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राहुल गांधी पर शायना एनसी का तीखा हमला, आरएसएस के बारे में बयान पर गरमाई राजनीतिराजनीति
22 अक्तू॰ 2026, 4:43 pm (3 घंटे पहले)· 1

राहुल गांधी पर शायना एनसी का तीखा हमला, आरएसएस के बारे में बयान पर गरमाई राजनीति

शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा है और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यप्रणाली समझने की सलाह दी है।

मुंबई की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने हाल ही में सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को मिली जमानत को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि इस मामले में जमानत मिलना किसी भी तरह से कोई जीत नहीं है, बल्कि यह अदालत की तरफ से लगाई गई एक सख्त शर्त का हिस्सा है। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां विभिन्न मुद्दों पर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

अदालती जमानत और कानूनी शर्तें

सौरव दास और आशुतोष रांका की कानूनी स्थिति पर बात करते हुए शायना एनसी ने स्पष्ट किया कि कानून देश के हर नागरिक के लिए पूरी तरह बराबर है। अदालत ने इन दोनों को एक साल तक पूरी तरह शांति बनाए रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह दूसरी बार मौका है जब इन लोगों ने बॉन्ड से जुड़ी शर्तों का उल्लंघन किया है। उनके मुताबिक, इन्हें किसी भी रूप में आम प्रदर्शनकारी नहीं कहा जा सकता, बल्कि ये आदतन कानून तोड़ने वाले लोग हैं। जमानत मिलने की प्रक्रिया को समझाते हुए उन्होंने कहा कि इसमें 50,000 रुपए की राशि जमा करनी होती है और साथ ही शांति बनाए रखने का औपचारिक वादा करना पड़ता है। इसका सीधा अर्थ यह निकाला जा रहा है कि अदालत को भी इस बात का अंदेशा था कि ये लोग समाज में अशांति फैला सकते हैं, और यही इस पूरी स्थिति की वास्तविक सच्चाई है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा प्रहार

इस बयानबाजी के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी जोरदार निशाना साधा गया। शायना एनसी ने कहा कि राहुल गांधी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के बारे में बुनियादी जानकारी तक हासिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने संघ के इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि इसकी महिला शाखा, जिसका नाम ‘राष्ट्र सेविका समिति’ है, उसकी स्थापना साल 1936 में की गई थी। यह संगठन पिछले 87 लंबे वर्षों से लगातार सक्रिय रूप से काम कर रहा है। आज के समय में इन 87 सालों के सफर में इस संगठन से 10 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ चुकी हैं और देश भर में इसकी 4,000 शाखाएं सफलतापूक संचालित हो रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो राजनीतिक दल अपने 130 साल के इतिहास में कभी एक भी महिला अध्यक्ष नहीं चुन पाया, वह आखिर संघ के बारे में किस तरह की बातें कर रहा है और क्या बोल रहा है।

राजनीतिक सफर और चुनावी पलायन पर सवाल

आलोचना को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी महिलाएं पूरी निष्ठा के साथ अपने देश के साथ खड़ी हैं। दूसरी तरफ, उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी की अपनी पार्टी की महिलाएं उनके साथ हैं या नहीं, इस बारे में खुद उन्हें कोई स्पष्टता नहीं है और उन्हें पहले इस बात का पता लगाना चाहिए। उनके राजनीतिक सफर पर तंज कसते हुए कहा गया कि वे पहले अपना पारंपरिक गढ़ अमेठी छोड़कर वायनाड चले गए और बाद में वायनाड को भी छोड़कर रायबरेली का रुख किया। इस प्रकार के राजनीतिक फैसलों को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं कि नेतृत्व किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विपक्ष के आरोपों और नैरेटिव पर पलटवार

कांग्रेस पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों की तरफ से लगातार लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। शायना एनसी ने कहा कि ये वही तमाम लोग हैं जो खुद चुनावों में जनता का अपेक्षित समर्थन और वोट हासिल करने में नाकामयाब रहे हैं। महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी दल बिना किसी ठोस आधार के बस लगातार एक के बाद एक बेबुनियाद आरोप लगाते रहते हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से सीधा सवाल पूछते हुए कहा कि जब वे ‘इंडी’ गठबंधन की बैठक आयोजित करते हैं और उसके बाद चुनाव आयोग, केंद्रीय चुनाव समिति तथा देश के प्रधानमंत्री पर लगातार हमले बोलते हैं, तो इसके पीछे का वास्तविक उद्देश्य क्या होता है।

नकारात्मक माहौल और झूठे नैरेटिव पर चेतावनी

उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस तरह के हमलों का अर्थ केवल यह निकलता है कि विपक्ष के पास जनता के सामने रखने के लिए कोई भी सकारात्मक बात या भविष्य का कोई स्पष्ट ब्लूप्रिंट मौजूद नहीं है। विपक्षी दल जानबूझकर देश के आम लोगों के बीच ऐसा डरावना माहौल तैयार कर रहे हैं जिससे यह लगे कि भारत के हालात भी किसी दिन बांग्लादेश या नेपाल जैसे देशों की तरह हो जाएंगे। उन्होंने इन तमाम दावों को पूरी तरह से फर्जी करार दिया और अपील की कि इस प्रकार का झूठा और भ्रामक नैरेटिव जनता के बीच बिल्कुल नहीं फैलाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

सवाल-जवाब

सौरव दास और आशुतोष रांका को लेकर शायना एनसी ने क्या कहा?
शायना एनसी ने कहा कि इन दोनों को मिली जमानत कोई जीत नहीं है, बल्कि अदालत की शर्त है जिसके तहत उन्हें शांति बनाए रखनी होगी।
राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना कब हुई थी?
राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना वर्ष 1936 में हुई थी और यह पिछले 87 वर्षों से काम कर रही है।
शायना एनसी ने राहुल गांधी के किस कदम पर सवाल उठाया?
उन्होंने राहुल गांधी के अमेठी से वायनाड और फिर रायबरेली जाने के राजनीतिक निर्णयों पर सवाल उठाया।
विपक्षी दलों पर क्या आरोप लगाया गया है?
विपक्ष पर वोट चोरी का झूठा रोना रोने और देश में बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालात पैदा होने का गलत नैरेटिव फैलाने का आरोप लगाया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·54 मिनट पहले

अमेठी से वायनाड और फिर रायबरेली का सफर राजनीति में वैसे ही बहुत कुछ कहता है, बाकी महिलाओं और संघ पर बयानबाज़ी तो चुनावी माहौल गरमाने का पुराना तरीका है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·53 मिनट पहले

रोहन भाई, अमेठी और वायनाड वाली बात तो ठीक है, पर संघ और जमानत वाले मामले में शायना जी ने जो बार-बार शर्तें टूटने की बात कही है, उसपर पूरी तरह यकीन करना थोड़ा मुश्किल लगता है।

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