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मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर विपक्ष के रुख को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया दोहरे मापदंड का प्रतीकराजनीति
10 अक्तू॰ 2026, 7:45 pm (46 मिनट पहले)· 1

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर विपक्ष के रुख को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया दोहरे मापदंड का प्रतीक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनावी सूचियों को त्रुटिरहित बनाने के संवैधानिक प्रयास पर सवाल उठाना विपक्ष की राजनीतिक हताशा को दिखाता है।

देहरादून में शनिवार को अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों की भूमिका पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन से जुड़े दल इस चुनावी सुधार प्रक्रिया पर लगातार भ्रामक प्रचार में जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, कांग्रेस पार्टी को इस मामले में अपने पुराने शासनकाल के इतिहास को भी देखना चाहिए, क्योंकि पूर्ववर्ती दौर में भी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की यही प्रक्रिया नियमित तौर पर अपनाई जाती रही थी। उस समय कांग्रेस को इस कवायद से कोई ऐतराज नहीं था, लेकिन आज उसी प्रक्रिया पर विवाद खड़ा करना उनके दोहरे मापदंड को पूरी तरह उजागर करता है।

संवैधानिक संस्थाओं की साख और निष्पक्ष चुनाव का संकल्प

मतदाता सूची की शुद्धता को किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि SIR का मूल उद्देश्य पूरी सूची को पारदर्शी, त्रुटिरहित और शुद्ध बनाना है। इस कवायद का सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश के प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो सके और कोई भी योग्य मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिसकी सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को पूरी मजबूती से बनाए रखना है। ऐसे में इस संवैधानिक संस्था के कामकाज पर अनावश्यक शंका पैदा करना जनहित में नहीं है।

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विपक्ष की हताशा और ध्यान भटकाने की राजनीति

मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष के आचरण को उनकी राजनीतिक जमीन खिसकने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन का यह नकारात्मक रवैया केवल उनकी गहरी राजनीतिक हताशा का परिचायक है। जनता के बीच अपना विश्वास खो चुकी कांग्रेस अब वास्तविक मुद्दों के बजाय संवैधानिक प्रक्रियाओं पर अकारण विवाद खड़ा करने की राह पर चल रही है। उनका यह प्रयास दरअसल अपनी तमाम राजनीतिक विफलताओं से आम जनता का ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी कोशिश भर है।

विकास की गति और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में देश विकास, सुशासन और राष्ट्रहित के दृढ़ संकल्प के साथ लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। विकास की इस अनवरत यात्रा के बीच कांग्रेस अपनी घटती राजनीतिक प्रासंगिकता को देखकर असहज महसूस कर रही है। यही बेचैनी वजह है कि वह जनहित और पारदर्शिता से सीधे जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी भ्रम और विवाद का माहौल बनाने में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री ने अंत में स्मरण कराया कि लोकतंत्र के भीतर राजनीतिक विरोध की अपनी स्वाभाविक जगह होती है, परंतु संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के प्रति जनता में अविश्वास का बीज बोना किसी भी तरह उचित नहीं है। उन्होंने नसीहत दी कि कांग्रेस को भ्रामक प्रचार का सहारा लेने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।

सवाल-जवाब

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किस मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधा?
उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर कांग्रेस और इंडी गठबंधन के विरोध को लेकर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के रुख को दोहरा मापदंड क्यों बताया?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अपने शासनकाल में भी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया होती रही थी, जिस पर तब उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में शामिल हो सके।
चुनावी प्रक्रिया को लेकर भारत निर्वाचन आयोग की क्या भूमिका है?
भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका दायित्व चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को बनाए रखना है।
मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष को क्या सलाह दी?
उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास फैलाने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·1 मिनट पहले

धामी जी ने ठीक कहा, जब कांग्रेस खुद सत्ता में थी तब यही प्रक्रिया अपनाई जाती थी और तब कोई दिक्कत नहीं थी। अब विरोध करना सिर्फ राजनीति है।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·1 मिनट पहले

रविकेश जी, बात तो आपकी ठीक है, पर मुझे याद है जब हमारे पुरखों के पन्ने देखे जाते थे, तब भी कागज़ों की ऐसी ही जाँच होती थी। राजनीति अपनी जगह है, प्रक्रिया अपनी जगह।

Rohan Verma@rohan-verma·24 मिनट पहले

धामी जी ने तो विपक्ष को सीधा घेर लिया है, लेकिन क्या चुनाव आयोग ने खुद इस पूरे मामले पर कोई सफाई दी है? ये राजनीति तो चलती रहेगी, असल बात ये है कि वोटर लिस्ट ठीक होने से आम आदमी को क्या फायदा मिलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 मिनट पहले

रोहन भाई, चुनाव आयोग तो स्वतंत्र है ही, लेकिन धामी जी ठीक कह रहे हैं कि पुरानी सरकारों में भी तो यही लिस्ट सुधार का काम होता था तब क्यों नहीं शोर मचा?

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