उत्तराखंड के मदरसों में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की निगरानी अब अपार आईडी के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी। शिक्षा विभाग की तरफ से बच्चों का एक विस्तृत डेटाबैंक तैयार किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक छात्र से जुड़ी सभी जानकारियां स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो सकेंगी। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत गांधी का कहना है कि अक्सर यह सवाल उठता था कि अन्य राज्यों से बच्चे तालीम हासिल करने के लिए उत्तराखंड आ रहे हैं, लेकिन वे कहां ठहर रहे हैं और उनकी स्थिति क्या है, इसकी पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाती थी। अब नए प्राधिकरण के गठन के बाद इस पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आ गई है और स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।
मदरसों में दोहरी शिक्षा और बोर्डिंग व्यवस्था
राज्य के कुल 33 मदरसों में इस समय धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ स्कूली शिक्षा भी एक साथ दी जा रही है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के प्रभाव में आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव के दावे किए जा रहे हैं। देहरादून जिले में अब तक कुल 33 मदरसे इस प्राधिकरण के अंतर्गत आ चुके हैं, जिनमें से अधिकांश संस्थानों में बच्चे बोर्डिंग यानी छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। देहरादून के किशनपुर क्षेत्र स्थित एक पंजीकृत मदरसे की पड़ताल करने पर यह सामने आया कि वहां अध्ययनरत अधिकांश छात्र मूल रूप से बिहार राज्य से ताल्लुक रखते हैं।
छात्राओं की कम उपस्थिति और अलग समय
इस पूरी व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि संबंधित मदरसे में एक भी बालिका अध्ययन करती हुई नहीं पाई गई। जमीनी पड़ताल में यह बात सामने आई कि उत्तराखंड के मदरसों में लड़कियों की संख्या बेहद कम है। जो बालिकाएं दीनी तालीम हासिल करने के लिए आती हैं, उनका समय लड़कों से बिल्कुल अलग होता है। इसके अलावा, लड़कों और लड़कियों को दी जाने वाली दीनी तालीम की कक्षाएं भी पूरी तरह अलग संचालित की जाती हैं। विद्यार्थियों की सटीक मॉनिटरिंग के लिए अब शिक्षा विभाग की तरफ से अपार आईडी जनरेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
क्या है अपार आईडी और इसके लाभ
अपार आईडी यानी ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी पहल के तहत लागू किया गया है। इसके अंतर्गत प्रत्येक छात्र को 12 अंकों की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान की जाती है। प्राथमिक कक्षाओं से लेकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले हर विद्यार्थी के पास यह पहचान होगी, जिसे डिजीलॉकर से जोड़ा गया है। इस डिजिटल आईडी में छात्रों के सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र, मार्कशीट और पूरा एकेडमिक डेटाबेस सुरक्षित रहता है। यह प्रणाली विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्कोर पर भी नजर रखती है। इसके अलावा, स्कूल या संस्थान बदलने की स्थिति में ट्रांसफर सर्टिफिकेट प्राप्त करने की प्रक्रिया भी इससे काफी सरल हो जाती है।
अवैध मदरसों पर कार्रवाई और सुधारात्मक कदम
प्रदेश सरकार ने नियमों का उल्लंघन कर अवैध तरीके से संचालित हो रहे 19 मदरसों को अब तक सील कर दिया है, जबकि 227 मदरसों ने खुद ही अपने ताले लगा लिए हैं। हालांकि, जो संस्थान पूरी तरह सरकारी नियमों के तहत चल रहे हैं, वहां भी नई प्रणाली को सुचारू रूप से समझने में थोड़ा वक्त लग रहा है। कुछ आधुनिक स्कूलों या मदरसों के नाम पर चल रही संस्थाओं में भी व्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर लाने में समय लग रहा है। लेकिन बच्चों की शिक्षा को लेकर अतीत में जो अनिश्चितता और संशय बना रहता था, उसे अब पूरी तरह सरकारी तंत्र और सिस्टम के दायरे में लाया जा रहा है।


















