दक्षिण एशियाई मुल्क पाकिस्तान के अशांत पश्चिमी सीमांत क्षेत्र में उथल-पुथल अचानक बहुत तेज हो गई है। बलूचिस्तान के विशाल भूभाग में विद्रोही गतिविधियों ने पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के लिए असाधारण सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया है। विद्रोही संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने एक व्यापक अभियान चलाकर मात्र एक सप्ताह में सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर सिलसिलेवार तेरह घातक कार्रवाइयों को अंजाम दिया। संगठन के अनुसार, 7 सितंबर से 13 सितंबर की अवधि में चलाए गए इन अभियानों में पाकिस्तानी सेना के जवानों और सरकार समर्थित स्थानीय सहायक दस्तों, जिन्हें डेथ स्क्वाड कहा जाता है, के कुल 43 सदस्य मारे गए हैं। इस खूनी संघर्ष के बीच खैबर पख्तूनख्वा के कोहाट स्थित एक मस्जिद में हुए भीषण विस्फोट ने भी देश के सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
बलूचिस्तान के विस्तृत इलाकों में विद्रोही संगठन का जबरदस्त दबाव
विद्रोही संगठन के आधिकारिक प्रवक्ता जीयंद बलूच ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनके लड़ाकों ने बसिमा से लेकर किला अब्दुल्ला तक पूरे सूबे में सुनियोजित जाल बिछाया था। बलूचिस्तान के दस से अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई की गई। इन लक्षित इलाकों में बसिमा, खरान, पंजगुर, चागई, तुंप, सुराब, किला अब्दुल्ला, लसबेला, जिवानी और मशकेल शामिल हैं। संगठन का मुख्य निशाना पाकिस्तानी सेना के गश्ती वाहन, सुरक्षा काफिले, निगरानी चौकियां और संचार तंत्र रहे। इसके अलावा स्थानीय डेथ स्क्वाड के ठिकानों, वाणिज्यिक गाड़ियों, परिवहन पुलों और लिथियम खनन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
दिन-प्रतिदिन के अभियानों का पूरा ब्योरा
सात दिनों तक चले इस खूनी सिलसिले की शुरुआत 7 सितंबर को बसिमा से हुई। वहां लड़ाकों ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी सीपीईसी के मुख्य राजमार्ग की लगभग पांच घंटे तक सख्त घेराबंदी की और गुजरने वाली गाड़ियों की सघन तलाशी ली। इस दौरान सेना के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में 5 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई जख्मी हुए, जबकि जवाबी गोलीबारी में बीएलए के भी 3 लड़ाके मारे गए।
अगले दिन 8 सितंबर को खरान क्षेत्र में सेना के काफिले पर अचानक घात लगाकर हमला किया गया, जिसमें कम से कम 4 सैन्यकर्मी हताहत हुए। उसी दिन पंजगुर में सैनिकों के लिए रसद सामग्री ले जा रहे वाहनों को निशाना बनाया गया और निगरानी के लिए लगाए गए जासूसी कैमरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया।
इसके बाद 10 सितंबर को चागई में रणनीतिक क्वेटा-ताफ्तान व्यापार मार्ग पर आवाजाही रोक दी गई। लड़ाकों ने दो व्यापारिक वाहनों को कब्जे में लिया और विस्फोटकों की मदद से एक महत्वपूर्ण पुल को उड़ा दिया। उसी तारीख को तुंप क्षेत्र में संगठन की विशेष इकाई ने सेना के एक टोही क्वाडकॉप्टर ड्रोन को मार गिराया।
ग्यारह सितंबर को सुराब में दो अलग-अलग स्थानों पर हमले बोले गए। तोबो इलाके में सैन्य काफिले पर हुई कार्रवाई में 6 सैनिक ढेर हुए, जबकि रोदेनी क्रॉस पर हुई दूसरी झड़प में 3 सैनिकों की जान गई और 4 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए।
बारह सितंबर को लसबेला में सेना के बम निरोधक दस्ते के काफिले को निशाना बनाकर भीषण हमला किया गया। विस्फोट और गोलाबारी में सेना की दो गाड़ियां पूरी तरह बर्बाद हो गईं और दो अन्य वाहनों को भारी क्षति पहुंची। संगठन ने दावा किया कि इस अकेले हमले में 9 सैन्यकर्मी मारे गए और 11 से अधिक घायल हुए।
अभियान के अंतिम दिन 13 सितंबर को किला अब्दुल्ला में सबसे बड़ा टकराव देखने को मिला। वहां बीएलए ने डेथ स्क्वाड के एक ठिकाने पर धावा बोलकर उसके 25 सदस्यों को मार गिराने का दावा किया। इसके बाद पाकिस्तानी सैनिकों और विद्रोही लड़ाकों के बीच करीब चार घंटे तक आमने-सामने भारी गोलीबारी चली, जिसमें बीएलए के 5 लड़ाके भी मारे गए।
डेथ स्क्वाड और आर्थिक परियोजनाओं को निशाना बनाने का कारण
बलूच विद्रोही गुट लंबे समय से राज्य प्रायोजित डेथ स्क्वाड का कड़ा विरोध करते रहे हैं। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया तंत्र स्थानीय गुर्गों को हथियार और संरक्षण देकर ऐसे अनौपचारिक गिरोह तैयार करता है, जिनका इस्तेमाल बलूच राजनीतिक कार्यकर्ताओं, राष्ट्रवादियों और सामान्य नागरिकों को अगवा करने तथा उनकी हत्या करने के लिए किया जाता है। यही कारण है कि अब सीधे इन स्थानीय गुर्गों के अड्डों को प्राथमिक निशाना बनाया जा रहा है।
इसके साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर गहरा असंतोष है। सीपीईसी राजमार्ग पर रुकावटें पैदा करना और लिथियम खनन की परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाना इसी असंतोष की अभिव्यक्ति है। विद्रोहियों का तर्क है कि संघीय सरकार और विदेशी कंपनियां स्थानीय बलूच समुदाय को उनके मौलिक अधिकारों और हिस्सेदारी से वंचित रखकर क्षेत्र के बेशकीमती खनिजों की खुली लूट कर रही हैं।
खैबर पख्तूनख्वा के कोहाट में पुलिस मस्जिद पर खूनी हमला
बलूचिस्तान में गहराते संकट के समानांतर खैबर पख्तूनख्वा में भी हिंसा का भीषण दौर देखने को मिला। शुक्रवार को कोहाट में पुलिस परिसर के भीतर स्थित एक मस्जिद को निशाना बनाकर जोरदार धमाका किया गया। इस दिल दहला देने वाले हमले में 16 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 5 पुलिस अधिकारी और 11 आम नागरिक शामिल थे। इसके अलावा 57 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, धमाके के तुरंत बाद सात हथियारबंद हमलावरों ने परिसर में अफरा-तफरी का फायदा उठाने की कोशिश की, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और तनाव फैल गया।



















