उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सियासी उठापटक शुरू हो चुकी है। सहारनपुर से कांग्रेस के लोकसभा सांसद इमरान मसूद को पारिवारिक और राजनीतिक मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। उनके दामाद शायान मसूद ने कांग्रेस का साथ छोड़कर औपचारिक रूप से समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। समाजवादी पार्टी में शामिल होते ही शायान मसूद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के समर्थन में एक गाना साझा करके अपनी नई राजनीतिक पारी का ऐलान भी कर दिया।
लखनऊ में हुआ औपचारिक स्वागत और सोशल मीडिया पर पोस्ट
शायान मसूद अपने पिता शाजान मसूद के साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय पहुंचे। वहां आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद शायान मसूद को पार्टी का लाल पटका पहनाकर संगठन में शामिल किया। इसके बाद शायान मसूद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अखिलेश यादव के पक्ष में प्रचार संबंधी सामग्री साझा की, जिससे इलाके में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
उल्लेखनीय है कि शायान मसूद का पारिवारिक बैकग्राउंड काफी मजबूत राजनीतिक असर वाला रहा है। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री रसीद मसूद के पोते हैं और उनके पिता शाजान मसूद, सांसद इमरान मसूद के सगे भाई हैं। इससे पहले जब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी, तब शायान मसूद को दर्जा प्राप्त मंत्री का पद मिला था। हालांकि बाद के दिनों में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का रुख कर लिया था।
परिवार में नाराजगी और दिशा बैठक का विवाद
इस सियासी दलबदल के पीछे मसूद परिवार के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को मुख्य कारण माना जा रहा है। हाल ही में इमरान मसूद ने सार्वजनिक बयान दिया था कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनके परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव मैदान में नहीं उतरेगा। इस फैसले को लेकर परिवार के बाकी सदस्यों में गहरी नाराजगी पनप रही थी। तभी से यह कयास लगाए जा रहे थे कि शायान मसूद जल्द ही कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं।
इसके अलावा, 18 अगस्त को सहारनपुर में आयोजित जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में भी तीखी राजनीतिक झड़प देखने को मिली थी। इस बैठक में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सहारनपुर देहात सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक आशु मलिक के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। हालांकि 2027 के चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की प्रबल संभावना है और इमरान मसूद लगातार अपनी पार्टी के लिए सम्मानजनक सीटों की मांग कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के नेताओं के बीच मतभेद सतह पर आ चुके हैं।
इमरान मसूद का पुराना राजनीतिक सफर
मसूद परिवार में राजनीतिक दल बदलने का लंबा इतिहास रहा है। खुद इमरान मसूद 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। उस समय उन्हें उम्मीद थी कि सपा उन्हें विधानसभा का टिकट देगी, लेकिन अखिलेश यादव ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया। टिकट न मिलने से नाराज होकर इमरान मसूद बहुजन समाज पार्टी में चले गए। इसके बाद वे पुनः कांग्रेस में वापस आए और 2024 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर सीट से सांसद चुने गए।
सहारनपुर का सियासी गणित और बीजेपी को बढ़त का अनुमान
सहारनपुर जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें आती हैं। मौजूदा समय में इन 7 सीटों में से 5 पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है, जबकि 2 सीटें समाजवादी पार्टी के पास हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मसूद परिवार में आई यह अंदरूनी दरार और स्थानीय स्तर पर नेताओं का आपसी टकराव आगामी 2027 के चुनाव में विपक्षी गठबंधन के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है। अगर मसूद परिवार का वोट बैंक विभाजित होता है, तो इसका सीधा चुनावी फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है।



















