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अयोध्या की धरती से योगी आदित्यनाथ ने दिया एकजुटता का संदेश, विपक्षी राजनीति और इतिहास के पन्नों पर उठाए तीखे सवालराजनीति
14 अग॰ 2026, 7:56 pm (29 दिन पहले)· 2

अयोध्या की धरती से योगी आदित्यनाथ ने दिया एकजुटता का संदेश, विपक्षी राजनीति और इतिहास के पन्नों पर उठाए तीखे सवाल

अयोध्या में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय एकता को सर्वोपरि बताया। उन्होंने संभल और 14 अगस्त 1947 के विभाजन का संदर्भ देते हुए विपक्ष की नीतियों की आलोचना की और विकास की उपलब्धियों को रेखांकित किया।

अयोध्या में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की सामाजिक एकजुटता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास अतीत में शक्ति, ज्ञान और समृद्धि की कभी कमी नहीं रही, परंतु केवल एकता के अभाव के कारण देश को शताब्दियों तक गुलामी का दंश झेलना पड़ा। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने इतिहास की घटनाओं का उल्लेख करते हुए वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर भी चर्चा की और जनता से विभाजनकारी तत्वों को पहचानने तथा उनसे सतर्क रहने का आह्वान किया।

1526 से 1528 का ऐतिहासिक संदर्भ और एकता का महत्व

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16वीं शताब्दी का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1526 में संभल के श्री हरिहर मंदिर को क्षतिग्रस्त करके गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि उस समय समाज एकजुट होता, तो केवल दो वर्ष बाद 1528 में अयोध्या में प्रभु श्री राम की जन्मभूमि पर मंदिर को नुकसान पहुंचाने का दुस्साहस कोई नहीं कर पाता। सनातन धर्मावलंबियों के पास बल और वैभव की कोई कमी नहीं थी, लेकिन एक स्वर और एक दिशा में साथ चलने की कमी ने देश को भारी नुकसान पहुंचाया। इसी संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में रेखांकित किया कि समाज में जब भी विभाजन हुआ, तभी देश को नुकसान उठाना पड़ा है।

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14 अगस्त 1947 का विभाजन और वर्तमान चुप्पी पर सवाल

विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने 14 अगस्त 1947 की तारीख का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आजादी से ठीक एक दिन पहले केवल हिंदू और सिख समुदाय के लोग ही विस्थापित या पीड़ित नहीं हुए थे, बल्कि संपूर्ण भारत भूमि का विभाजन हुआ था। उस समय की सत्ता लिप्सा के कारण देश का बंटवारा हुआ और किसी ने भी इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। वर्तमान स्थिति से इसकी तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में जब निर्दोष हिंदुओं पर अत्याचार होता है, तब भारत के वे राजनीतिज्ञ पूरी तरह मौन साध लेते हैं जो देश के भीतर छोटी-छोटी घटनाओं पर हंगामा करते हैं। पड़ोसी देशों में पीड़ित होने वाले अधिकतर लोग दलित समुदाय से आते हैं, परंतु मानवाधिकारों की बात करने वाले नेताओं के मुंह से उनके समर्थन में एक शब्द भी नहीं निकलता।

संभल और अयोध्या की बदलती तस्वीर और विकास

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार और बदलती व्यवस्था की बात भी की। उन्होंने कहा कि अतीत में आपसी और जातीय झगड़ों के कारण कई पवित्र धार्मिक स्थलों के स्वरूप को बदल दिया गया था। परंतु आज संभल में शांति और सौहार्द का माहौल है और वहां की पुरानी स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। इसी प्रकार अयोध्या की पुरानी स्थिति का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय था जब यह नगरी उपेक्षा, संकरी गलियों और गंदगी का केंद्र बन चुकी थी। बिजली की भारी किल्लत थी और सरयू नदी के घाटों पर जल सड़ता रहता था, जिससे श्रद्धालुओं को डुबकी लगाने में भारी कठिनाई होती थी। वर्तमान स्वरूप का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज की भव्य और स्वच्छ अयोध्या त्रेता युग की अनुभूति कराती है और अपनी प्राचीन गरिमा को पुनः प्राप्त कर चुकी है।

विपक्षी विचारधारा पर हमला और छद्म वेशधारियों से सावधान रहने की चेतावनी

रामायण के प्रसंग का संदर्भ लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को कालनेमी रूपी छद्म वेशधारियों से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आज स्वयं को राम भक्त बताकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे तत्वों की मंशा राम भक्तों की आंखों में धूल झोंकने की है, इसलिए समाज को अत्यंत सतर्क रहना होगा। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी के एक पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेता ने कभी सत्ता में आने पर कंस की प्रतिमा लगाने की बात कही थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसकी सोच ही कंस जैसी हो, उससे सनातन संस्कृति के कल्याण की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि श्री वृंदावन बिहारी की कृपा से जनता ने ऐसी विचारधारा को स्थायी रूप से दरकिनार कर दिया है।

