उत्तरी अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में 15 सितंबर 2026 को घटी एक असामान्य घटना ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। भारतीय नौसेना के एक अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत के साथ पाकिस्तान नौसेना के पोत पीएनएस हुनैन (PNS Hunain F-273) की टक्कर हुई। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तान के उप उच्चायुक्त यानी चार्ज डी'अफेयर्स को तलब किया और औपचारिक रूप से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तानी पोत के इस पैंतरे को अस्वीकार्य और पूरी तरह से गैर-पेशेवर करार दिया है। इस टकराव के सामने आने के बाद रक्षा हलकों में इस बात की व्यापक चर्चा छिड़ गई है कि आखिर यह पीएनएस हुनैन किस श्रेणी का जहाज है, इसका तकनीकी ढांचा कैसा है और पाकिस्तानी बेड़े में इसकी क्या रणनीतिक हैसियत है।
पीएनएस हुनैन का तकनीकी वर्गीकरण और निर्माण की पृष्ठभूमि
अक्सर आम बोलचाल या मीडिया चर्चाओं में पीएनएस हुनैन को कॉर्वेट या युद्धपोत कह दिया जाता है, लेकिन तकनीकी और आधिकारिक दस्तावेजों में इसकी पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज है। पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक अभिलेखों और इसके निर्माता के दस्तावेजों के अनुसार, पीएनएस हुनैन एक ऑफशोर पेट्रोल वेसल यानी ओपीडब्ल्यू (OPV) है। इस जहाज का निर्माण रोमानिया स्थित डेमन शिपयार्ड्स गलाती में संपन्न हुआ था। निर्माण और समुद्री परीक्षण पूरे होने के बाद इसे 25 जुलाई 2024 को औपचारिक रूप से पाकिस्तान नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था।
यह पोत डेमन शिपयार्ड के सुप्रसिद्ध डेमन ओपीडब्ल्यू 2600 डिजाइन पर तैयार किया गया है। यह पाकिस्तान द्वारा दिए गए दूसरे बैच के अनुबंध का हिस्सा था, जिसके तहत पीएनएस हुनैन के साथ उसके सहोदर पोत पीएनएस यमामा का भी निर्माण किया गया। डेमन द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन दोनों जहाजों की कुल लंबाई लगभग 98 मीटर है और इनका पूर्ण भार विस्थापन करीब 2,600 टन दर्ज किया गया है। आकार और वजन के इस पैमाने से यह साफ हो जाता है कि यह कोई सामान्य तटीय गश्ती नौका नहीं है, बल्कि गहरे समुद्र में लंबे अभियानों को अंजाम देने के लिए विकसित किया गया एक वृहद नौसैनिक प्लेटफॉर्म है।
आकार, रफ्तार और गहरे समुद्र में टिके रहने की क्षमता
पीएनएस हुनैन के तकनीकी विनिर्देश इसे आधुनिक अपतटीय गश्ती जहाजों की श्रेणी में एक मजबूत स्थान दिलाते हैं। करीब 98 मीटर की लंबाई और लगभग 2,600 टन विस्थापन के कारण इस पोत पर अतिरिक्त ईंधन, चालक दल के रहने की व्यवस्था, उन्नत सेंसर तथा बहुउद्देश्यीय मिशन उपकरण तैनात करने की पर्याप्त जगह उपलब्ध रहती है। इस खास डिजाइन की अधिकतम परिचालन गति लगभग 24 से 25 नॉट आंकी गई है, जो जमीनी गणना में करीब 44 से 46 किलोमीटर प्रति घंटा बैठती है। इतनी तेज रफ्तार समुद्र में किसी आपात स्थिति या संदिग्ध हलचल पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में काफी मददगार साबित होती है।
धीरज और दूरी के मामले में भी यह प्लेटफॉर्म काफी सक्षम माना जाता है। इसकी समुद्री पहुंच लगभग 6,000 नॉटिकल मील तक बताई गई है। हालांकि, व्यावहारिक अभियानों में यह दूरी मौसम, समुद्र की स्थिति और पोत के परिचालन भार पर निर्भर करती है। 6,000 नॉटिकल मील की परिचालन सीमा का सीधा व्यावहारिक अर्थ यह है कि यह पोत बिना किसी बंदरगाह पर रुके हफ्तों तक गहरे समुद्र में लगातार गश्त लगा सकता है और निगरानी बनाए रख सकता है।
मूल भूमिका और मिशन प्रोफाइल
पीएनएस हुनैन जैसे पोत का प्राथमिक सामरिक उद्देश्य किसी पूर्ण नौसैनिक युद्ध में पहली कतार में उतरना नहीं होता, बल्कि समुद्र में लंबे समय तक उपस्थिति दर्ज कराना और व्यापक इलाके पर नजर रखना होता है। डेमन ओपीडब्ल्यू 2600 डिजाइन को खास तौर पर बहुआयामी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए अनुकूलित किया गया है। इस जहाज की प्रमुख जिम्मेदारियों में निरंतर समुद्री निगरानी, सीमाओं की सुरक्षा, विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी ईईजेड (EEZ) की सघन निगरानी, खोज और बचाव अभियान, समुद्री डकैती तथा समुद्री अपराधों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई शामिल हैं।
