लखनऊ की राजनीति में अगले विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां अभी से तेज हो चली हैं। सत्ताधारी दल और विपक्षी खेमे के बीच जुबानी जंग तीखी होती जा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार किया है। राजधानी के सबसे चर्चित ड्रीम प्रोजेक्ट जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर यानी जेपीएनआईसी को लेकर मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के कई गंभीर बिंदु जनता के सामने रखे और विपक्ष को कठघरे में खड़ा कर दिया।
लोकनायक के नाम पर जनता के धन की लूट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानी और लोकतंत्र के बड़े नायक लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम का इस्तेमाल कर विपक्षी शासनकाल में सरकारी खजाने को दोनों हाथों से लूटा गया। उन्होंने विवरण देते हुए बताया कि इस प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट की शुरुआती अनुमानित लागत केवल 200 करोड़ रुपए तय की गई थी। लेकिन समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान इस पर पानी की तरह पैसा बहाया गया और खर्च बढ़कर सीधे 864 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इसके बावजूद यह बड़ी इमारत आज तक अधूरी और वीरान पड़ी हुई है।
सैफई सिंडिकेट और निजी हाथों में सौंपने की साजिश
मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले में एक बड़े षड्यंत्र का पर्दाफाश करते हुए आरोप लगाया कि जनता के टैक्स के पैसों से तैयार होने वाली इस संपत्ति को एक निजी कमेटी के हवाले करने की पूरी पटकथा लिखी जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि इस उद्देश्य के लिए अखिलेश यादव, डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव जैसे बड़े नेताओं को शामिल करके एक समिति का गठन किया गया था। इस इंटरनेशनल सेंटर के भीतर होटल, जिम और क्लब जैसी आधुनिक सुविधाएं प्रस्तावित थीं, जिन्हें सुनियोजित तरीके से एक खास परिवार और निजी हाथों की मिल्कियत बनाने की तैयारी थी।
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि यह राशि किसी तथाकथित परिवार या संगठन की जागीर नहीं थी, बल्कि उत्तर प्रदेश की मेहनतकश जनता के खून-पसीने की कमाई और टैक्स का पैसा था। जो धन राज्य के युवाओं को रोजगार दिलाने, बेहतर शिक्षा देने, स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने और बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च होना चाहिए था, उसे एक अधूरी और सफेद हाथी बन चुकी इमारत पर बर्बाद कर दिया गया।
जांच का दायरा और जीरो टॉलरेंस की नीति
वर्ष 2017 में प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के सत्ता में आने के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं पर तुरंत रोक लगाई गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मामले की विस्तृत जांच लखनऊ विकास प्राधिकरण को सौंप दी गई है और सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता के पाई-पाई का हिसाब वसूला जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को दोहराते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशासन भ्रष्टाचार और वित्तीय कदाचार के मामले में पूरी तरह कठोर रुख अपनाए हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब से सरकारी तिजोरी से अवैध निकासी का रास्ता बंद हुआ है, तब से विपक्षी दल के नेता बौखला गए हैं और आए दिन निराधार बयानबाजी कर रहे हैं।
आगामी चुनावों का मुख्य एजेंडा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का यह आक्रामक तेवर विपक्ष की रणनीतियों की धार को कुंद करने का एक बड़ा प्रयास है। जेपीएनआईसी प्रोजेक्ट के बहाنے सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाकर सत्ता पक्ष ने यह संकेत दे दिया है कि आगामी चुनावी रण में विकास बनाम भ्रष्टाचार ही सबसे बड़ा राजनीतिक एजेंडा रहने वाला है।



