सवाल-जवाब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में अपने भाषण में क्या मुख्य संदेश दिया?
उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता ही देश की सबसे बड़ी ताकत है और अतीत में भारत की मुख्य कमजोरी केवल एकजुटता का अभाव रही है।
भाषण के दौरान संभल और 1526 की घटना का क्या उल्लेख किया गया?
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1526 में संभल के श्री हरिहर मंदिर को क्षतिग्रस्त किया गया था और यदि समाज उस समय एकजुट होता तो 1528 में अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता था।
14 अगस्त 1947 के दिन को लेकर क्या विचार व्यक्त किए गए?
उन्होंने 14 अगस्त 1947 के विभाजन को देश की एक बड़ी त्रासदी बताया और उस समय की राजनीतिक जिम्मेदारी तथा जवाबदेही पर सवाल उठाए।
विपक्षी राजनीतिक दलों पर क्या आरोप लगाए गए?
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि देश के भीतर छोटी घटनाओं पर विरोध जताने वाले विपक्षी नेता पड़ोसी देशों में प्रताड़ित हो रहे अल्पसंख्यकों और दलितों के पक्ष में चुप्पी साध लेते हैं।
अयोध्या के कायाकल्प के संबंध में क्या जानकारी दी गई?
उन्होंने बताया कि पहले उपेक्षा और गंदगी से जूझने वाली अयोध्या आज स्वच्छ, भव्य और त्रेता युग जैसी अनुभूति कराने वाली धार्मिक नगरी बन चुकी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·28 दिन पहले

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या से दिया गया यह बयान केवल वैचारिक या ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने पर गहरा प्रभाव डालता है। ऐतिहासिक विभाजन और वर्तमान राजनीतिक प्राथमिकताओं पर उनके तीखे सवाल इस बात को रेखांकित करते हैं कि कैसे आंतरिक स्थिरता और सामाजिक एकजुटता दीर्घकालिक निवेश, कॉर्पोरेट विश्वास और सतत आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य आधार हैं। जब तक राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर स्थिरता और सामंजस्य मजबूत नहीं होगा, तब तक राष्ट्रीय बाजार की वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता और आंतरिक विकास की गति प्रभावित होती रहेगी।

Ananya Iyer@ananya-iyer·28 दिन पहले

यह वैचारिक और राजनीतिक बयानबाज़ी सीधे तौर पर उस बड़े राष्ट्रीय जनमानस को प्रभावित करती है जो आज सिनेमाघरों के पर्दे और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इतिहास आधारित कंटेंट और राष्ट्रवाद की कहानियों को तलाश रहा है। जब राजनेता सांस्कृतिक पुनरुत्थान और ऐतिहासिक भूलों के आख्यान को इस प्रकार जनसभाओं के केंद्र में रखते हैं, तो वह पॉप कल्चर और मीडिया की सुर्खियों में भी मुख्यधारा का नैरेटिव बन जाता है। इस प्रकार की बयानबाजी मनोरंजन और मीडिया उद्योग के लिए एक ऐसा संवेदनशील विषय बन जाती है जो बॉक्स ऑफिस के रुझानों और स्ट्रीमिंग ट्रेंड्स को भी परोक्ष रूप से दिशा देने का काम करता है।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

मुख्यमंत्री का यह भाषण आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र हिंदुत्व और राष्ट्रवादी एजेंडे को धार देने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। संभल और 14 अगस्त के विभाजन जैसे मुद्दों को जोड़कर वे ध्रुवीकरण के पारंपरिक राजनीतिक समीकरण को मजबूत कर रहे हैं, जिसका सीधा असर राज्य के क्षेत्रीय राजनीतिक संतुलन और आगामी चुनावी चर्चाओं पर पड़ना तय है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस तरह के तीखे ऐतिहासिक और वैचारिक संदर्भों का ज़मीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है। आपराधिक मामलों, सांप्रदायिक संवेदनशीलता और संवेदनशील इलाकों (जैसे संभल और अयोध्या) में सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे बयानों के बाद खुफिया तंत्र को और अधिक सतर्क करना अनिवार्य हो जाता है, ताकि किसी भी संभावित सामाजिक तनाव या विरोध प्रदर्शन को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

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