पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर में दिनदहाड़े एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने इलाके में भारी तनाव पैदा कर दिया है। सामान्य रूप से दौड़ते ट्रैफिक के बीच अचानक हथियारबंद नकाबपोश लोगों के एक समूह ने बीच सड़क पर पहुंचकर प्रांतीय मंत्री फजल शकूर खान के वाहन को घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर प्रसारित दृश्य यह दर्शाते हैं कि कुछ ही सेकंड के भीतर व्यस्त मुख्य मार्ग अचानक किसी सुरक्षा अभियान या सशस्त्र हमले के मैदान जैसा दिखने लगा। इमरान खान की राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने दावा किया है कि सादे कपड़ों में आए हथियारबंद लोगों ने मंत्री के वाहन को जबरन रोककर उन्हें कथित तौर पर बंधक बना लिया और अपने साथ ले गए।
टोल प्लाजा के पास घेराबंदी और टायरों पर फायरिंग का दावा
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह घटना पेशावर के मोटरवे टोल प्लाजा के समीप उस समय घटी जब मंत्री का काफिला वहां से गुजर रहा था। पार्टी के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि अचानक अत्याधुनिक हथियारों से लैस नकाबपोश लोगों ने वाहन के सामने आकर रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। वाहन को जबरन रोकने के मकसद से गोलियां भी चलाई गईं, जिनमें खास तौर पर कार के टायरों को निशाना बनाया गया ताकि गाड़ी आगे न बढ़ सके। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सामने आए संबंधित फुटेज में कई हथियारबंद लोग सड़क पर दौड़ते और गाड़ी के चारों तरफ घेरा बनाते नजर आते हैं, हालांकि इन वीडियो क्लिपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पार्टी का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम प्रांतीय विधानसभा और पेशावर हाई कोर्ट के बिल्कुल नजदीक खुलेआम अंजाम दिया गया।
विधानसभा में हंगामा और चामकानी थाने में शिकायत
इस कथित घटना के सामने आते ही प्रांतीय स्तर पर भारी राजनीतिक भूचाल आ गया। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और अन्य प्रमुख नेताओं ने सीधे तौर पर कहा कि फजल शकूर खान को गैरकानूनी तरीके से सादे कपड़ों में आए अज्ञात लोगों ने उठाया है। मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि मंत्री के वाहन की दिशा में फायरिंग की गई थी। इसके तुरंत बाद प्रांतीय विधानसभा के भीतर भी यह गंभीर मुद्दा उठाया गया, जहां कानून मंत्री आफताब आलम ने सदन को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। सदन में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष बाबर सलीम स्वाती ने विधानसभा के भीतर ही इस घटना से जुड़े वीडियो फुटेज को बड़े पर्दे पर प्रसारित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। मंत्री फजल शकूर खान के सचिव मोहम्मद आलम के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की आधिकारिक शिकायत चामकानी पुलिस स्टेशन में दर्ज करा दी गई है, जबकि पुलिस प्रशासन ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।
मालाकंद में पूर्व मंत्री शकील अहमद को भी निशाना बनाने की कोशिश
पेशावर की घटना के समानांतर ही एक अन्य राजनीतिक नेता को भी निशाना बनाने की खबर सामने आई। मालाकंद क्षेत्र में पार्टी के प्रमुख नेता और विधायक शकील अहमद को भी कथित तौर पर अगवा करने का प्रयास किया गया। इस सूचना के फैलते ही मालाकंद और आसपास के इलाकों में पार्टी समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने तत्काल सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने महत्वपूर्ण बट खैला बाइपास को दोनों ओर से पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और संपूर्ण सड़क यातायात ठप हो गया। सड़कों पर टायरों में आग लगाकर जोरदार नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को डराने, धमकाने और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए यह सुनियोजित तरीका अपनाया जा रहा है।
प्रांतीय सरकार का कड़ा रुख और व्यापक आंदोलन की चेतावनी
इन दोनों लगातार घटनाओं के बाद खैबर पख्तूनख्वा की सरकार और विपक्षी खेमे के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। प्रांतीय सूचना मंत्री शफी जान ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए इसे देश के संविधान, कानूनी मर्यादाओं और जनता के जनादेश पर सीधा हमला करार दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व का आरोप है कि चुनी हुई प्रांतीय सरकार के मंत्रियों और विधायकों को निशाना बनाकर उन पर अनुचित दबाव डालने की कोशिश की जा रही है। प्रांतीय नेतृत्व ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्वाचित मंत्रियों और जन प्रतिनिधियों के खिलाफ इस तरह की कथित हिंसक और असंवैधानिक कार्रवाइयों पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो पूरे प्रांत में अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन और आंदोलन का दायरा और अधिक व्यापक कर दिया जाएगा।



















