नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए आबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला को कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव में जीत की हार्दिक बधाई दी। अपने संदेश में मोदी ने साफ किया कि भारत, कोलंबिया के साथ अपनी घनिष्ठ मित्रता को बेहद महत्व देता है और यह रिश्ता सभी क्षेत्रों में लगातार और गहरा होता जा रहा है।
मोदी का बधाई संदेश
X पर अपनी पोस्ट में मोदी ने आबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला को सीधे संबोधित करते हुए कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव में उनकी जीत पर दिल से बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत, कोलंबिया के साथ अपनी इस करीबी दोस्ती को बेहद संजोकर रखता है, जो तमाम क्षेत्रों में लगातार फल-फूल रही है। मोदी ने दे ला एस्प्रिएला के लिए एक सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं और आने वाले दिनों में नए नेतृत्व के साथ मिलकर काम करने की उत्सुकता जाहिर की। संक्षिप्त होते हुए भी यह संदेश भारत की ओर से एक स्पष्ट कूटनीतिक पहल को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
खबरों के मुताबिक, आबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला ने बेहद कांटेदार मुकाबले में कोलंबिया का राष्ट्रपति चुनाव जीता। दक्षिणपंथी विचारधारा के इस नेता को डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल था। प्रारंभिक मतगणना में जीत की पुष्टि होते ही ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दे ला एस्प्रिएला को बधाई दी। रूबियो ने कहा कि कोलंबिया के सबसे अच्छे दिन अभी आने वाले हैं, जो वाशिंगटन की नई सरकार के प्रति मजबूत समर्थन का संकेत है। दे ला एस्प्रिएला की जीत को कोलंबिया की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है, जहां लंबे समय से वामपंथी राजनीति का प्रभाव रहा है।
भारत-कोलंबिया संबंध
चुनाव नतीजों के तुरंत बाद मोदी का यह संदेश दर्शाता है कि भारत, लैटिन अमेरिका के इस अहम देश के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। मोदी ने यह स्पष्ट किया कि नई सरकार के साथ यह द्विपक्षीय संबंध नई ऊंचाइयों पर जाएगा। यह पोस्ट भारत और कोलंबिया के बीच आपसी सम्मान और कूटनीतिक निरंतरता दोनों को एक साथ उजागर करती है।
जनता की प्रतिक्रिया
मोदी की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। जहां कई यूजर्स ने भारत-कोलंबिया संबंधों को और मजबूत करने की इस कूटनीतिक पहल का खुले दिल से स्वागत किया, वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पहले देश की आंतरिक चुनौतियों पर ध्यान दिया जाए।




















