पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की मंजूरी फिलहाल नहीं मिल पाई है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार को उनकी वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने आंखों की बीमारी के इलाज के लिए दूसरे देश जाने की इजाजत मांगी थी। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान शुरुआत में ही यह सुझाव दिया था कि पहले SSKM अस्पताल का मेडिकल बोर्ड बनर्जी की आंखों की स्थिति की जांच करे, ताकि यह पता चल सके कि उनका इलाज भारत में ही मुमकिन है या नहीं।
आंखों की जांच से इनकार करना पड़ा भारी
अदालत ने साफ कहा कि बनर्जी के इलाज का विकल्प तय करते वक्त इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामलों की जांच अभी चल रही है। कोर्ट का रुख यह था कि जब तक भारत में उनकी आंखों की स्थिति की जांच नहीं हो जाती और यह तय नहीं हो जाता कि विदेश यात्रा वाकई जरूरी है, तब तक उन्हें बाहर जाने की इजाजत देना ठीक नहीं होगा। लेकिन बनर्जी इस तरह की जांच भारत में कराने के लिए राजी नहीं हुए। इसी वजह से अदालत ने उनकी याचिका को आगे लंबित रखने से इनकार करते हुए सीधे खारिज कर दिया। कोर्ट ने आदेश में कहा कि जब आवेदक के वकील ने ही निर्देशों के आधार पर यह साफ कर दिया कि उनके मुवक्किल अदालत के निर्देश पर मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं होंगे, तो इस याचिका से जुड़े मुद्दे को और लटकाए रखने का कोई मतलब नहीं बनता। इसी आधार पर मौजूदा आवेदन को खारिज करने का आदेश दिया गया।
बागी विधायक संदीपन साहा का तीखा सवाल
इस पूरे मामले पर टीएमसी के बागी विधायक संदीपन साहा ने भी तंज कसा है। साहा का कहना है कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि आखिर अभिषेक बनर्जी SSKM अस्पताल जाकर जांच कराने से क्यों बच रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बनर्जी पहले हर साल तीन से चार बार विदेश जाया करते थे, लेकिन यह किसी को नहीं पता कि वे वहां जाकर आखिर करते क्या थे। साहा के मुताबिक, इसके पीछे का राज जल्द ही सामने आ जाएगा और इलाज के नाम पर की गई इन विदेश यात्राओं की जांच जल्द होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी के पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट है तो वह कहीं भी आ-जा सकता है, लेकिन उसके पीछे उसकी असली मंशा क्या थी, यह सामने आना ही चाहिए।
चार मई से शुरू हुआ था मामलों का सिलसिला
दरअसल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद जब राज्य में नई सरकार बनी, तो चार मई को अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कई प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की गई थीं। इन्हीं मामलों के बीच बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति मांगते हुए अदालत का रुख किया था। अन्य आरोपों के अलावा, चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने को लेकर भी उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है। बनर्जी ने इन सभी मामलों को रद्द कराने के लिए अलग-अलग याचिकाएं दायर की हुई हैं और कई मामलों में उन्हें फिलहाल अंतरिम राहत भी मिली हुई है।



















