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30 बरस का सफर और सामाजिक न्याय की अधूरी लड़ाई, लालू प्रसाद यादव ने बिहार के नाम लिखा भावुक पत्रराजनीति
5 जुल॰ 2026, 3:08 pm (23 दिन पहले)· 2

30 बरस का सफर और सामाजिक न्याय की अधूरी लड़ाई, लालू प्रसाद यादव ने बिहार के नाम लिखा भावुक पत्र

राष्ट्रीय जनता दल के 30वें स्थापना दिवस पर पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने बिहार की जनता के नाम खुला पत्र लिखकर पार्टी के संघर्ष, कार्यकर्ताओं के बलिदान और भाजपा पर तीखे हमलों की बात कही.

राष्ट्रीय जनता दल के 30वें स्थापना दिवस पर पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने बिहार की जनता के नाम एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने पार्टी के तीन दशक के सफर, सामाजिक न्याय की राजनीति, कार्यकर्ताओं के त्याग, भाजपा पर तीखे हमलों और संविधान की रक्षा जैसे कई मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी है.

5 जुलाई 1997 की नींव और तीन दशक का सफर

लालू प्रसाद यादव ने अपने पत्र की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल के 30वें स्थापना दिवस की शुभकामनाओं से की. उन्होंने लिखा कि बिहार के करोड़ों लोगों के लिए 5 जुलाई की तारीख खास मायने रखती है, क्योंकि साल 1997 में आज ही के दिन उन्होंने कई वरिष्ठ साथियों के साथ मिलकर गरीबों, शोषितों, दबे कुचले वर्गों और अल्पसंख्यकों के हक़ों की लड़ाई के लिए राष्ट्रीय जनता दल की नींव रखी थी. पत्र में उन्होंने इसे एक साधारण दिन मानने से इनकार किया और कहा कि इसी दिन बिहार और देश की राजनीति की दिशा और दशा में बड़ा बदलाव आया था.

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कार्यकर्ताओं के त्याग और बलिदान को सलाम

पत्र में लालू प्रसाद यादव ने राजद के कार्यकर्ताओं को दिल से धन्यवाद दिया. उन्होंने लिखा कि पार्टी ने गरीबों, शोषितों और आम जनता की भलाई के लिए जो संघर्ष, त्याग और बलिदान किए हैं, उन्हें शब्दों में बयां करना मुश्किल है. उनके मुताबिक बिहार में फैली सामाजिक और आर्थिक असमानता तथा साम्प्रदायिकता को खत्म करने के साथ ही एक विकसित, मजबूत, समृद्ध, खुशहाल और समतामूलक बिहार बनाने के लिए राजद के अनगिनत निस्वार्थ कार्यकर्ताओं और मतदाताओं ने सेवा, त्याग और परिश्रम की एक अनूठी मिसाल पेश की है. लालू प्रसाद यादव ने कहा कि इन्हीं समर्पित कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से पार्टी का विस्तार संभव हो पाया है और उनकी ऊर्जा, दृढ़ संकल्प और समर्पण के चलते ही राजद हर दिन और मजबूती से आगे बढ़ रही है. उन्होंने हर दौर में पार्टी का साथ देने वाले नेताओं, साथियों और कार्यकर्ताओं का आभार जताया.

विकास के मायने: सिर्फ हवाई अड्डे और मॉल नहीं

पत्र में लालू प्रसाद यादव ने राजद की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता को गरीब, पीड़ित, बहिष्कृत, कमजोर और मजलूम तबकों की वकालत बताया. उन्होंने लिखा कि बदलते दौर में भी उनकी राजनीति मूल रूप से सामाजिक-आर्थिक गैरबराबरी और साम्प्रदायिकता के खिलाफ खड़ी रही है. उनके मुताबिक राजद का विकास मॉडल सिर्फ चमकते हवाई अड्डों, आलीशान मॉल और चमचमाते होटलों तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास के हर पहलू में समाज के गरीब और आखिरी व्यक्ति की भागीदारी और हिस्सेदारी सुनिश्चित करना उनका संकल्प है. लालू प्रसाद यादव ने कहा कि इन मॉल, होटलों और हवाई अड्डों का निर्माण करने वाले शिल्पकारों, कामगारों, कारीगरों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों तथा उनके परिवारों के जीवन में गुणात्मक और सकारात्मक बदलाव लाना ही उनका असली मकसद है, और इससे कम कुछ भी उन्हें किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है.

लोहिया, जेपी, कर्पूरी और आंबेडकर की विरासत का जिक्र

अपने पत्र में लालू प्रसाद यादव ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक ढांचे में मौजूद असमानता के खिलाफ लगातार संघर्ष करते हुए उन्होंने अपने लोकतंत्र को व्यापक, समृद्ध और समावेशी बनाया है. उन्होंने लिखा कि इस यात्रा में ऐसे कई मुकाम हासिल हुए हैं जिनकी चार-पांच दशक पहले कल्पना करना भी मुश्किल था. उन्होंने राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर और बाबासाहेब आंबेडकर के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और गहरी होने की बात कही. लालू प्रसाद यादव के मुताबिक अब पार्टी उस मंजिल पर पहुंच चुकी है, जहां से आर्थिक और मनोवैज्ञानिक सशक्तीकरण की लड़ाई को पूरी तरह अंजाम तक पहुंचाना बाकी है. उन्होंने इस विरासत को अपनी ताकत और पूंजी दोनों बताया.

