पड़ोसी देश पाकिस्तान में संभावित ऊर्जा संकट को लेकर नागरिकों की चिंताएं अचानक काफी बढ़ गई हैं। देश के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में सार्वजनिक मंच पर आशंका जताई कि यदि आपूर्ति व्यवस्था चरमराई और देश में ईंधन की भारी किल्लत हुई, तो पेट्रोल की कीमत 1,000 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच सकती है। भारतीय मुद्रा के हिसाब से यह आंकड़ा लगभग ₹346 प्रति लीटर बैठता है। हालांकि, स्थिति को संभालने का भरोसा देते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में मुल्क के भीतर पेट्रोल अथवा अन्य आवश्यक ईंधनों की कोई कमी नहीं है।
वैश्विक तेजी के मुकाबले घरेलू कीमतों का गणित
लाहौर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने सरकार की तैयारियों और बाजार की वास्तविकताओं का ब्योरा साझा किया। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकारी तंत्र देशभर में पेट्रोलियम पदार्थों का सुचारू वितरण बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की समीक्षा करते हुए उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तकरीबन 80 फीसदी तक का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
इस भारी वैश्विक उछाल के बरक्स पाकिस्तान में 1 मार्च से अब तक पेट्रोल दरों में लगभग 50 फीसदी की ही बढ़ोतरी की गई है। मंत्री ने कहा कि प्रशासन अभी तक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्धता सुनिश्चित करने में सफल रहा है। फिर भी, यदि अंतरराष्ट्रीय या क्षेत्रीय रुकावटों के कारण सप्लाई चेन में कोई बड़ा व्यवधान पैदा होता है, तो दरें 1,000 पाकिस्तानी रुपये यानी लगभग ₹346 प्रति लीटर के स्तर तक खिंच सकती हैं।
वैश्विक बाजार के रुझान और होर्मुज मार्ग की जमीनी हकीकत
पाकिस्तानी मंत्री के इस चेतावनी भरे बयान के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल मंडियों से कुछ नरमी के संकेत भी सामने आए हैं। सोमवार के कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जहां ब्रेंट क्रूड तकरीबन 2 फीसदी तक नीचे फिसला। इस नरमी से व्यापारियों और आयातकों में यह उम्मीद जगी कि फारस की खाड़ी के रास्ते से तेल की खेप बाहर निकलना धीरे-धीरे आसान हो सकता है।
इसके बावजूद समुद्री मार्ग की समग्र स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य से मालवाहक जहाजों के आवागमन को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आ रहे हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, पिछले दो हफ्तों के दौरान होर्मुज के जलक्षेत्र से कच्चा तेल, गैस और अन्य जरूरी माल की आवाजाही छह महीने के उच्चतम शिखर पर दर्ज की गई। अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने इस दौरान 2,000 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों को इस संकरे समुद्री गलियारे से सुरक्षित गुजरने में सहयोग दिया है, जिसके जरिए एक अरब बैरल से अधिक कच्चा तेल खाड़ी क्षेत्र से बाहर भेजा गया। दूसरी तरफ, शिपिंग से जुड़े व्यापारिक आंकड़ों से संकेत मिलता है कि सप्ताहांत के दौरान जहाजों की संख्या पिछले सप्ताह की तुलना में कम रही, जो यह दर्शाता है कि आवागमन में सुधार के बावजूद जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए होर्मुज की निर्भरता और सर्दियों की तैयारी
पाकिस्तान अपनी कुल ऊर्जा आवश्यकताओं और ईंधन खपत के लिए खाड़ी क्षेत्र से आने वाले जहाजों पर अत्यधिक निर्भर है। होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे समुद्री आपूर्ति नेटवर्क का केंद्रीय बिंदु है। यदि इस संकरे मार्ग पर किसी भी कारण से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो उसका सीधा और त्वरित असर पाकिस्तानी घरेलू बाजार में तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों पर दिखना तय है।
इसी खतरे को देखते हुए पाकिस्तान सरकार लगातार आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के वैकल्पिक इंतजाम तलाश रही है। आगामी महीनों की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए मंत्री अली परवेज मलिक ने भरोसा दिलाया कि सर्दियों के मौसम में देशवासियों को गैस की किल्लत का सामना नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि यदि जरूरत पड़ी तो नागरिकों की जरूरत पूरी करने के लिए सरकार अधिक महंगी दरों पर भी गैस का आयात करने से पीछे नहीं हटेगी।



