पाकिस्तान ने भी पीएनएस हुनैन को नौसेना में शामिल करते समय यह रेखांकित किया था कि यह प्लेटफॉर्म उसकी समुद्री सीमाओं की रक्षा करने और पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता को व्यापक विस्तार देने के उद्देश्य से तैनात किया गया है। तटीय सुरक्षा से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग गलियारों के नजदीक मौजूदगी बनाए रखने में यह जहाज अहम भूमिका निभाता है।
हथियार, सेंसर और रक्षा प्रणालियों की स्थिति
पीएनएस हुनैन के हथियारों को लेकर रक्षा विश्लेषकों के बीच अक्सर अलग-अलग कयास लगाए जाते रहे हैं। किसी पोत का ऑफशोर पेट्रोल वेसल होना इस बात का संकेत कतई नहीं है कि वह बिना हथियारों के निहत्था घूमता है। डेमन ओपीडब्ल्यू 2600 डिजाइन की सबसे बड़ी खासियत इसका लचीला आर्किटेक्चर है, जिसे ग्राहक नौसेना की जरूरतों के हिसाब से हल्के और मध्यम हथियारों से सुसज्जित किया जा सकता है।
इस डिजाइन के अग्रिम हिस्से पर 76 मिमी तक की मुख्य नौसैनिक तोप स्थापित करने की व्यवस्था मौजूद होती है। इसके अतिरिक्त पोत पर नजदीक से आने वाले खतरों से निपटने के लिए दो 20 मिमी की सहायक तोपें भी लगाई जा सकती हैं। हथियारों के सटीक संचालन और हवाई तथा सतही निगरानी के लिए इसमें आधुनिक सर्विलांस रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सेंसर जैसी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियां शामिल करने का प्रावधान है। कुछ हलकों में इसे यारमूक श्रेणी का कॉर्वेट भी लिखा गया, लेकिन तकनीकी वर्गीकरण के तहत यह मूलतः ओपीडब्ल्यू 2600 डिजाइन पर आधारित एक सुसज्जित गश्ती जहाज ही है।
यारमूक श्रेणी से तकनीकी विकास और अंतर
पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े में पहले से मौजूद यारमूक श्रेणी के जहाजों की तुलना में पीएनएस हुनैन एक उन्नत और बड़ा संस्करण माना जाता है। पहले बैच के अंतर्गत शामिल किए गए पुराने पोत पीएनएस यारमूक और पीएनएस तबूक का आकार तुलनात्मक रूप से छोटा था। वे जहाज लगभग 2,300 टन विस्थापन वाले थे और उनकी लंबाई करीब 91 मीटर थी। इसके उलट, हुनैन और यमामा वाले नए दूसरे बैच के पोत लगभग 2,600 टन वजनी हैं और इनकी लंबाई बढ़कर 98 मीटर हो चुकी है।
आकार और विस्थापन में यह बढ़ोतरी जहाज को समुद्र की विकट परिस्थितियों में बेहतर संतुलन प्रदान करती है। अतिरिक्त जगह मिलने से इसमें आधुनिक संचार उपकरण, उन्नत मिशन कंट्रोल सिस्टम और अतिरिक्त लॉजिस्टिक सामग्री ले जाने की क्षमता जुड़ जाती है, जिससे यह पुराने जहाजों की तुलना में कहीं अधिक समय तक समुद्र में सक्रिय रह सकता है।
अरब सागर में टकराव की घटना और कूटनीतिक हलचल
15 सितंबर को हुई टक्कर के समय भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में अपने नियमित निगरानी मिशन पर तैनात था। भारतीय पक्ष के अनुसार, पाकिस्तानी जहाज अत्यधिक तेज गति से आया और उसने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों की अनदेखी करते हुए बेहद असुरक्षित ढंग से पैंतरेबाजी की। इस असावधानीपूर्ण संचालन के परिणामस्वरूप दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई। भारत ने इस घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे नौसैनिक आचार संहिता के खिलाफ बताया।
भारतीय नौसेना के जिस युद्धपोत से यह टक्कर हुई, उसके नाम का आधिकारिक खुलासा भारतीय अधिकारियों द्वारा नहीं किया गया है। रक्षा जानकारों का मानना है कि दोनों जहाजों की क्षमता की सीधी तुलना तभी संभव है जब भारतीय पोत की श्रेणी की पुष्टि हो, लेकिन रणनीतिक रूप से यह स्पष्ट है कि पीएनएस हुनैन कोई भारी विध्वंसक (डिस्ट्रॉयर) या बड़ा फ्रिगेट नहीं है। यह एक आधुनिक, तेज रफ्तार और हथियारों से लैस गश्ती जहाज है, जिसे निरंतर गश्त और निगरानी के लिए तैयार किया गया है।



















