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विज्ञापन खर्च पर अखिलेश यादव का हमला, 7000 करोड़ रुपये खर्च करके भी सरकार नहीं सुधार सकती अपनी छविनेता जी
6 अग॰ 2026, 11:37 pm (1 दिन पहले)· 1

विज्ञापन खर्च पर अखिलेश यादव का हमला, 7000 करोड़ रुपये खर्च करके भी सरकार नहीं सुधार सकती अपनी छवि

समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने 7000 करोड़ रुपये के सालाना विज्ञापन खर्च पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रचार से सरकार की छवि नहीं सुधरेगी।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सरकारी प्रचार और विज्ञापन बजट को लेकर सियासी घमासान तेज़ हो गया है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने राज्य सरकार की प्रचार नीति पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार जनता का भरोसा पूरी तरह खो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि विज्ञापनों पर एक साल में 7000 करोड़ रुपये की विशाल राशि खर्च कर देने के बाद भी सरकार अपनी गिरती छवि को नहीं सुधार पाएगी। अखिलेश यादव के इस तीखे प्रहार के बाद प्रदेश की प्रशासनिक प्राथमिकताओं, बुनियादी सुविधाओं और बजट आवंटन को लेकर एक नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है।

7000 करोड़ रुपये के विज्ञापन खर्च पर तीखे सवाल

अखिलेश यादव ने राज्य सरकार के विज्ञापन बजट की आलोचना करते हुए कहा कि जनहित के वास्तविक कार्यों को दरकिनार करके केवल प्रचार के दम पर सत्ता की छवि को नहीं चमकाया जा सकता। उन्होंने कहा कि एक वर्ष के भीतर 7000 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम विज्ञापनों में झोंकना जनता के पैसे का अनुचित इस्तेमाल है। विपक्षी नेता के अनुसार, यदि इस भारी बजट का उपयोग अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने, युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करने, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और जर्जर सड़कों की मरम्मत में किया जाता, तो प्रदेश के आम नागरिकों को सीधा फायदा पहुँचता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी प्रशासनिक नाकामियों को ढंकने के लिए विज्ञापनों का सहारा ले रही है, लेकिन जनता अब ज़मीनी हकीकत को भली-भांति देख और समझ रही है।

'डबल इंजन' व्यवस्था और सरकारी प्राथमिकताओं पर प्रहार

अपने वक्तव्य में अखिलेश यादव ने 'डबल इंजन' की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी करारा व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि आपसी होड़ और दिखावे की राजनीति के चक्कर में मूल जनहित के मुद्दे पीछे छूट गए हैं। उनका कहना था कि किसी भी शासन की सच्ची पहचान और ब्रांड करोड़ों रुपये के विज्ञापनों से नहीं, बल्कि अच्छे व्यवहार, पारदर्शी नीतियों और जनता के कल्याण के लिए किए गए ठोस कार्यों से बनती है। इसके साथ ही उन्होंने लखनऊ से गोरखपुर के बीच चलने वाली डायरेक्ट ट्रेन सेवा का ज़िक्र करते हुए परिवहन और बुनियादी ढाँचे के विकास पर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकारी खजाने का मुख्य उद्देश्य विज्ञापनों के बड़े-बड़े बोर्ड लगाना नहीं होना चाहिए, बल्कि हर नागरिक तक विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुँचाना होना चाहिए।

अखिलेश यादव का सोशल मीडिया संदेश

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी बात साझा करते हुए लिखा, "बनाने चले Brand, बज गया Band!" उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि अब 7000 करोड़ रुपये एक साल में भी खर्च कर दिए जाएँ, तो भी ज़मीनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा और विज्ञापनों के अतिरेक में सरकार की कार्यप्रणाली का संतुलन बिगड़ चुका है। अखिलेश यादव ने ज़ोर देकर कहा कि जनता की वास्तविक समस्याओं का समाधान केवल विज्ञापनों के विजुअल्स से नहीं, बल्कि ज़मीन पर काम करके ही संभव है।

गया के बारे में

इस राजनीतिक घटनाक्रम और चर्चाओं के बीच गया शहर का संदर्भ भी उभरकर सामने आता है। गया भारत के बिहार राज्य में स्थित एक अत्यंत ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण नगर है, जो ज़िला मुख्यालय होने के साथ-साथ बिहार का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से मगही भाषा बोली जाती है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से गया का स्थान बेहद खास है, क्योंकि हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों प्रमुख धर्मों में इसका गहरा ऐतिहासिक महत्व माना जाता है, जिसका उल्लेख रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है। यह शहर तीन दिशाओं से रामशिला, प्रेतशिला और ब्रह्मयोनि नामक पथरीली पहाड़ियों से घिरा हुआ है, और इसके पूर्व में फल्गू नदी बहती है। अपनी समृद्ध धरोहर के कारण यहाँ प्रतिवर्ष देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु तथा पर्यटक आते हैं।

जनता की प्रतिक्रिया

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने सड़कों के गड्ढों, महँगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों का ज़िक्र करते हुए अखिलेश यादव के तंज का समर्थन किया, जबकि अन्य उपयोगकर्ताओं ने सरकार के प्रशासनिक सुशासन और विकास कार्यों का हवाला देते हुए विपक्षी दावों पर सवाल भी खड़े किए।

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सवाल-जवाब

अखिलेश यादव ने विज्ञापन बजट पर क्या सवाल उठाया?
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार विज्ञापनों पर एक साल में 7000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, फिर भी अपनी छवि नहीं सुधार पाएगी।
अखिलेश यादव ने 'डबल इंजन' व्यवस्था के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आपसी प्रतिस्पर्धा के कारण व्यवस्था बिगड़ चुकी है और जनता का भरोसा केवल प्रचार से नहीं जीता जा सकता।
अखिलेश यादव ने किस ट्रेन सेवा का ज़िक्र किया?
उन्होंने लखनऊ से गोरखपुर के बीच चलने वाली डायरेक्ट ट्रेन का संदर्भ देकर परिवहन और बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने की बात कही।
गया शहर कहाँ स्थित है और इसका क्या महत्व है?
गया बिहार का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जो फल्गू नदी के तट पर स्थित है और हिंदू, बौद्ध तथा जैन धर्मों में इसका बड़ा ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है।
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