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बिहार की राजनीति में नया भूचाल, क्या जेडीयू से अलग होने की राह पर हैं बाहुबली विधायक अनंत सिंहराजनीति
24 अक्तू॰ 2026, 8:38 am (3 दिन पहले)· 3

बिहार की राजनीति में नया भूचाल, क्या जेडीयू से अलग होने की राह पर हैं बाहुबली विधायक अनंत सिंह

बिहार विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर जेडीयू में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। मोकामा से विधायक अनंत सिंह ने पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विरोधी खेमे का समर्थन किया है, जिससे पार्टी के भीतर बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

बिहार की सियासत में एक बार फिर गर्माहट आ गई है और इस बार पूरा मामला जेडीयू के भीतर मचे घमासान से जुड़ा है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव के दौरान मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ बगावती तेवर अपना लिए। उन्होंने पार्टी लाइन से इतर जाकर जन सुराज समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह का खुला समर्थन किया, जिससे राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। इस विवाद को शांत करने के लिए पार्टी और गठबंधन के कई बड़े नेताओं ने प्रयास किए, लेकिन आपसी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है।

विवाद की जड़ और पुरानी नाराजगी

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि काफी पुरानी है और इसके तार पिछले विधानसभा चुनावों से जुड़े हुए हैं। अनंत सिंह का मुख्य आरोप यह है कि मोकामा विधानसभा चुनाव के दौरान जब वह जदयू का समर्थन कर रहे थे, तब नीरज कुमार ने उनके खिलाफ खुलकर प्रचार किया था। उस समय अनंत सिंह ने इस बात की शिकायत पार्टी के उच्च स्तर पर दर्ज कराई थी, लेकिन तब कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी। अब जब पार्टी ने उन्हीं नीरज कुमार को पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतार दिया, तो अनंत सिंह ने अपनी पुरानी नाराजगी जाहिर करते हुए जवाबी कदम उठाया। बीते एक अक्टूबर को वह सीधे तौर पर जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के नामांकन कार्यक्रम में जा पहुंचे और सार्वजनिक रूप से यह ऐलान कर दिया कि वह नीरज कुमार के बजाय अनुज सिंह को जिताने का काम करेंगे।

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डैमेज कंट्रोल की कोशिशें और ललन सिंह की एंट्री

जब यह मामला तूल पकड़ने लगा, तब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने स्थिति को संभालने के लिए मोर्चा संभाला। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए आगे आए और उन्होंने अनंत सिंह से बंद कमरे में लंबी बातचीत की। इस मुलाकात के बाद खुद ललन सिंह ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि अतीत में पार्टी स्तर पर कुछ चूक हुई थी और समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए थी। उस समय दोनों नेताओं के बीच एक अस्थाई समझौता हुआ, जिसके तहत यह तय हुआ कि अनंत सिंह नीरज कुमार के खिलाफ कोई सीधा जुबानी हमला नहीं करेंगे, हालांकि वह चुनाव में प्रचार भी नहीं करेंगे और अनुज सिंह का समर्थन जारी रखेंगे। यानी यह समझौता दिलों के मिलने का नहीं, बल्कि केवल बयानों को रोकने की एक कोशिश भर था।

समझौते का टूटना और तीखे बयानों का दौर

ललन सिंह की मध्यस्थता के बाद भी यह समझौता ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सका और अनंत सिंह का रुख फिर से आक्रामक हो गया। इस बीच, बीते 9 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की विशेष पहल पर एनडीए के सभी विधायकों की एक संयुक्त बैठक बुलाई गई, जिसमें गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की गई। इसके बावजूद अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन से पीछे हटने से इनकार कर दिया। इसके बाद 18 अक्टूबर को उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से खुली चुनौती देते हुए यह तक कह दिया कि उनके विरोधी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाएंगे। इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदान के दिन दो बड़े सियासी वाकये सामने आए। पहला यह कि मोकामा प्रखंड कार्यालय के बाहर नीरज कुमार और अनंत सिंह के समर्थकों के बीच मतदान रोकने को लेकर तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हो गई, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप कर 6 लोगों को हिरासत में लेना पड़ा। दूसरा अहम वाकया तब हुआ जब मीडियाकर्मियों ने ललन सिंह के रुख को लेकर सवाल पूछा, तो अनंत सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार में एक जैसे नाम के सौ लोग हैं और वह दिल्ली वाले ललन सिंह को नहीं जानते हैं। इस बयान से साफ हो गया कि पार्टी स्तर पर डैमेज कंट्रोल का पूरा मिशन पूरी तरह विफल हो चुका है।

