नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र से जुड़ी हलचल उस समय अचानक तेज हो गई जब देश के गृहमंत्री अमित शाह से गृह सचिव गोविंद मोहन और आईबी चीफ महेश दीक्षित ने एक उच्चस्तरीय बैठक की। यह अहम मंत्रणा लगभग 40 मिनट तक चली, जिसमें देश की मौजूदा आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक हालात पर गहन चर्चा होने के कयास लगाए जा रहे हैं। राजधानी दिल्ली में हुई इस बैठक को कई मायनों में बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय में हुई है जब देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में हुए प्रदर्शनों का दौर थम चुका है और जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है।
प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा हालात पर मंथन
देशभर में विरोध प्रदर्शनों के खत्म होने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर स्थिति की समीक्षा की जा रही है। हालांकि प्रदर्शनों के शांत होने के बाद भी सियासी बयानबाजी थमी नहीं है और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। खासकर विपक्षी दलों की तरफ से सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं और लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं। इन तमाम राजनीतिक बयानों, गंभीर आरोपों और सुरक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के बीच गृह मंत्रालय और खुफिया प्रमुख की यह लंबी बैठक बेहद खास मानी जा रही है।
संसद भवन परिसर में नेताओं की सक्रियता
गृहमंत्री अमित शाह ने केवल प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही मंत्रणा नहीं की, बल्कि संसद भवन परिसर में उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से भी मुलाकात की। राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को भी काफी तूल दिया जा रहा है क्योंकि जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह वे प्रमुख मंत्री हैं जिन्हें केंद्र सरकार की तरफ से कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सरकार और विभिन्न संगठनों के बीच चल रहे संवाद के इस दौर में इन मुलाकातों के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।



















