बिहार की सियासी जमीन पर लगातार बदल रहे समीकरणों के बीच नेताओं के बयान तीखे होते जा रहे हैं। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड से बाहर किए जाने का मामला अब गर्माता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली में दिए गए अपने बयान में उन्होंने राज्य की राजनीति में चल रहे घटनाक्रमों और सियासी फैसलों के तौर-तरीकों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है।
इस्तेमाल करो और फेंको की राजनीति
सांसद पप्पू यादव ने अनंत सिंह पर की गई कार्रवाई और नीलम देवी से जुड़े मामलों को पूरी तरह राजनीतिक अवसरवाद करार दिया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर इस्तेमाल करो और फेंको की राजनीति है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनंत सिंह को पार्टी के सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के बयान देने से बचना चाहिए था। नीतीश कुमार की अपनी एक साफ-सुथरी छवि है, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि जब सरकार को संकट का सामना करना पड़ा था, तब अनंत सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी।
अन्य नेताओं के बहाने सरकार पर निशाना
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पप्पू यादव ने प्रह्लाद यादव और आनंद मोहन जैसे चेहरों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को भी इसी तरह व्यवस्थित तरीके से दरकिनार कर दिया गया है। नीलम देवी के संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उनका कसूर क्या था। बिना किसी विशेष शैक्षणिक पृष्ठभूमि के केवल कुछ राजनीतिक समझौतों के तहत उन्हें राज्य में मंत्री पद सौंपा गया था, और अब उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की जा रही है। नीलम देवी को राज्य के उप मंत्री का दर्जा हासिल था और इसी वजह से उन्हें राजधानी के 1, मॉल रोड स्थित सरकारी आवास की सुविधा मिली हुई थी।
सियासी नफे-नुकसान के मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पप्पू यादव के इस बयान के गहरे निहितार्थ हैं। इसे भूमिहार मतदाताओं और क्षेत्रीय समीकरणों को अपने पक्ष में साधने की एक सोची-समझी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। मोकामा और उसके आसपास के क्षेत्रों में अनंत सिंह और नीलम देवी का प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। सत्ता पक्ष के फैसलों से असंतुष्ट चल रहे इन नेताओं के समर्थकों के बीच जाकर सहानुभूति बटोरना इस रणनीति का हिस्सा हो सकता है। आनंद मोहन, प्रह्लाद यादव और अनंत सिंह जैसे नामों को एक साथ लाकर वे यह संदेश देना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री जरूरत के वक्त लोगों का साथ लेते हैं और काम निकल जाने के बाद उन्हें किनारे कर देते हैं।
आगामी मुकाबलों से पहले आक्रामक रुख
बिहार में होने वाले आगामी राजनीतिक संघर्षों से पहले पप्पू यादव लगातार खुद को एक ऐसे स्वतंत्र और आक्रामक नेता के रूप में स्थापित कर रहे हैं जो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की नीतियों पर खुलकर सवाल उठा सकता है। अनंत सिंह के निष्कासन और नीलम देवी पर हुई कार्रवाई के बाद उनके इस तीखे तंज ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड और पूरा एनडीए गठबंधन इन तीखे हमलों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।






















