भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और प्रशासनिक विभागों की भविष्य की कार्ययोजनाओं को लेकर नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश मामलों से जुड़े प्रमुख विषयों पर व्यापक चर्चा की। सुशासन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करते हुए उन्होंने सभी विभागों को अधिक दक्षता और पारदर्शिता के साथ काम करने का निर्देश दिया।
विभागों के बीच आपसी समन्वय और दीर्घकालिक दृष्टिकोण
प्रशासनिक तंत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस तीसरी उच्च स्तरीय बैठक में सरकारी कामकाज की कार्यशैली में बदलाव लाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक के दौरान मंत्रालयों के बीच की बाधाओं यानी साइलो को समाप्त करने का आह्वान किया गया, ताकि विभिन्न विभाग एक-दूसरे से अलग होकर काम करने के बजाय एकीकृत रूप से नीतियां लागू कर सकें। अधिकारियों को अल्पकालिक प्राथमिकताओं से आगे बढ़कर देश के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए नीतियां तैयार करने और उन्हें धरातल पर उतारने का सुझाव दिया गया।
बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और एआई का समावेश
समीक्षा बैठक के प्रमुख एजेंडे में बुनियादी ढांचे का विस्तार, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी में सुधार, तथा सीमा पार एवं आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना शामिल था। इसके अलावा, विदेश नीति और वैश्विक स्तर पर भारत के व्यापारिक हितों को बढ़ावा देने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। नीति निर्माण की प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक के प्रयोग पर बल देते हुए प्रशासनिक निर्णयों में AI (Artificial Intelligence) के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात कही गई, जिससे सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार हो सके।
जनता की प्रतिक्रिया
इस बैठक की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर नागरिकों ने अपनी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं। जहां कई लोगों ने सुशासन और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की दिशा में इसे एक सकारात्मक कदम बताया, वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने युवाओं की चिंताओं, प्रशासनिक पारदर्शिता और सार्वजनिक नीतियों को लेकर भी अपने सवाल उठाए।


