नए पावर सेंटर और संजय झा तथा निशांत कुमार पर निशाना

इस पूरे सियासी ड्रामे में जेडीयू के अन्य बड़े नेताओं की भूमिका पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह और उनके समर्थकों का यह स्पष्ट मानना है कि नीरज कुमार को टिकट दिलाने के पीछे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की प्रमुख भूमिका रही है, जिसके चलते उनका गुस्सा संजय झा पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र और बिहार सरकार के मंत्री निशांत कुमार भी खुलकर नीरज कुमार के पक्ष में वोट मांगते नजर आए। जब इस बारे में अनंत सिंह से पत्रकारों ने सवाल पूछा, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह पार्टी के सर्वेसर्वा हैं और कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र हैं। इस तरह यह लड़ाई अब केवल दो स्थानीय नेताओं के बीच की व्यक्तिगत अदावत नहीं रह गई है, बल्कि जेडीयू के भीतर उभर रहे नए सत्ता केंद्रों और नेतृत्व समीकरणों तक जा पहुंची है।

नतीजों का इंतजार और भविष्य की राजनीतिक चालें

विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान 23 अक्टूबर को संपन्न हो चुका है और अब सभी की निगाहें 27 अक्टूबर को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हुई हैं। इस बीच, अनंत सिंह खुद खुले तौर पर यह बयान दे रहे हैं कि वह चाहते हैं कि पार्टी उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करे। उन्होंने कई मौकों पर स्पष्ट लहजे में कहा है कि उन्हें अब किसी भी बात का डर नहीं है और वह हर परिस्थिति के लिए तैयार हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति में जेडीयू के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। यदि चुनाव परिणामों में नीरज कुमार की हार होती है और अनुज सिंह की जीत में अनंत सिंह की निर्णायक भूमिका साबित होती है, तो पार्टी को अनुशासन बनाए रखने के लिए नोटिस जारी करना ही होगा। वहीं, अगर नीरज कुमार जीत भी जाते हैं, तब भी एक विधायक द्वारा खुलेआम पार्टी लाइन तोड़ने के कारण नेतृत्व पर कार्रवाई का भारी दबाव बना रहेगा।

क्या जन सुराज की ओर बढ़ रहे हैं अनंत सिंह?

इस पूरी राजनीतिक उठापटक के बीच दूसरा बड़ा सवाल जन सुराज पार्टी और उसके संस्थापक प्रशांत किशोर की भूमिका को लेकर है। प्रशांत किशोर लगातार अनंत सिंह को अपने मंच पर जगह दे रहे हैं, और अनंत सिंह भी जन सुराज के मंच से अनुज सिंह के समर्थन में नारे लगवा चुके हैं। यदि जेडीयू उन पर कोई सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करती है, तो अनंत सिंह के लिए जन सुराज के रूप में एक मजबूत और तैयार विकल्प पहले से मौजूद है। हालांकि आधिकारिक तौर पर वह अभी भी खुद को जेडीयू का हिस्सा बता रहे हैं, लेकिन उनके बयानों के तीखे तेवर से यह आभास होता है कि उन्होंने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। दूसरी तरफ, जेडीयू के लिए भी यह फैसला लेना आसान नहीं होगा क्योंकि अनंत सिंह मोकामा क्षेत्र के एक बेहद प्रभावशाली विधायक हैं और उनका अपना एक मजबूत राजनीतिक जनाधार है। यदि पार्टी उन्हें निष्कासित करती है, तो इसका असर मोकामा और आसपास के कई इलाकों के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है, जबकि कोई कार्रवाई न करने पर पार्टी के अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

सवाल-जवाब

अनंत सिंह ने किस चुनाव में बगावत की है?
अनंत सिंह ने बिहार विधान परिषद के पटना स्नातक सीट के चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ बगावत की है।
जेडीयू ने पटना स्नातक सीट से किसे अपना उम्मीदवार बनाया है?
जेडीयू ने इस सीट से नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है।
अनंत सिंह ने किस उम्मीदवार का समर्थन किया है?
अनंत सिंह ने जन सुराज समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया है।
विवाद को सुलझाने के लिए पार्टी की ओर से किसने प्रयास किया था?
पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने अनंत सिंह से मिलकर इस विवाद को सुलझाने का प्रयास किया था।
इस चुनाव के परिणाम कब आने वाले हैं?
इस चुनाव के परिणाम 27 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·2 दिन पहले

अनंत सिंह जैसे बाहुबलि नेता के बगावती तेवर से क्या सच में जेडीयू को इस चुनाव में कोई बड़ा नुकसान होगा, या फिर पार्टी अंदरखाने इसे संभाल लेगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

मोकामा वाले अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के खिलाफ खुलकर खड़े हो गए हैं और ललन सिंह की मध्यस्थता भी काम नहीं आई। अब देखना होगा कि पार्टी इन पर क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई करती है।

Sophie Laurent@sophie-laurent·2 दिन पहले

करण जी, बिल्कुल सही कहा आपने। मुझे खुद कुछ साल पहले बाल्कन की एक पार्टी कवर करते वक्त ऐसा ही बगावत का माहौल देखने को मिला था।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

ललन सिंह के समझाने के बाद भी अनंत सिंह नहीं माने, इस बात पर पूरा यकीन करना थोड़ा मुश्किल है। लगता है पर्दे के पीछे कुछ और ही खेल चल रहा है जो इस रिपोर्ट में साफ नहीं हुआ।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

रोहन भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर्दे के पीछे आखिर ऐसा क्या खेल चल रहा है जो ललन सिंह भी इसे संभाल नहीं पाए?

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