घर की छोटी सी जगह को भी प्रकृति के करीब लाया जा सकता है, जिसके लिए बालकनी में बागवानी करना एक बेहतरीन तरीका है। सुबह की चाय की चुस्की लेते हुए ताजे फूलों की महक का आनंद लेना दिन की शुरुआत बेहद खूबसूरत बना देता है। इसके लिए किसी बड़े बगीचे की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि कई पौधे छोटे गमलों में भी आसानी से पनप जाते हैं। कुछ सुंदर बेलें तो बालकनी की रेलिंग और दीवारों को प्राकृतिक हरियाली से ढक सकती हैं। ये पौधे न केवल आपके घर की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि त्यौहारों के समय परिवार के साथ तस्वीरें खींचने के लिए एक आकर्षक पृष्ठभूमि भी तैयार करते हैं। गुलाब और गेंदे जैसे सामान्य विकल्पों से आगे बढ़कर, आइए छह ऐसे खास भारतीय पौधों के बारे में जानते हैं जो किसी भी बालकनी का रूप बदल सकते हैं।
अपराजिता की नीली बेल
नीले रंग के खूबसूरत फूलों के लिए जानी जाने वाली अपराजिता को बटरफ्लाई पी भी कहा जाता है। यह उन स्थानों के लिए एकदम सही है जहां रेलिंग, जाली या लकड़ी का ढांचा उपलब्ध हो, क्योंकि इसकी बेलें आसानी से ऊपर की ओर फैलती हैं। इसके गहरे नीले रंग के फूल देखने वालों का मन मोह लेते हैं। इन सुंदर फूलों का उपयोग कई प्रकार की हर्बल चाय और पेय पदार्थों में प्राकृतिक रंग देने के लिए भी किया जाता है। अपराजिता के पौधे को पनपने के लिए भरपूर धूप की आवश्यकता होती है। इसे ऐसी मिट्टी में रोपना चाहिए जिसमें पानी न रुके, और इसकी बेल को दिशा देने के लिए किसी सहारे का इस्तेमाल करना चाहिए।
चमेली की पारंपरिक महक
सफेद रंग के चमेली के फूल अपनी मनमोहक खुशबू से आसपास के पूरे वातावरण को तरोताजा कर देते हैं। यह पौधा घर की बालकनी में एक पारंपरिक और बेहद सुकून भरा माहौल पैदा करता है। चमेली की विभिन्न किस्में या तो झाड़ी के रूप में बढ़ती हैं या फिर बेल बनकर फैलती हैं। इन्हें बालकनी की रेलिंग के करीब आसानी से लगाया जा सकता है। इस पौधे को अच्छी ग्रोथ और अधिक मात्रा में फूल देने के लिए नियमित देखभाल, पर्याप्त धूप और अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी चाहिए होती है। प्राकृतिक खुशबू के शौकीनों के लिए यह एक लाजवाब विकल्प है।
पारिजात के नाजुक फूल
रात के समय खिलने वाले पारिजात या हरसिंगार के पौधे अपने छोटे सफेद फूलों और उनके बीच के नारंगी हिस्से के लिए खासे लोकप्रिय हैं। इसकी महक बेहद खास होती है, और इसके फूल आमतौर पर शाम या रात में खिलकर सुबह तक जमीन पर एक चादर की तरह बिखर जाते हैं। पारिजात आमतौर पर एक छोटी झाड़ी या छोटे पेड़ के आकार में विकसित होता है। इसलिए इसे बालकनी में लगाने के लिए हमेशा थोड़ा बड़ा गमला चुनें। पर्याप्त रोशनी, सही प्रकार की मिट्टी और थोड़ी सी देखरेख से यह पौधा आपकी बालकनी की शोभा में चार चांद लगा सकता है।
मोगरे की भीनी खुशबू
मोगरे के पौधों की खुशबू के बारे में तो हर कोई जानता है, और इसे अपनी बालकनी में शामिल करना एक शानदार फैसला साबित हो सकता है। इसके छोटे और सफेद रंग के फूल जितने देखने में प्यारे लगते हैं, उतनी ही मीठी इनकी महक होती है। शाम ढलते ही मोगरे की महक बालकनी के पूरे माहौल को खुशनुमा और जीवंत बना देती है। इस पौधे को खिलने के लिए तेज धूप पसंद है। इसके बढ़ने और फूलने के दिनों में इसे रोजाना पानी देना चाहिए, मगर इस बात का विशेष ध्यान रखें कि गमले में जलभराव न हो। उचित देखभाल मिलने पर मोगरा आपके घर के इस कोने को एक महकता हुआ विश्राम स्थल बना देता है।
बोगनवेलिया के रंग-बिरंगे फूल
जिन लोगों की बालकनी में पूरे दिन तेज धूप आती है और जो वहां तरह-तरह के रंगों का छटा बिखेरना चाहते हैं, उनके लिए बोगनवेलिया एक बेहतरीन पौधा है। इसके गुलाबी, लाल, बैंगनी और नारंगी रंग के हिस्से बालकनी में एक अलग ही ऊर्जा भर देते हैं। यह मजबूत और कांटेदार शाखाओं वाली बेल होती है जिसे आसानी से किसी भी रेलिंग या मेहराब के सहारे फैलाया जा सकता है। यह पौधा कड़ी धूप और सूखी मिट्टी में भी अच्छी तरह पनपता है। एक बार अच्छी तरह विकसित होने के बाद इसे बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती, बस इसे व्यवस्थित रखने के लिए बीच-बीच में इसकी छंटाई करनी पड़ती है।
चंपा का मनमोहक रूप
अपने अनूठे आकार और दिलकश महक के कारण चंपा का पौधा भारतीय घरों में एक विशेष स्थान रखता है। इसे प्लूमेरिया या फ्रैंगिपानी के नाम से भी जाना जाता है। इसकी अलग-अलग प्रजातियों में सफेद, हल्के पीले और क्रीमी रंग के फूल देखने को मिलते हैं। चंपा को खिलने के लिए भरपूर धूप और ऐसी मिट्टी चाहिए जिसमें पानी जमा न हो। इसे बालकनी में रखे बड़े गमलों में आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी फैली हुई शाखाएं और खुशबूदार फूल बालकनी को एक बेहद शांत और आकर्षक कोना बना देते हैं।



















