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बिहार विधानसभा सत्र: सूखे पर घमासान के बीच सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा दांव, किसानों को 12 घंटे सिंचाई का भरोसाराजनीति
22 जुल॰ 2026, 12:09 pm (28 दिन पहले)· 0

बिहार विधानसभा सत्र: सूखे पर घमासान के बीच सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा दांव, किसानों को 12 घंटे सिंचाई का भरोसा

बिहार विधानसभा में सूखे को लेकर विपक्ष के जोरदार हंगामे के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किसानों के लिए सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक निर्बाध बिजली की घोषणा की है। इसके अलावा, नए सैटेलाइट टाउनशिप, ऑनलाइन जुए पर प्रतिबंध और ग्रामीण सड़कों के निर्माण में स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता देने जैसे अहम फैसले भी लिए गए हैं।

बिहार विधानसभा के वर्तमान मानसून सत्र के दौरान राज्य में कम बारिश और संभावित सूखे की भयानक स्थिति को लेकर जोरदार राजनीतिक घमासान देखने को मिला। जैसे ही सदन की कार्यवाही आधिकारिक रूप से शुरू हुई, विपक्षी खेमे के नेताओं ने बेहद आक्रामक रुख अपना लिया और वे अपनी सीटों से उठकर सीधे सदन के वेल में जा पहुंचे। विपक्ष के विधायकों ने सूखे के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए जमकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह से गरमा गया। प्रश्नकाल के समय भी यह भारी गतिरोध लगातार जारी रहा और हंगामे के कारण विधायी कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ गया। हालात इतने बेकाबू हो गए थे कि किसी भी पक्ष की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं दे रही थी। हालांकि, स्थिति तब नियंत्रण में आई जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद सदन में पहुंचे और उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर सीधा हस्तक्षेप किया।

किसानों को सिंचाई के लिए मिलेगी निर्बाध बिजली

सूखे की भारी आशंका पर विपक्ष की चिंताओं का सीधा जवाब देते हुए, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन को पूरी तरह से आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस प्राकृतिक संकट पर बहुत ही पैनी नजर बनाए हुए है। उन्होंने जमीनी हकीकत को स्वीकार करते हुए सदन में कहा, "कम बारिश की वजह से किसानों को परेशानी हो रही है।" ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के काम में आ रही इन बड़ी दिक्कतों को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बेहद अहम और बड़ी घोषणा की। राज्य सरकार ने यह फैसला किया है कि अब सभी किसानों को अपने खेतों की सिंचाई करने के लिए सुबह छह बजे से लेकर शाम छह बजे तक लगातार बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही सूबे के सभी जिलाधिकारियों को यह सख्त प्रशासनिक निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों की हर छोटी-बड़ी समस्या का तुरंत समाधान निकालें और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। सरकार की तरफ से मिले इस ठोस आश्वासन के बाद विपक्षी विधायकों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने अपना विरोध वापस ले लिया।

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स्थानीय ठेकेदारों को टेंडर में मिलेगी भारी प्राथमिकता

सदन में केवल सूखे का ही मुद्दा नहीं गूंजा, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे और सड़क निर्माण के अहम मसले पर भी तीखी बहस देखने को मिली। विधायक सचिन्द्र कुमार ने सदन पटल पर यह चिंता जताई कि बड़े सड़क निर्माण पैकेजों के कारण राज्य के कई हिस्सों में जमीनी स्तर पर विकास का काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और कई परियोजनाएं रुक गई हैं। इस अहम सवाल का विस्तार से जवाब देते हुए ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने सरकार की स्थिति और भविष्य की रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने सदन को बताया कि मुख्यमंत्री ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि आगे से राज्य में कोई भी नया बड़ा ठेका या पैकेज जारी नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, अब राज्य सरकार पच्चीस लाख रुपये से लेकर पचास करोड़ रुपये तक के सभी टेंडर में स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता देने जा रही है। सुनील कुमार ने पिछले बीस वर्षों की उपलब्धियां गिनाते हुए दावा किया कि बिहार में एक लाख बीस हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का विशाल जाल बिछाया गया है। इन महत्वपूर्ण ग्रामीण सड़क परियोजनाओं पर एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की भारी राशि खर्च की गई है। विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने यह भी याद दिलाया कि साल दो हजार पांच से पहले ग्रामीण बिहार में सड़कों की क्या बदतर हालत थी, यह सच्चाई किसी से भी छिपी नहीं है।

