पाकिस्तान में जारी गहराते आर्थिक संकट, आंतरिक अशांति और नागरिक विरोध प्रदर्शनों के बीच सैन्य नेतृत्व पर सवाल लगातार तेज हो रहे हैं। देश की वर्तमान परिस्थितियों के लिए वर्तमान सेना प्रमुख आसिम मुनीर के निर्णयों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हालांकि, आसिम मुनीर की कार्यशैली और स्वभाव को लेकर जताई जा रही चिंताएं नई नहीं हैं। सर्वोच्च पद पर उनकी नियुक्ति से पहले ही पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने उनकी मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की थी। बाजवा द्वारा दी गई इस चेतावनी का ब्योरा एक गुप्त चर्चा के दौरान सामने आया था, जिससे यह साफ होता है कि शीर्ष सैन्य नेतृत्व को आसिम मुनीर के मिजाज का अंदाजा पहले ही हो चुका था।
बनीगाला की गुप्त बैठक और बाजवा की चेतावनी का खुलासा
अगस्त 2022 की एक शाम इस्लामाबाद स्थित इमरान खान के निजी आवास बनीगाला में एक अत्यंत गोपनीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ देश के दस वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक शामिल थे, जिनमें मोहम्मद मालिक, काशिफ, मेहर और हबीब अकरम जैसे जाने-माने चेहरे मौजूद थे। वार्ता के दौरान जब पत्रकार मोहम्मद मालिक ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी और तत्कालीन सैन्य अधिकारी आसिम मुनीर के बीच उपजे मतभेदों का मुद्दा उठाया, तब कमरे का माहौल पूरी तरह बदल गया।
इस सवाल का उत्तर देते हुए इमरान खान ने उपस्थित पत्रकारों के सामने एक बड़ा खुलासा किया। इमरान खान के अनुसार, जनरल कमर जावेद बाजवा ने व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात की थी और बेहद चिंतित लहजे में आसिम मुनीर को सेना प्रमुख के पद पर नियुक्त न करने की सलाह दी थी। बाजवा ने कहा था कि आसिम मुनीर मानसिक रूप से स्थिर नहीं हैं और अत्यधिक भावुक तथा सनकी स्वभाव के व्यक्ति हैं। पूर्व सेना प्रमुख ने आगाह किया था कि यदि आसिम मुनीर को कमान सौंपी गई तो वह देश को एक ऐसे भारी संकट और अनिश्चितता में धकेल देंगे जिसे संभालना नामुमकिन हो जाएगा। आज पाकिस्तान में दिख रही राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल को इसी दिमागी अस्थिरता का परिणाम माना जा रहा है।
सेना के अजीबोगरीब दावे और आध्यात्मिक कहानियों का सहारा
सैन्य नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए रक्षा विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि पाकिस्तानी सेना अक्सर अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए बेतुके दावों का सहारा लेती रही है। पत्रकार मोईद पीरजादा और रक्षा विशेषज्ञ मेजर गौरव आर्य की एक परिचर्चा में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि जब भी पाकिस्तानी सेना को कूटनीतिक या रणनीतिक मोर्चे पर असफलता मिलती है, तो वह धार्मिक और अलौकिक आख्यानों का आवरण ओढ़ लेती है।
ऑपरेशन सिंदूर तथा भारत के साथ हुए सैन्य तनाव के दौरान के उदाहरण देते हुए मेजर गौरव आर्य ने बताया कि पाकिस्तानी अधिकारियों और नेताओं ने सार्वजनिक मंचों पर यह दावा किया था कि युद्ध के मैदान में अदृश्य शक्तियां और फरिश्ते उनकी सहायता कर रहे थे। यहां तक कि सरकारी बयानों में यह तर्क भी दिया गया कि भारत की ओर दागी गई पाकिस्तानी मिसाइलों को फरिश्तों ने स्वयं धक्का देकर आगे तक पहुंचाया था। विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी देश का सैन्य और प्रशासनिक नेतृत्व इस प्रकार की अतार्किक बातें करता है, तो उसकी निर्णय क्षमता और मानसिक परिपक्वता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आईएसआई से बेदखली, भ्रष्टाचार के आरोप और लंदन प्रवास
डिफेंस एक्सपर्ट आदि अंचित ने आसिम मुनीर के पिछले सैन्य रिकॉर्ड का विश्लेषण करते हुए उनके करियर से जुड़े कई विवादों को रेखांकित किया। आसिम मुनीर को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का प्रमुख नियुक्त किया गया था, लेकिन महज छह महीने के भीतर ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने उन्हें पद से हटा दिया था। इस बेदखली का मुख्य कारण इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी से जुड़े मामलों में आसिम मुनीर का अनावश्यक हस्तक्षेप बताया गया था।
इसके अतिरिक्त, आसिम मुनीर पर अपने कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के भी गंभीर आरोप लगे। उन पर एक प्रमुख टाइल व्यापारी से 90 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया था। यद्यपि सैन्य संस्थाओं द्वारा ऐसे मामलों को उजागर होने से रोका जाता रहा है, फिर भी यह विषय रक्षा गलियारों में व्यापक रूप से चर्चित रहा। सेना प्रमुख की दौड़ शुरू होने से ठीक पहले आसिम मुनीर लगभग तीन महीने तक अज्ञात स्थान पर रहे और बाद में उनकी उपस्थिति लंदन में दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, तीन महीने तक लंदन में रहकर शीर्ष पद पाने के लिए रणनीतिक योजनाएं बनाई गई थीं। एक ऐसा अधिकारी जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हों और जिसकी मानसिक स्थिरता पर खुद उसके पूर्व बॉस ने संदेह जताया हो, उसके हाथ में परमाणु संपन्न देश की कमान होना पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम है।



















