सोशल मीडिया मंच एक्स पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अखिलेश यादव ने एक नया वीडियो साझा करते हुए राज्य में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर तंज कसा है। उन्होंने उस वीडियो का हवाला दिया जिसमें हाल ही में उद्घाटित एक्सप्रेसवे की मरम्मत के बाद गीले निर्माण कार्य को सुखाने के लिए पेडेस्टल पंखों का सहारा लिया जा रहा था। अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम को बेहद हास्यास्पद बताते हुए बुनियादी ढांचे के विकास के दावों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़ा हमला बोला है।
नवनिर्मित सड़क पर तेजी से उभरीं दरारें
सपा नेता ने अपने संदेश में लिखा कि जिस सड़क का उद्घाटन केवल कुछ ही हफ्तों पहले हुआ था, उसकी सतह इतनी जल्दी उखड़ने लगी है कि उसे तुरंत मरम्मत की आवश्यकता पड़ गई। 2 से 3 सप्ताह के भीतर ही एक्सप्रेसवे की इस दयनीय स्थिति को देखकर यात्री उस पर सफर करने से कतरा रहे हैं। अखिलेश यादव का कहना है कि एक्सप्रेस स्पीड से बनाई गई सड़कों पर मरम्मत के काम को जल्दी सुखाने के लिए टेबल पंखे लगाना हास्यास्पद प्रशासनिक व्यवस्था को दर्शाता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि ऐसी कमजोर सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों का चलना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल इस मामले ने राज्य में जारी अवसंरचना परियोजनाओं की मजबूती और निर्माण मानकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि निर्माण कार्यों में तय गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई, जिसके कारण कुछ ही दिनों में नई सड़कों का दम उखड़ने लगा है। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जिस गति से सड़कों की स्थिति बिगड़ रही है, उससे साफ है कि विकास के बड़े-बड़े दावे केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। तेज हवा वाले पंखों का इस्तेमाल करके सड़क सुखाने का यह अनोखा तरीका अब व्यापक चर्चा और आलोचना का विषय बन चुका है।
विपक्षी हमले और निर्माण लागत का मुद्दा
इस पूरे विवाद के बीच लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे का मुद्दा भी सुर्खियों में आ गया है। लगभग 4700 करोड़ रुपये की विशाल लागत से तैयार की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का आधिकारिक उद्घाटन 13 जुलाई को केंद्रीय सड़क मंत्री द्वारा किया गया था। उस समय यह दावा किया गया था कि उत्तर प्रदेश की सड़कें अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी मानकों के समकक्ष बनाई जा रही हैं। हालांकि, उद्घाटन के महज कुछ हफ्तों बाद ही अगस्त महीने में सड़क की ऐसी बदहाल तस्वीर सामने आने से विपक्ष को सरकार पर हमला करने और गुणवत्ता की जांच की मांग उठाने का मौका मिल गया है।
जनता की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम पर आम जनता और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से भी व्यापक और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कई लोगों ने निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि भारी-भरकम बजट के बावजूद बुनियादी ढांचा पहली ही बारिश या कुछ हफ्तों में टिक नहीं पा रहा है। वहीं, कुछ यूजर्स ने हास्यप्रद लहजे में पंखे से सड़क सुखाने की इस अजीब तकनीक पर कटाक्ष किया, जबकि अन्य लोगों ने सरकारी एजेंसियों से दोषी ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष गुणवत्ता जांच की मांग की है।



























