देश की शीर्ष अदालत में शिवसेना के चुनाव चिह्न धनुष बाण के कानूनी विवाद को लेकर सुनवाई आयोजित की गई। अदालत की कार्यवाही संपन्न होने के बाद शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत ने परिसर के बाहर मीडिया से बात की। उन्होंने तर्क रखा कि यदि उनकी पार्टी शिवसेना यूबीटी को धनुष बाण का प्रतीक नहीं मिलता है तो चुनाव आयोग अथवा अदालत को इस चिह्न को फ्रीज या सीज कर देना चाहिए। उनके इस बयान पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री शंभूराज देसाई ने तुरंत कड़ा ऐतराज जताया और इस मांग को पार्टी के मूल विचारों पर हमला करार दिया।
बालासाहेब ठाकरे की आस्था और हिंदुत्व पर टिप्पणी
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री शंभूराज देसाई ने अरविंद सावंत की टिप्पणी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि उनका यह बयान सुनकर पूरे महाराष्ट्र तथा देश भर के शिवसैनिक गहरे अचरज में हैं। देसाई ने याद दिलाया कि धनुष बाण केवल एक राजनीतिक प्रतीक नहीं है बल्कि यह एक ऐसा पवित्र चिन्ह है जिसे शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे अपने पूजा स्थान पर भगवान की तरह पूजते थे। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक प्रतीक को फ्रीज करने की मांग करके अरविंद सावंत ने अनजाने में या अप्रत्यक्ष रूप से बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों और हिंदुत्व की मूल विचारधारा को ही फ्रीज करने की बात कह दी है।
अदालत में दी गई दलीलों पर पक्ष रखने की योजना
सुप्रीम कोर्ट के भीतर हुई बहस के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष यह बात रखी कि दोनों ही शिवसेना गुटों के शीर्ष मुखिया उद्धव ठाकरे हैं। इस दावे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शंभूराज देसाई ने स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं यह बयान नहीं सुना है। उन्होंने कहा कि यदि आज की कानूनी बहस के दौरान ऐसी कोई बात सामने आई है तो सुप्रीम कोर्ट में तैनात उनके वकील पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इसकी पूरी जानकारी देंगे। देसाई ने भरोसा जताया कि जब अदालत में उनके पक्ष की बारी आएगी तब उनके वकील सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पार्टी का मजबूत पक्ष रखेंगे।
संवैधानिक प्रक्रिया और चुनाव आयोग का निर्णय
दूसरी तरफ आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाए थे कि किसी का प्रतीक चुराकर कोई वैध मान्यता हासिल नहीं की जा सकती। इस आरोप पर शंभूराज देसाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका गुट देश के संविधान पर पूर्ण विश्वास रखते हुए अपना कामकाज संचालित करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि स्वतंत्र चुनाव आयोग ने संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उन्हें धनुष बाण का चुनाव चिह्न और पार्टी का आधिकारिक नाम सौंपा है। उल्लेखनीय है कि शिवसेना में हुए विभाजन के बाद से ही धनुष बाण चिह्न और मूल नाम के अधिकार को लेकर दोनों धड़ों के मध्य कानूनी लड़ाई चल रही है। इससे पूर्व चुनाव आयोग ने एक धड़े को असली शिवसेना के रूप में स्वीकार करते हुए नाम व प्रतीक आवंटित किया था, जिसे यूबीटी गुट द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।



















