प्रस्तुत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की पाबंदी लगाकर सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकती। उन्होंने रेखांकित किया कि कई सरकारी स्कूलों में पक्के क्लासरूम, ब्लैकबोर्ड, बिजली कनेक्शन और पंखों जैसी मूलभूत आवश्यकताओं का भारी अभाव है। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ पेयजल, चालू स्थिति में टॉयलेट, विज्ञान प्रयोगशालाएं, अध्ययन सामग्री जैसे कि किताबें और कॉपी, तथा मुफ्त यूनिफॉर्म और दोपहर का खाना (मिड-डे मील) की व्यवस्था में भी गंभीर खामियां पाई जा रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि समस्याओं को हल करने के बजाय रिपोर्टिंग पर रोक लगाना यह दर्शाता है कि बदहाली की कहानी बहुत गहरी है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस फैसले और इसके बाद आई राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर आम लोगों के बीच व्यापक चर्चा देखने को मिली है। सोशल मीडिया और नागरिक मंचों पर कई लोगों ने मत व्यक्त किया कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मीडिया और आम नागरिकों की निगरानी आवश्यक है। वहीं, कुछ अन्य लोगों ने विचार रखा कि विद्यालयों में अनुशासन बनाए रखने और पठन-पाठन का माहौल बेहतर करने के लिए कड़े नियमों का पालन होना चाहिए।

























