पाकिस्तान के पूर्व सांसद और मानवाधिकार कार्यकर्ता मुश्ताक अहमद खान के अचानक गायब होने से नया विवाद खड़ा हो गया है। मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान राइट मूवमेंट्स (PRM) ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि 28 जुलाई को PoK से लौटते समय पंजाब पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। संगठन के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या गिरफ्तारी वारंट के उन्हें हिरासत में लिया और किसी अज्ञात जगह पर ले गए। घटना के बाद से ही उनके स्वास्थ्य और वर्तमान ठिकाने के बारे में कोई भी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
कहुटा बाजार में काफिला रोकने और डीएसपी की कार्रवाई की पूरी घटना
घटनाक्रम के विवरण के मुताबिक, यह मामला 28 जुलाई की शाम को हुआ। PRM ने बताया कि शाम लगभग 7:07 बजे कहुटा बाजार के समीप पंजाब पुलिस की एक टीम ने मुश्ताक अहमद खान के काफिले को अचानक रोक लिया। आरोप है कि कहुटा सर्किल के डीएसपी वकार ने खान के वाहन चालक को जबरन गाड़ी से हटा दिया और खुद स्टेयरिंग संभालकर पूर्व सांसद को उसी गाड़ी में लेकर चले गए। इस दौरान काफिले में शामिल अन्य गाड़ियों को पुलिस ने कुछ समय के लिए रोके रखा और बाद में आगे बढ़ने दिया।
PoK शांति यात्रा और आजाद पट्टन ब्रिज पर रोक
हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले मुश्ताक अहमद खान अपने सहयोगियों के साथ सफेद झंडे लेकर PoK की ओर एक एकजुटता यात्रा पर निकले थे। इस यात्रा का उद्देश्य हालिया हिंसक घटनाओं से प्रभावित परिवारों के प्रति समर्थन और संवेदना व्यक्त करना था। हालांकि, जब उनका काफिला आजाद पट्टन ब्रिज पर पहुंचा, तो सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया और PoK की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। इस प्रशासनिक रुकावट के बाद खान ने मौके पर अपना विरोध दर्ज कराया और इस्लामाबाद लौटने का फैसला किया।
डिजिटल लोकेशन का सुराग और प्रशासनिक चुप्पी
संपर्क टूटने के बाद उनकी टीम ने मुश्ताक अहमद खान से व्हाट्सऐप पर लाइव लोकेशन शेयर करने का अनुरोध किया। शेयर की गई लोकेशन से पता चला कि उनका वाहन GT रोड पर स्थित रावत पुलिस स्टेशन पर मौजूद था। जब समर्थकों की टीम तुरंत रावत पुलिस स्टेशन पहुंची, तो वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी। खान से आखिरी बार संपर्क 29 जुलाई को रात 12:26 बजे हुआ था। उस समय उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रावलपिंडी के वरिष्ठ अफसर उनसे बातचीत करना चाहते हैं। इसके बाद से पाकिस्तानी प्रशासन ने इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है और यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्हें किस कानून के तहत हिरासत में रखा गया है या उन पर कोई मामला दर्ज किया गया है या नहीं।



















