भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली इन दिनों वैश्विक कूटनीति का एक बड़ा केंद्र बनी हुई है, जहाँ पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का भव्य आयोजन हो रहा है, जिसमें दुनिया के कई सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली देशों के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। इस महाजुटान के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने कूटनीतिक हलकों में सभी को हैरान कर दिया है। भारत में नियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर शुक्रवार को अचानक दिल्ली की इस भारी राजनीतिक हलचल से दूर मणिपुर की राजधानी इंफाल पहुंच गए। एक तरफ जहाँ देश की राजधानी में वैश्विक स्तर के बड़े निर्णय लिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राजदूत का दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर पूर्वोत्तर भारत के इस संवेदनशील राज्य का दौरा करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे के समय और इसके पीछे छिपे भू-राजनीतिक निहितार्थों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और दिल्ली में वैश्विक नेताओं का जमावड़ा
नई दिल्ली में आयोजित इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विश्व राजनीति के कई बड़े चेहरे एक साथ मंच साझा कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा सहित लगभग 11 प्रमुख देशों के राष्ट्रप्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली द्विपक्षीय मुलाकात पर भी पूरी दुनिया की नजरें बनी हुई हैं। ब्रिक्स देशों के इस मंच पर मुख्य रूप से वैश्विक व्यापार, अमेरिकी डॉलर के विकल्पों की खोज और पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रभुत्व के खिलाफ विकासशील देशों को एकजुट करने जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। ऐसे माहौल में जब वैश्विक व्यवस्था को नया आकार देने की कोशिशें चल रही हैं, दिल्ली का राजनीतिक तापमान काफी बढ़ा हुआ है।
मणिपुर की लोकतक झील में अमेरिकी राजदूत की बोट राइड
इस भारी कूटनीतिक गहमागहमी के बीच, अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर दिल्ली के शोर-शराबे से दूर पूर्वोत्तर के शांत वातावरण में अपना समय बिता रहे हैं। शुक्रवार को मणिपुर पहुंचने के बाद शनिवार यानी 12 सितंबर 2026 को वह पूरी तरह से सक्रिय मोड में नजर आए। उन्होंने मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध लोकतक झील का दौरा किया। इस दौरान सर्गियो गोर ने झील के शांत पानी में बोट राइड यानी नाव की सवारी का आनंद लिया। उन्होंने वहाँ की स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और प्राकृतिक सुंदरता की खुलकर सराहना की। आपको बता दें कि लोकतक झील अपनी विशिष्ट फुमडी संरचनाओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और यह दुनिया का एकमात्र ऐसा राष्ट्रीय उद्यान है जो पानी पर तैरता है। उनकी इस यात्रा से जुड़े वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें वह स्थानीय लोगों के साथ घुलते-मिलते और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते दिख रहे हैं।
दिल्ली से दूरी बनाए रखने की सोची-समझी कूटनीति
राजनीतिक विश्लेषकों और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सर्गियो गोर का यह मणिपुर दौरा भले ही पहले से तय और बेहद शांत दिखाई दे रहा हो, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी रणनीतिक सोच काम कर रही है। जब नई दिल्ली में अमेरिका के दो सबसे बड़े रणनीतिक और आर्थिक प्रतिद्वंद्वी रूस और चीन, भारतीय नेतृत्व के साथ मंच साझा कर रहे हैं, तब अमेरिकी राजदूत का राजधानी से इतनी दूर होना एक सोची-समझी योजना का हिस्सा है। दरअसल, वाशिंगटन यह नहीं चाहता कि वह भारत में आयोजित होने वाले इस बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान किसी भी तरह की अनावश्यक चर्चा या विवाद का केंद्र बने। ब्रिक्स की इस बैठक का एक बड़ा एजेंडा पश्चिमी देशों और विशेष रूप से अमेरिका के वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती देना है। ऐसे में अमेरिकी राजनयिकों का दिल्ली की सुर्खियों से दूर रहना कूटनीतिक प्रोटोकॉल के तहत अपनी प्रोफाइल को लो रखने की कोशिश है।
भारत की विदेश नीति के प्रति सम्मान का संकेत
इस कूटनीतिक दूरी के जरिए अमेरिका यह संदेश भी देना चाहता है कि वह भारत की गुटनिरपेक्ष और मल्टी-अलाइनमेंट यानी बहु-पक्षीय संरेखण नीति को अच्छी तरह समझता है और उसका सम्मान करता है। रूस और चीन के राष्ट्रपतियों की मौजूदगी के दौरान दिल्ली में किसी भी समानांतर अमेरिकी कार्यक्रम या बड़ी प्रतिक्रिया से बचना दोनों देशों के आपसी संबंधों के लिए एक सहज और गरिमापूर्ण स्थिति पैदा करता है। इससे भारत पर भी कोई अतिरिक्त राजनयिक दबाव नहीं बनता और वह अपने मेहमानों की मेजबानी आसानी से कर पाता है। यह कदम दिखाता है कि अमेरिका भारत की संप्रभु विदेश नीति और वैश्विक मंचों पर उसके स्वतंत्र निर्णयों के प्रति संवेदनशील है।
पूर्वोत्तर और मणिपुर पर अमेरिका की गहरी नजर
सर्गियो गोर की इस यात्रा को केवल एक सामान्य पर्यटन या अवकाश के रूप में देखना भूल होगी। इसके पीछे गहरे भू-राजनीतिक यानी जियोपॉलिटिकल संकेत छिपे हुए हैं। पूर्वोत्तर भारत, विशेष रूप से मणिपुर राज्य, भारत सरकार की ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी का सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार माना जाता है। म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया की सीमाओं के बेहद करीब होने के कारण यह पूरा क्षेत्र हिंद-प्रशांत यानी इंडो-पैसिफिक रणनीति में अमेरिका के लिए भी अत्यधिक रणनीतिक महत्व रखता है। मणिपुर पिछले कुछ समय से आंतरिक तनाव और अशांति के दौर से गुजरा है। ऐसे संवेदनशील समय में अमेरिकी राजदूत का व्यक्तिगत रूप से वहां जाना यह स्पष्ट संदेश देता है कि वाशिंगटन पूरे भारत के साथ-साथ विशेष रूप से उन क्षेत्रों से सीधे संबंध बनाए रखने में गहरी रुचि रखता है जिनकी सीमाएं रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। लोकतक झील में बोट राइड और स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित करके अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सॉफ्ट पावर यानी सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव को मजबूत करना चाहता है। यह दिखाता है कि 21वीं सदी की कूटनीति केवल बंद कमरों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर सीधे संपर्क स्थापित करना भी इसका एक बड़ा हिस्सा बन चुका है।



















