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अनुशासनात्मक नोटिस मिलने पर बिफरे केहर सिंह खाची, बोले कांग्रेस का बब्बर शेर हूं और षड्यंत्रों से नहीं डरताराजनीति
21 अग॰ 2026, 7:13 am (2 घंटे पहले)· 2

अनुशासनात्मक नोटिस मिलने पर बिफरे केहर सिंह खाची, बोले कांग्रेस का बब्बर शेर हूं और षड्यंत्रों से नहीं डरता

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में कुलदीप राठौर पर विवादित टिप्पणी के बाद केहर सिंह खाची को नोटिस जारी किया गया है, जिस पर खाची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए खुद को बब्बर शेर बताया है।

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। सांसद प्रियंका गांधी के नजदीकी माने जाने वाले और वन निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची को पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। हालांकि नोटिस जारी होने के तुरंत बाद खाची के तेवर ढीले पड़ने के बजाय और सख्त हो गए हैं। उन्होंने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह कांग्रेस के बब्बर शेर हैं और इस तरह के राजनीतिक षड्यंत्रों से बिल्कुल नहीं डरते हैं। यह पूरा विवाद ठियोग विधानसभा क्षेत्र से पार्टी विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पर की गई एक सार्वजनिक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है।

विवादित बयान और कारण बताओ नोटिस की वजह

इस पूरे सियासी घटनाक्रम की शुरुआत ठियोग के कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर पर केहर सिंह खाची द्वारा दिए गए बयान से हुई थी। एक सार्वजनिक मंच से संबोधन के दौरान खाची ने दावा किया था कि ठियोग में विधायक कुलदीप राठौर को 11 लोग भी ठीक से नहीं पहचानते हैं। वरिष्ठ नेता, वर्तमान विधायक और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर इस तरह का बयान देने के बाद पार्टी संगठन में हड़कंप मच गया था। इसी अनुशासनहीनता पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केहर सिंह खाची को कारण बताओ नोटिस भेजकर अपना रुख साफ किया है।

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एक सप्ताह में मांगा गया स्पष्टीकरण

शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश कांग्रेस महासचिव विनोद जिंटा ने इस प्रशासनिक कदम की औपचारिक जानकारी दी। विनोद जिंटा ने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर अनुशासन सर्वोपरि है और पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करने वाले किसी भी सदस्य को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ विधायक कुलदीप सिंह राठौर के खिलाफ की गई टिप्पणी के संबंध में केहर सिंह खाची को एक सप्ताह का समय दिया गया है। खाची को सात दिनों के भीतर यह बताना होगा कि उन्होंने यह विवादित बयान किन परिस्थितियों में दिया था। यदि निश्चित समयावधि में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके अतिरिक्त एक अन्य कथित बयान से जुड़े सवाल पर जिंटा ने कहा कि फिलहाल यह विषय उनके ध्यान में नहीं है, लेकिन मामला सामने आने पर उसकी भी जांच की जाएगी।

आगामी 2027 चुनाव की तैयारियां और संगठनात्मक समीक्षा

प्रेस वार्ता में विनोद जिंटा ने बताया कि संगठन आगामी 2027 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अभी से पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसी चुनावी रणनीति के तहत शिमला में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के साथ जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों की एक अहम समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जमीनी स्तर पर चल रहे पार्टी अभियानों, ब्लॉक कमेटियों को दिए गए संगठनात्मक लक्ष्यों की प्रगति और आम जनता के बीच सरकार तथा पार्टी के प्रति बन रहे माहौल का बारीक मूल्यांकन किया गया।

विपक्ष के आरोपों पर पलटावार और विजिलेंस कार्रवाई पर सफाई

भारतीय जनता पार्टी द्वारा कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से एफआईआर दर्ज करने के आरोपों को विनोद जिंटा ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश का संचालन केवल कानून और आम सहमति के सिद्धांतों पर होता है। पुलिस अथवा विजिलेंस विभाग किसी भी निर्दोष नागरिक के खिलाफ बिना किसी ठोस आधार के मामला दर्ज नहीं करता है। एफआईआर और कानूनी कार्रवाई केवल तभी की जाती है जब कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता है, संपत्तियों में अनियमितता बरतता है या फिर कोई पुख्ता शिकायत प्राप्त होती है। सरकार पूरी निष्पक्षता से काम कर रही है जहां निर्दोषों के सम्मान की रक्षा हो रही है और गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी पर उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव विनोद जिंटा ने भाजपा पर केवल झूठा प्रचार करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि भाजपा के अपने कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन पार्टी उन पर पूरी तरह चुप्पी साधे बैठी है। उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों भाजपा नेतृत्व उन मामलों में मीडिया के सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करता है। जिंटा ने दोहराया कि कांग्रेस सरकार बिना किसी निजी स्वार्थ के प्रदेश की जनता की सेवा में जुटी है और हिमाचल प्रदेश के हितों तथा अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी निष्पक्षता से काम कर रही है।

सवाल-जवाब

केहर सिंह खाची को कांग्रेस ने क्यों नोटिस जारी किया है?
केहर सिंह खाची को ठियोग के विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के खिलाफ सार्वजनिक मंच से विवादित बयान देने के कारण कारण बताओ नोटिस दिया गया है।
केहर सिंह खाची ने अपने बयान में कुलदीप राठौर के बारे में क्या कहा था?
केहर सिंह खाची ने कहा था कि ठियोग में कुलदीप सिंह राठौर को 11 लोग भी ठीक से नहीं जानते हैं।
कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद केहर सिंह खाची की क्या प्रतिक्रिया थी?
नोटिस मिलने के बाद केहर सिंह खाची ने कहा कि वे कांग्रेस पार्टी के बब्बर शेर हैं और ऐसे राजनीतिक षड्यंत्रों से नहीं डरता।
केहर सिंह खाची को अपना स्पष्टीकरण देने के लिए कितना समय मिला है?
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस महासचिव विनोद जिंटा के अनुसार केहर सिंह खाची को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
कांग्रेस महासचिव विनोद जिंटा ने भाजपा के बदले की भावना वाले आरोपों पर क्या कहा?
विनोद जिंटा ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कानून और सहमति से प्रदेश चलता है, पुलिस या विजिलेंस बिना वजह एफआईआर दर्ज नहीं करती।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के भीतर यह अंतर्कलह केवल एक अनुशासनात्मक मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक और राजनीतिक अनुशासन के हनन की श्रेणी में आता है। एक सार्वजनिक मंच से वरिष्ठ नेता पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना और फिर कारण बताओ नोटिस मिलने पर आक्रामक तेवर अपनाना पार्टी के आंतरिक नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि एक सप्ताह के भीतर इस मामले का समाधान नहीं निकाला गया और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह गुटबाजी पार्टी के लिए एक बड़ा चुनावी संकट बन सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करन मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह स्पष्ट है कि प्रियंका गांधी के करीबी माने जाने वाले केहर सिंह खाची और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के बीच का यह विवाद सिर्फ एक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। ठियोग क्षेत्र में नेतृत्व की इस खींचतान से ज़मीनी स्तर पर संगठन कमज़ोर हो सकता है। यदि सात दिन की समयसीमा में खाची का जवाब संतोषजनक नहीं रहता और शीर्ष नेतृत्व ने त्वरित कार्रवाई नहीं की, तो यह अंतर्कलह ब्लॉक कमेटियों तक फैल जाएगी। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले इस प्रकार की गुटबाजी पार्टी के चुनावी समीकरणों को भारी नुक़सान पहुँचा सकती है।

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