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चीन का नया दांव, पाकिस्तान बना पश्चिम एशिया के रक्षा बाजार का रास्तापाकिस्तान
4 जुल॰ 2026, 10:22 pm (46 दिन पहले)· 3

चीन का नया दांव, पाकिस्तान बना पश्चिम एशिया के रक्षा बाजार का रास्ता

एक अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन अपने सामरिक हित साधने के लिए पाकिस्तान को माध्यम बना रहा है, जिसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच 4 अरब डॉलर से अधिक का जेएफ-17 विमान सौदा है.

अमेरिका स्थित थिंक टैंक मिडिल ईस्ट फोरम की एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल एक माध्यम की तरह कर रहा है, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण पाकिस्तान और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच हुआ एक बड़ा रक्षा सौदा है. रिपोर्ट के मुताबिक इस सौदे की कीमत 4 अरब डॉलर से ज्यादा है और इसमें 16 जेएफ-17 लड़ाकू विमान, प्रशिक्षण विमान और अन्य सैन्य साजोसामान शामिल हैं.

लीबिया के साथ सौदे पर सवाल

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस सौदे से संयुक्त राष्ट्र का लीबिया पर लगा हथियार प्रतिबंध कमजोर पड़ सकता है. साथ ही आशंका जताई गई है कि इससे लीबिया के आंतरिक संघर्ष का सैन्य संतुलन बदल सकता है और पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है. यानी एक सैन्य सौदा सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त भर नहीं, बल्कि पूरे इलाके की स्थिरता को प्रभावित करने वाला कदम बन सकता है.

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चीन पर बढ़ती निर्भरता के आंकड़े

थिंक टैंक ने स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी एसआईपीआरआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया है कि 2021 से 2024 के बीच पाकिस्तान ने अपने कुल हथियार आयात का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अकेले चीन से मंगाया. यह आंकड़ा साफ बताता है कि पाकिस्तान की चीनी हथियारों पर निर्भरता कितनी तेजी से बढ़ी है और चीन की पाकिस्तान के रक्षा क्षेत्र में पकड़ कितनी मजबूत हो चुकी है. रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि पाकिस्तान आज भी अमेरिकी मूल के एफ-16 फाइटिंग फैल्कन विमानों का इस्तेमाल करता है और समय-समय पर अमेरिका से सैन्य सहायता भी लेता रहता है, लेकिन उसकी असली सैन्य ताकत का बड़ा हिस्सा अब चीनी हथियारों पर टिका है. पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर बनाए गए जेएफ-17 विमान के अलावा चीनी ड्रोन, एचक्यू-9 वायु रक्षा प्रणाली और दूसरे रक्षा उपकरणों को भी दुनिया भर के बाजार में सक्रियता से बेचने की कोशिश कर रहा है.

दर्जन भर देशों से चल रही बातचीत

रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ महीनों में पाकिस्तान ने इराक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, लीबिया, मोरक्को, नाइजीरिया, सूडान और इथियोपिया जैसे देशों के साथ रक्षा वार्ताएं और संभावित सौदों की रफ्तार बढ़ा दी है. चीनी मीडिया में भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान इनमें से कई देशों के साथ जेएफ-17 विमानों की खरीद को अंतिम रूप देने की कोशिश में जुटा है.

सऊदी अरब के साथ संभावित सौदे की चर्चा

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सऊदी अरब के साथ एक संभावित समझौते के तहत पाकिस्तान जेएफ-17 विमान देने के बदले वित्तीय व्यवस्था करने पर विचार कर सकता है, हालांकि अभी तक ऐसा कोई सौदा पूरा नहीं हुआ है. इसके पीछे चीनी हथियारों की गुणवत्ता, अमेरिकी सैन्य प्रणालियों के साथ उनके तालमेल और वित्तीय पहलुओं को कारण बताया गया है.

अमेरिका के लिए क्यों है चिंता की बात

रिपोर्ट का कहना है कि इन तमाम पेचीदगियों के बावजूद चीन पाकिस्तान को पश्चिम एशिया में घुसने के गेटवे की तरह इस्तेमाल कर रहा है. पाकिस्तान जब भी अपने चीनी रक्षा उपकरणों का प्रचार करता है, तो इससे चीन की व्यापक रक्षा-औद्योगिक मौजूदगी और उसकी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को ही बल मिलता है. थिंक टैंक का निष्कर्ष है कि चीन पाकिस्तान के जरिए पश्चिम एशिया के रक्षा बाजार में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश में है, और पाकिस्तान द्वारा चीनी हथियारों का यह प्रचार-प्रसार बीजिंग की बड़ी रणनीतिक योजनाओं को आगे बढ़ाने का जरिया बन रहा है.

सवाल-जवाब

यह रिपोर्ट किसने जारी की है?
यह रिपोर्ट अमेरिका स्थित थिंक टैंक मिडिल ईस्ट फोरम की है.
पाकिस्तान और लीबिया के बीच सौदा कितने का है और उसमें क्या शामिल है?
यह सौदा 4 अरब डॉलर से अधिक का है और इसमें 16 जेएफ-17 लड़ाकू विमान, प्रशिक्षण विमान और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं.
पाकिस्तान अपने कितने प्रतिशत हथियार चीन से मंगाता है?
एसआईपीआरआई के आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2024 के बीच पाकिस्तान के 80 प्रतिशत से अधिक हथियार आयात चीन से हुए.
इस सौदे से किस तरह के खतरे बताए गए हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक इससे लीबिया पर संयुक्त राष्ट्र का हथियार प्रतिबंध कमजोर पड़ सकता है, आंतरिक संघर्ष का सैन्य संतुलन बदल सकता है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है.
पाकिस्तान और किन-किन देशों के साथ रक्षा वार्ता कर रहा है?
रिपोर्ट में इराक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, लीबिया, मोरक्को, नाइजीरिया, सूडान और इथियोपिया का जिक्र है.
क्या पाकिस्तान अब भी अमेरिकी हथियार इस्तेमाल करता है?
हां, पाकिस्तान अब भी अमेरिकी मूल के एफ-16 फाइटिंग फैल्कन विमान इस्तेमाल करता है और समय-समय पर अमेरिका से सैन्य सहायता भी लेता है.
सऊदी अरब के साथ संभावित सौदे में क्या प्रस्तावित है?
पाकिस्तान जेएफ-17 विमान देने के बदले वित्तीय व्यवस्था कर सकता है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई सौदा पूरा नहीं हुआ है.
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