संवैधानिक संस्थाओं पर हमले और भाजपा को घेरा

पत्र में लालू प्रसाद यादव ने देश में जनवादी, प्रगतिशील, समाजवादी और लोकतांत्रिक सोच वाले तमाम दलों पर निराशा के क्षणिक बादल छाए होने की बात कही. उन्होंने लिखा कि संवैधानिक संस्थाओं के साथ किए जा रहे समझौते, बाजार की आक्रामकता, वोटरों के साथ-साथ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को खरीदने के लिए पूंजी के असीमित इस्तेमाल और दक्षिणपंथी प्रतिक्रियावादी राजनीति ने लोकतंत्र के वजूद के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. लालू प्रसाद यादव के अनुसार पिछड़ों की भागीदारी, शिक्षा और रोजगार में समान अवसर, अल्पसंख्यकों के हक़ और उनकी सुरक्षा, असमान विकास के मुद्दे और सरकार की नाकामियों को एक तथाकथित 'हिंदुत्व के आवरण' से ढका जा रहा है.

'हम सिर्फ चुनाव लड़ने की मशीन नहीं हैं'

पत्र में लालू प्रसाद यादव ने साथियों को संबोधित करते हुए कहा कि हाल के कई राज्यों के चुनाव नतीजों की पड़ताल करने पर साफ पता चलता है कि भाजपा संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर संविधान को दरकिनार करते हुए तानाशाही के बल पर देश को फिर पीछे धकेलने की कोशिश कर रही है. उन्होंने लिखा कि उनकी राजनीति उन्हें इस हालात को स्वीकार करने की इजाजत नहीं देती, इसलिए राष्ट्रीय जनता दल के सभी साथियों को बिना समय गंवाए इस ऐतिहासिक भूमिका के लिए तैयार होना होगा. लालू प्रसाद यादव ने साफ कहा कि हर कार्यकर्ता और नेता को यह समझना होगा कि उनका दल सिर्फ 'चुनाव लड़ने की मशीन' नहीं है. उन्होंने समर्थक समूहों और अन्य प्रगतिशील वर्गों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखकर यह भरोसा दिलाने की जरूरत बताई कि राजद उनके मुद्दों और चिंताओं के लिए संसद और सड़क, दोनों जगह लड़ने में सक्षम है.

'यह गरीबों और वंचितों के वजूद की लड़ाई है'

पत्र के आखिरी हिस्से में लालू प्रसाद यादव ने लिखा कि यह लड़ाई पिछली सभी लड़ाइयों से अलग होने वाली है, क्योंकि यह 'असंवेदनशील संपन्नता' और 'सचेत विपन्नता' के बीच की लड़ाई है. उन्होंने इसे 'मजबूत' और 'मजबूर' वर्गों के बीच की लड़ाई, संवैधानिक संस्थाओं के गैर-संवैधानिक तौर-तरीकों को खत्म करने की लड़ाई और 'संघ तथा कॉरपोरेट घरानों की नई जुगलबंदी' के खिलाफ लड़ाई बताया. लालू प्रसाद यादव ने इसे हिंदुस्तान के गरीबों, किसानों और वंचितों के वजूद की लड़ाई करार दिया. उन्होंने अपने साथियों से अपील की कि छोटी-मोटी चिंताओं और आपसी मतभेदों को दरकिनार कर इस लड़ाई को पूरी तरह अंजाम तक पहुंचाने के लिए सबको एकजुट होकर लड़ना होगा.

अपने इस भावुक पत्र में लालू प्रसाद यादव ने पार्टी के तीन दशक के इतिहास, कार्यकर्ताओं के बलिदान और आगे की राजनीतिक चुनौतियों को एक साथ पिरोते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि राष्ट्रीय जनता दल सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित संगठन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की एक बड़ी लड़ाई का मोर्चा है.

सवाल-जवाब

राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना कब हुई थी?
राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना 5 जुलाई 1997 को लालू प्रसाद यादव ने कई वरिष्ठ साथियों के साथ मिलकर की थी.
लालू प्रसाद यादव ने यह पत्र किसके नाम लिखा है?
उन्होंने यह खुला पत्र राष्ट्रीय जनता दल के 30वें स्थापना दिवस पर बिहार की जनता के नाम लिखा है.
पत्र में लालू प्रसाद यादव ने भाजपा पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर संविधान को दरकिनार करते हुए तानाशाही के बल पर देश को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही है.
पत्र में किन नेताओं की विरासत का जिक्र किया गया है?
लालू प्रसाद यादव ने राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर और बाबासाहेब आंबेडकर के मूल्यों का जिक्र किया है.
लालू प्रसाद यादव ने कार्यकर्ताओं से क्या अपील की?
उन्होंने कार्यकर्ताओं से पार्टी को सिर्फ चुनाव लड़ने की मशीन न मानकर, समर्थक समूहों से लगातार जुड़े रहने और संसद व सड़क दोनों जगह मुद्दों के लिए लड़ने की अपील की.
पत्र में किस बड़ी लड़ाई का जिक्र किया गया है?
उन्होंने इसे गरीबों, किसानों और वंचितों के वजूद की लड़ाई बताया, जिसे उन्होंने 'मजबूत' और 'मजबूर' वर्गों के बीच की लड़ाई कहा.
संपादकीय नीति सुधार नीति

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