उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खाद की भारी किल्लत के बीच किसान बुवाई के इस महत्वपूर्ण मौसम में गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। गोंडा जिले से सामने आई तस्वीरों में किसान भारी बारिश के बीच खाद प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए हैं। इस स्थिति को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, क्योंकि विपक्ष ने किसानों की दुर्दशा को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर चौतरफा हमला बोला है। धान की फसल के लिए इस समय खाद की सख्त आवश्यकता होती है, लेकिन सरकारी केंद्रों पर आपूर्ति सीमित होने से राज्य भर में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
अखिलेश यादव का बयान और राजनीतिक चेतावनी
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोंडा में बारिश के बीच कतार में खड़े किसानों का एक दृश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने राज्य सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने लिखा कि भारी बरसात में खाद लेने के लिए लाइन में लगे किसान यह स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि आने वाले चुनाव में इससे दोगुनी लंबी कतारें सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ मतदान करने के लिए लगेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब देश का खेत मुस्कुराएगा, तभी वास्तविक रूप से पूरा देश मुस्कुरा पाएगा।
प्रदेश भर के विभिन्न जिलों में गहराया खाद संकट
खाद की यह समस्या केवल गोंडा तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। रायबरेली में उस समय भारी अव्यवस्था देखने को मिली जब एक केंद्र पर महज 500 बोरी खाद उपलब्ध थी, जबकि उसे लेने के लिए 1000 से अधिक किसान पहुंच गए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी। बलरामपुर जिले में भी खाद वितरण केंद्रों पर अव्यवस्था के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा किसानों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें सामने आई हैं। वहीं माधवगंज स्थित साधन सहकारी समिति पर छात्र भी छाता लेकर अपने परिवारों के लिए खाद की लाइन में खड़े नजर आए।
कालाबाजारी और प्रशासनिक अड़चनों से किसान परेशान
सरकारी सोसाइटियों में खाद की पर्याप्त उपलब्धता न होने का सीधा फायदा निजी विक्रेता उठा रहे हैं। कई स्थानों पर किसानों को मजबूरी में निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उनसे प्रति बोरी 100 रुपये तक अधिक वसूले जा रहे हैं और कोई पक्की रसीद भी नहीं दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, किसान आईडी और खतौनी में नाम की गड़बड़ियों के कारण भी किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस प्रक्रियात्मक सुधार के नाम पर स्थानीय कर्मचारियों द्वारा अवैध वसूली के आरोप भी लग रहे हैं। हालांकि, इन विकट परिस्थितियों के बीच गोंडा की गिरिजा देवी जैसे कुछ किसानों ने एक अलग रास्ता चुना है। उन्होंने बिना पानी और बिना रासायनिक खाद के उगाई जाने वाली सांवा और रागी जैसी पारंपरिक मोटे अनाजों की खेती अपनाकर बेहतर पैदावार हासिल की है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर आम जनता और किसानों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर खाद की कालाबाजारी और टोकन प्रणाली की प्रशासनिक विफलताओं की कड़े शब्दों में निंदा की है, वहीं कुछ लोगों का कहना है कि कृषि संकट के समय केवल बयानबाजी करने के बजाय धरातल पर ठोस समाधान की आवश्यकता है।



























