तमिलनाडु के महाबलीपुरम में दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। इस महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय बैठक में कई अहम सुरक्षा, प्रशासनिक और विकासात्मक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। बैठक के दौरान एक प्रमुख सफलता यह रही कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य पुनर्गठन से जुड़े परिसंपत्तियों और देनदारियों के विभाजन के लंबित मामलों को आपस में सुलझाने पर सहमत हो गए हैं।
संपत्ति विभाजन और अंतर-राज्यीय मुद्दों पर बनी सहमति
गृह मंत्रालय के बनाए ढांचे के तहत आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच संपत्ति और देनदारियों के बंटवारे के प्रक्रियात्मक मुद्दों को हल करने पर पूर्ण सहमति बनी है। इसके अलावा बैठक में दक्षिण भारत के राज्यों के बीच जल बंटवारे से जुड़े लंबित विवादों और सुरक्षा प्राथमिकताओं पर विस्तृत बातचीत की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में विभिन्न राज्यों के छह मुख्यमंत्री तथा केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और प्रशासक शामिल हुए।
महिला सुरक्षा और अपराध जांच में तेजी का आह्वान
परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में समयबद्ध और त्वरित जांच प्रक्रिया सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने राज्यों से अपील की कि ऐसे मामलों में कानून प्रवर्तन तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जाए। इसके साथ ही अंतर-राज्यीय समन्वय के जरिए नशीली दवाओं के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
अमित शाह ने सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी
बैठक के समापन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आयोजित 31वीं दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना गृह मंत्रालय की योजना के अनुसार परिसंपत्तियों और देनदारियों के विभाजन से जुड़े मामलों का समाधान करने पर सहमत हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की तेजी से जांच करने की आवश्यकता को दोहराया।
जनता की प्रतिक्रिया
बैठक के नतीजों पर सोशल मीडिया पर लोगों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अधिकांश नागरिकों ने दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच सहमति का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में सकारात्मक कदम बताया, जबकि कई उपयोगकर्ताओं ने यह मांग भी रखी कि इन निर्णयों को केवल बैठकों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए।


























