चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने 22 अक्टूबर को कांग्रेस पार्टी की नीतियों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के हालिया बयानों से पार्टी की कथित जनविरोधी और सामंती सोच खुलकर सामने आ गई है। अमन अरोड़ा ने दावा किया कि अगर कांग्रेस गलती से भी 2027 के विधानसभा चुनावों में पंजाब की सत्ता में वापस आती है, तो वह आम जनता को मिल रही सुविधाओं को समाप्त कर देगी।
कल्याणकारी योजनाओं को बंद करने की चेतावनी
कैबिनेट मंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कांग्रेस केवल बिजली सब्सिडी और महिलाओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह अन्य कई जनहित योजनाओं को भी बंद कर देगी। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस के सत्ता में आने पर ₹10 लाख की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना को खत्म कर दिया जाएगा, बंद हो चुके टोल प्लाजा वापस लाए जाएंगे, खेतों तक पहुंचने वाले नहर के पानी पर भारी शुल्क थोपा जाएगा और बिजली की दरों में भारी बढ़ोतरी की जाएगी। अमन अरोड़ा के अनुसार, इससे पंजाब के आम परिवारों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और राज्य एक बार फिर पुरानी परेशानियों के दौर में लौट जाएगा।
कांग्रेस नेताओं पर सब्सिडी का लाभ उठाने का आरोप
अमन अरोड़ा ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी के बड़े नेता आम नागरिकों को कल्याणकारी योजनाओं के दायरे से बाहर करना चाहते हैं, जबकि उनके अपने सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री और उनके परिवार खुद सभी प्रकार की सब्सिडी का पूरा आनंद ले रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस यह मानती है कि जो लोग सक्षम हैं उन्हें सहायता नहीं मिलनी चाहिए, तो फिर कांग्रेस के नेता खुद स्वेच्छा से सरकारी सब्सिडी का लाभ लेना क्यों बंद नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार पिछले चार साल से लगातार मुफ्त बिजली दे रही है और महिलाओं को वित्तीय मदद भी दी जा रही है, लेकिन उन्होंने कभी किसी कांग्रेस नेता को इन सुविधाओं को सार्वजनिक रूप से छोड़ते हुए नहीं देखा है।
शीर्ष नेतृत्व से स्पष्ट जवाब की मांग
पार्टी की टॉप लीडरशिप पर निशाना साधते हुए अमन अरोड़ा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रताप सिंह बाजवा को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि इन बड़े नेताओं को बिना किसी देरी के यह साफ करना चाहिए कि यदि कांग्रेस की सरकार बनती है, तो क्या वे वर्तमान में चल रही सभी कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखेंगे या उन्हें बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता इन बयानों पर पूरी तरह से स्पष्ट जवाब चाहती है, क्योंकि चुनावी वादे हमेशा खोखले साबित होते रहे हैं और असली नीयत पार्टी के बयानों और नेताओं की सोच से झलकती है।
ऐतिहासिक उदाहरणों और पात्रता के मापदंडों पर सवाल
अमन अरोड़ा ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि कौन यह तय करेगा कि कौन सा परिवार इन योजनाओं के लिए योग्य है और इसके आधार क्या होंगे। उन्होंने पूछा कि क्या अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग या राहुल गांधी यह तय करेंगे कि किस घर को मुफ्त बिजली मिलनी चाहिए और किस महिला को वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2002 में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस ने किसानों के लिए मिलने वाली मुफ्त बिजली को बंद कर दिया था, जिसे बाद में भारी विरोध और आम चुनावों के दबाव के चलते ढाई साल बाद फिर से शुरू करना पड़ा था। उन्होंने याद दिलाया कि 2017 के चुनावों से पहले भी तमाम तरह के वादे किए गए थे, इसलिए जनता को केवल जुमलों पर नहीं बल्कि कांग्रेस के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा करना चाहिए।
पंजाबियों से सतर्क रहने की अपील
अपनी बात को समाप्त करते हुए अमन अरोड़ा ने पंजाब के तमाम नागरिकों से अपील की कि वे चुनाव के समय किए जाने वाले लोक-लुभावन वादों से बिल्कुल भी गुमराह न हों। उन्होंने कहा कि साल 2027 के चुनावों से पहले मतदाताओं को कांग्रेस नेताओं के बयानों को गंभीरता से लेना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि आज जो बुनियादी फायदे आम परिवारों को मिल रहे हैं, वे सुरक्षित रहेंगे या नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस को पंजाब की जनता से वोट मांगने से पहले अपनी नीतियों और इरादों पर पूरी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।



















