बलूचिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच पाकिस्तानी हुकूमत और सैन्य बलों की कार्रवाई से पूरे प्रांत में तनाव चरम पर पहुंच गया है। स्थानीय नागरिकों द्वारा पाकिस्तान से अलग होकर अपनी आजादी का ऐलान करने और स्वतंत्रता दिवस मनाने के बाद प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। खुजदार शहर में अनिश्चितकालीन लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है, जहां लोगों के घर से बाहर निकलने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। इसके साथ ही खारान, जेहरी, कालात, मूला और जियारत जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर जमीनी और हवाई सैन्य अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में आम जनजीवन ठप हो चुका है।
खुजदार में सख्त पाबंदियां और सैन्य अभियानों का विस्तार
प्रशासन ने खुजदार में कर्फ्यू जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ा दी गई है, और चेतावनी दी गई है कि बिना किसी बेहद जरूरी वजह के सड़कों पर निकलने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पाबंदी के कारण शहर के बाजार, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह बंद पड़े हैं। स्थानीय लोगों को खाने-पीने और दवाओं जैसी बुनियादी वस्तुओं को जुटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सैन्य अभियानों की लपेट में आए खारान जिले के लिज्जे इलाके में जमीनी सेना के साथ-साथ लड़ाकू ड्रोन और हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। स्थानीय स्रोतों के अनुसार, इन हवाई छापों और ड्रोन हमलों में एक निर्दोष किसान की जान चली गई है, जबकि कई अन्य नागरिकों के घायल होने की खबर है। हालांकि पाकिस्तानी सेना का दावा है कि ये हमले उग्रवादी ठिकानों को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय आबादी का आरोप है कि सैन्य कार्रवाइयों का शिकार सीधे तौर पर आम नागरिक बन रहे हैं।
बीएलए का आक्रामक अभियान और गैस पाइपलाइन में बड़ा धमाका
सुरक्षा बलों की इस सख्त कार्रवाई के जवाब में विद्रोही संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। बीएलए ने दावा किया है कि उसने बीते एक सप्ताह के दौरान सिलसिलेवार 38 हमलों को अंजाम दिया है। इन हमलों में पाकिस्तानी सेना के 32 जवानों के मारे जाने का दावा संगठन द्वारा किया गया है। इसके अलावा, उग्रवादियों ने एक मुख्य 18 इंच चौड़ी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन को विस्फोट करके उड़ा दिया है। इस धमाके के कारण प्रांतीय राजधानी क्वेटा समेत आसपास के पांच प्रमुख जिलों में गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। पहले से ही संसाधनों के असमान वितरण से जूझ रहे आम लोगों की समस्याएं इस बुनियादी ऊर्जा संकट से और ज्यादा विकराल हो गई हैं। स्थिति को देखते हुए बीएलए ने पूरे बलूचिस्तान में 'ब्लैक डे' का आह्वान करते हुए पूर्ण बहिष्कार की घोषणा की है, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
संचार पाबंदियों के बावजूद सड़कों पर उतरे नागरिक
सैन्य प्रशासन ने विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए कई प्रभावित जिलों में इंटरनेट और मोबाइल संचार सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया है। बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाने के बावजूद बलूचिस्तान की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। युवाओं, मध्यम वर्गीय परिवारों और महिलाओं की बड़े पैमाने पर भागीदारी देखी जा रही है। बलूच यकजहती कमेटी जैसे सामाजिक संगठनों के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी मुख्य राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों को जाम कर शांतिपूर्ण धरने दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में सालों से लापता किए गए बलूच नागरिकों का हिसाब देना, निर्दोषों पर हो रही सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोकना और बुनियादी मानवाधिकारों की बहाली शामिल है। प्रदर्शनों को दबाने के लिए पुलिस और सेना द्वारा आंसू गैस, लाठीचार्ज, गिरफ्तारियों और सीधी फायरिंग की खबरें भी आई हैं, जिससे आम जनता का आक्रोश और अधिक भड़क गया है।
अंतर्राष्ट्रीय मंचों से गुहार और मानवाधिकार की मांग
बलूचिस्तान में लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और केंद्र सरकार की उपेक्षा को लेकर नाराजगी रही है। अब सैन्य कार्रवाई और F-16 जैसे युद्धक विमानों से बमबारी की घटनाओं के बाद यह असंतोष एक व्यापक जनआंदोलन में बदल चुका है। स्थानीय नागरिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता अब संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर वैश्विक संस्थाओं को संज्ञान लेना चाहिए और बलूच लोगों की स्वायत्तता व एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उनकी पहचान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जानी चाहिए।



















