पाकिस्तान इस समय चौतरफा गंभीर संकटों के भंवर में फंसा हुआ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में आम जनता का गुस्सा चरम सीमा पर पहुंच चुका है, वहीं दूसरी ओर बलूचिस्तान में हिंसक टकराव और अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ता तनाव सुरक्षा तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। घरेलू मोर्चे पर भारी आर्थिक बदहाली और ईंधन की भारी किल्लत के बीच अब समुद्र में भी पाकिस्तानी नौसेना की उकसावे वाली गैरजिम्मेदाराना गतिविधियां सामने आई हैं, जिसका भारतीय नौसेना ने सतर्कता के साथ जवाब देने की पूरी तैयारी रखी है।
पीओके में 100 दिन पूरे, 4 दिनों के बड़े महामंथन की तैयारी
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। जॉइंट अवामी ऐक्शन कमेटी के नेतृत्व में चल रहे जनआंदोलन को अब 100 दिन पूरे हो चुके हैं। स्थानीय जनता में बढ़ती महंगाई, संसाधनों के दोहन और बुनियादी अधिकारों के दमन को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। वहां के नागरिक अब खुलकर पाकिस्तानी सेना के नियंत्रण को खारिज कर रहे हैं और रैलियों में 'पीओके बनेगा हिंदुस्तान' जैसे नारे गूंज रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर पाकिस्तानी हुकूमत की गुलामी स्वीकार नहीं करेंगे।
इस विरोध को निर्णायक मोड़ देने के उद्देश्य से जॉइंट अवामी ऐक्शन कमेटी ने 17 सितंबर से 20 सितंबर तक 4 दिनों का एक बड़ा सम्मेलन बुलाया है। इस चार दिवसीय बैठक में व्यापारी वर्ग, ट्रांसपोर्टर, छात्र संगठन और वकीलों की संस्थाएं एक मंच पर इकट्ठा होकर पाकिस्तान के खिलाफ अपनी भविष्य की व्यापक रणनीति तय करेंगी। समाज के सभी प्रमुख तबकों के एकजुट होने से इस्लामाबाद के हुक्मरानों की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं, क्योंकि यह आंदोलन अब व्यापक जनविद्रोह का रूप ले चुका है।
बलूचिस्तान में तेज हुआ टकराव, झंडों पर लगा प्रतिबंध
पीओके के साथ ही बलूचिस्तान प्रांत में भी हालात पाकिस्तानी शासन के हाथ से पूरी तरह निकलते दिखाई दे रहे हैं। इलाके में सक्रिय संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए द्वारा पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर लगातार घात लगाकर हमले किए जा रहे हैं। बीएलए के लड़ाके एक के बाद एक सैन्य चौकियों को निशाना बनाकर सुरक्षाकर्मियों को पीछे हटने पर मजबूर कर रहे हैं।
जमीनी स्तर पर जनता का असंतोष इस हद तक पहुंच गया है कि कई इलाकों में लोगों ने पाकिस्तानी झंडे को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। सार्वजनिक स्थानों से सरकारी झंडे उतारे जा रहे हैं और वाहनों पर छपे झंडों पर लाल रंग पोतकर विरोध दर्ज कराया जा रहा है। आंतरिक असंतोष के अलावा पश्चिमी सीमा पर अफगानिस्तान के साथ भी तनाव गहराता जा रहा है, जिससे पाकिस्तानी फौज कई मोर्चों पर उलझकर रह गई है।
सऊदी अरब से नाराजगी और मुल्क में पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन का खाका
कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान भारी दबाव का सामना कर रहा है। सऊदी अरब पर हुए हूती हमलों के बाद अपेक्षित सहयोग न देने के कारण पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत हुई है। वहीं पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण आपूर्ति शृंखला बाधित होने से पाकिस्तान में तेल का गंभीर संकट पैदा हो गया है। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और तेल की कमी से निपटने के लिए शहबाज शरीफ प्रशासन अब देश में पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
इस प्रस्तावित आपातकालीन योजना के तहत कई सख्त पाबंदियां लगाने की तैयारी की गई है, जिनमें प्रमुख कदम इस प्रकार हैं
- दफ्तरों के काम के दिन: ईंधन और बिजली की बचत के लिए सरकारी व निजी दफ्तरों में सप्ताह में केवल 4 दिन कामकाज की अनुमति दी जाएगी।
- शैक्षणिक संस्थानों पर पाबंदी: सभी स्कूलों को बंद रखने का प्रस्ताव है, जबकि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से कराई जाएगी।
- कॉरपोरेट और आईटी क्षेत्र: निजी कंपनियों और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सप्ताह में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य करने की योजना है।
- बाजारों पर समय सीमा: सभी शॉपिंग मॉल्स और प्रमुख वाणिज्यिक बाजारों को रात 8 बजे के बाद बंद करने का निर्देश दिया जाएगा।
- होटल और मैरिज हॉल: ऊर्जा खपत घटाने के मकसद से रेस्टोरेंट और मैरिज हॉलों को रात 10 बजे के बाद संचालन की अनुमति नहीं होगी।
- सरकारी खर्च में कटौती: प्रशासनिक फिजूलखर्ची रोकने के लिए मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के पेट्रोल भत्ते में सीधे 50 प्रतिशत की भारी कटौती की जाएगी।
अरब सागर में पाकिस्तानी युद्धपोत का दुस्साहस और भारतीय नौसेना का कड़ा रुख
घरेलू स्तर पर भुखमरी, कंगाली और व्यापक जनाक्रोश से घिरी पाकिस्तानी सत्ता अपनी जनता का ध्यान भटकाने के लिए पुरानी चालों पर उतर आई है। इसी क्रम में उत्तर अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में पाकिस्तानी नौसेना ने एक अत्यंत गैरजिम्मेदाराना और खतरनाक हरकत को अंजाम दिया। 15 सितंबर की शाम ओमान के तट से लगभग 220 किलोमीटर पूर्व में जब भारतीय नौसेना का एक प्रमुख युद्धपोत अपने नियमित निगरानी गश्त पर था, तभी पाकिस्तान का हुनैन-क्लास कॉरवेट युद्धपोत अत्यधिक तेज गति से भारतीय जहाज की दिशा में आगे बढ़ा।
समुद्र की ऊंची लहरों और खराब मौसमी परिस्थितियों के बावजूद पाकिस्तानी जहाज के कमांडर ने नौवहन सुरक्षा के बुनियादी अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी करते हुए गति नियंत्रित नहीं की और जानबूझकर आक्रामक युद्धाभ्यास करने लगा। इस लापरवाही के चलते पाकिस्तानी जहाज भारतीय युद्धपोत से टकरा गया। गनीमत यह रही कि इस टक्कर से भारतीय नौसैनिक जहाज को कोई क्षति नहीं पहुंची। समुद्री शिष्टाचार और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने वाली इस घटना के बाद भारतीय नौसेना समंदर में किसी भी प्रकार के दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी सतर्कता के साथ तैनात है।



















