पाकिस्तान और ईरान की सीमा पर हालिया घटनाक्रम के बाद तनाव का माहौल गहरा गया है। बलूचिस्तान के अशांत ग्वादर जिले में सुरक्षा चौकियों और परिसरों को निशाना बनाकर कई बड़े हमले किए गए हैं, जिसके चलते इलाके में दहशत फैल गई है। पिशुकन और सुर जैसे तटीय कस्बों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं, और भारी गोलीबारी के कारण स्थानीय आबादी सहमी हुई है। इस हिंसक माहौल के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र में व्यापक स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
तीर्थयात्रा और परिवहन पर लगा कड़ा प्रतिबंध
सीमा पर बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए ईरान और इराक जाने वाले सभी तीर्थयात्रियों के जमीनी सफर पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अरबाईन तीर्थयात्रा के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को अब केवल हवाई यात्रा का विकल्प चुनने के निर्देश दिए गए हैं। धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सड़क मार्ग से यात्रा की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों ने जायरीन को अपनी फ्लाइट बुकिंग पहले से पक्की करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त राशि साथ रखने की सलाह दी है।
व्यापारिक गतिविधियों के ठप होने से बढ़ा गतिरोध
दोनों देशों के बीच गब्द-रिमदान बॉर्डर क्रॉसिंग पर द्विपक्षीय व्यापार पिछले पांच दिनों से पूरी तरह बाधित है। पाकिस्तान की सीमा की तरफ सैकड़ों मालवाहक ट्रक कतारों में फंसे हुए हैं, जिससे ड्राइवरों और स्थानीय व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ट्रकों के खड़े रहने के कारण ड्राइवरों के सामने पीने के पानी और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय कारोबारियों और व्यापारियों का दावा है कि इस व्यापारिक नाकाबंदी के कारण आयातकों और निर्यातकों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। पाकिस्तानी अधिकारियों का तर्क है कि यह रोक मुख्य रूप से तस्करी को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लागू की गई है।
ईरान की ओर से सीमा सील करने की खुली धमकी
इस गतिरोध के बीच ईरानी संसद के वरिष्ठ नेता और ईरान-पाकिस्तान संसदीय मैत्री समूह के प्रमुख फदाहुसैन मलेकी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो ईरान अपनी तरफ से सीमा को पूरी तरह सील कर देगा। मलेकी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अमेरिकी दबाव के कारण ईरान के साथ व्यापारिक गतिविधियों को सीमित कर रहा है। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तेहरान की यात्रा के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ से मुलाकात की थी और सीमा खोलने के आदेश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अमेरिकी दबाव के आरोप
ईरानी संसद के अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई समुद्री नाकेबंदी के कारण जमीनी मार्ग ईरान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका की तरफ से तेहरान पर लगातार कड़े आर्थिक दबाव बनाए जा रहे हैं। ऐसे समय में पाकिस्तान द्वारा सीमा पर व्यापार और यातायात को रोकना ईरान की आर्थिक स्थिति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रहा है। हालांकि ईरानी नेताओं के इन आरोपों के बावजूद पाकिस्तानी पक्ष की ओर से व्यापारिक ट्रकों के रोके जाने के पीछे मुख्य रूप से सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों का ही हवाला दिया जा रहा है।



















