पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां सैफुल्ला झील में बोटिंग करते वक्त एक नाव पलट गई और एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई. हादसे के वक्त नाव में परिवार के आठ सदस्य सवार थे, जिनमें से एक व्यक्ति अब भी लापता बताया जा रहा है और रेस्क्यू टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं.
कैसे हुआ हादसा
पुलिस के मुताबिक जिस परिवार के साथ यह हादसा हुआ, वह स्वात जिले के मशहूर पर्यटन स्थल कलाम इलाके में घूमने के लिए पहुंचा था. परिवार के आठ लोग झील में नाव से सैर कर रहे थे, तभी अचानक नाव पानी में पलट गई. देखते ही देखते यह सैर परिवार का आखिरी सफर बन गई. हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस, बचाव दल और आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंच गए और बचाव अभियान शुरू किया गया. अब तक सात शवों को झील से बाहर निकाला जा चुका है, जबकि एक व्यक्ति की तलाश अब भी जारी है. पुलिस, रेस्क्यू टीम और स्थानीय लोग मिलकर लगातार झील में खोजबीन कर रहे हैं और अधिकारियों को उम्मीद है कि लापता व्यक्ति भी जल्द मिल जाएगा. वहीं प्रशासन ने हादसे की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी है.
क्यों खतरनाक मानी जाती है सैफुल्ला झील
सैफुल्ला झील खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के नारान क्षेत्र में स्थित एक जानी मानी प्राकृतिक झील है, जहां हर साल बड़ी तादाद में सैलानी बोटिंग करने और झील की खूबसूरती निहारने पहुंचते हैं. लेकिन यही झील कई बार हादसों की वजह भी बन चुकी है. मौसम का अचानक बिगड़ना, तेज हवाएं, बेहद ठंडा पानी और सुरक्षा इंतजामों की कमी, ये सभी वजहें यहां दुर्घटनाओं का कारण बनती रही हैं. ताजा हादसे में भी शुरुआती तौर पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी को वजह बताया जा रहा है, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही असल कारणों की पुष्टि हो पाएगी. गौरतलब है कि खैबर पख्तूनख्वा यानी केपीके इलाका सुरक्षा के लिहाज से पहले से ही संवेदनशील माना जाता रहा है और हाल के दिनों में यहां लगातार हुए हादसों ने इसे एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है.
कुछ दिन पहले भी हो चुका है बड़ा हादसा
इससे पहले लाहौर के कैना इलाके में एक प्राइवेट ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से 14 बच्चों की जान चली गई थी, जबकि कई बच्चे इस हादसे में घायल भी हुए थे. यह हादसा उसी वक्त हुआ जब सेंटर में बच्चों की क्लास चल रही थी, यही वजह रही कि किसी को भागने तक का मौका नहीं मिल पाया. इस घटना पर पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग यानी एचआरसीपी ने गहरी चिंता जताई थी. आयोग ने कहा था कि जर्जर हो चुकी इमारतों की सही तरीके से जांच न होना और कमजोर निर्माण ही ऐसे हादसों की असली वजह बनते हैं. आयोग ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की थी.
पाकिस्तान में इमारतों और छतों के गिरने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं. हाल ही में पंजाब के मुजफ्फरगढ़ में एक दीवार गिरने से दो सगी बहनों की मौत हो गई थी, वहीं फैसलाबाद में एक कमरे की छत गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई थी. इस तरह की लगातार हो रही घटनाओं ने पाकिस्तान में सार्वजनिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.