रुके हुए सभी सड़क निर्माण कार्यों में आएगी नई तेजी

सड़क निर्माण की सुस्त रफ्तार पर न केवल विपक्ष ने बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर से भी गंभीर सवाल उठाए गए। बीजेपी विधायक देवेशकांत ने सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि जो जनहित के मुद्दे विपक्ष को उठाने चाहिए थे, उन पर अब सत्ता पक्ष के ही नेता सवाल करने को मजबूर हो रहे हैं। इस तीखी टिप्पणी पर ग्रामीण कार्य मंत्री ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पूर्व में नीतीश कुमार द्वारा जिन महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया था, उनमें बड़े पैकेजों की प्रशासनिक जटिलताओं के कारण कुछ रुकावटें आ गई थीं। हालांकि, मंत्री ने सदन को भरोसा दिया कि सरकार ने अब इन सभी पुरानी बाधाओं को दूर कर लिया है और परियोजनाओं के लिए फंड का प्रवाह भी फिर से शुरू हो गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले एक महीने के भीतर नए सिरे से टेंडर जारी कर दिए जाएंगे और रुके हुए सभी सड़क निर्माण कार्य बहुत तेजी से दोबारा शुरू होंगे।

नए टाउनशिप और अहम जनहित विधेयकों पर कड़ा फोकस

सदन में केवल विरोध प्रदर्शन और हंगामे ही नहीं हुए, बल्कि राज्य के भविष्य के विकास का एक विस्तृत खाका भी पेश किया गया। राज्य सरकार जल्द ही बिहार नगर विकास विधेयक दो हजार छब्बीस पेश करने जा रही है, जिसका मुख्य और सीधा लक्ष्य राज्य भर में बारह नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप स्थापित करना है। इन महत्वाकांक्षी शहरी परियोजनाओं में राजधानी पटना के करीब बनने वाली सबसे बड़ी बसाहट 'पाटलिपुत्र टाउनशिप' और सोनपुर क्षेत्र में विकसित होने वाला 'हरिहरनाथपुरम' प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी अत्याधुनिक टाउनशिप के सुचारू संचालन और प्रबंधन के लिए राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र और शक्तिशाली अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो राज्य के शहरीकरण को एक बिल्कुल नई दिशा और रफ्तार प्रदान करेगी।

इसके अलावा, सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य में डिजिटल सट्टेबाजी पर लगाम कसने के लिए ‘बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक, दो हजार छब्बीस’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस नए और सख्त कानून के तहत अब राज्य भर में किसी भी मोबाइल ऐप, कंप्यूटर या ऑनलाइन डिजिटल माध्यम से खेले जाने वाले सभी प्रकार के जुए पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर भी सरकार ने अपनी सक्रियता दिखाई है। मंगलवार को ही जब आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी और खाली पदों का अहम मुद्दा उठाया गया, तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद इसका संज्ञान लिया। उन्होंने शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिया कि एक महीने के सख्त भीतर शिक्षकों के सभी रिक्त पदों को भर लिया जाए और वरिष्ठ अधिकारी इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की नियमित रूप से गहन निगरानी करें।

विपक्ष के पास आगे के लिए तैयार हैं कई बड़े मुद्दे

विधानसभा का आने वाला समय भी काफी हंगामेदार रहने की पूरी संभावना है। सत्र के तीसरे दिन विपक्ष कई अन्य ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को पूरी ताकत से घेरने की तैयारी कर चुका है। देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए हालिया लाठीचार्ज का मुद्दा सदन में जोर-शोर से गूंज सकता है, जिसे देश भर में विपक्ष ने एक बड़ा राजनीतिक हथियार बना लिया है। इसके साथ ही, राज्य के भीतर हाल ही में सामने आए कथित पेपर लीक विवाद, पुलिस एनकाउंटर की घटनाओं और ग्रामीण स्तर पर पंचायतों में नया टैक्स लगाने के विवादास्पद फैसलों पर विपक्षी दल अपना कड़ा एतराज जताने वाले हैं। खासकर गांवों में लगाए जाने वाले टैक्स के इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं और उसे तीखे सवालों का सीधा सामना करना पड़ सकता है।

सवाल-जवाब

बिहार विधानसभा में सूखे को लेकर सरकार ने क्या अहम फैसला लिया है?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि राज्य भर के किसानों को अपने खेतों की सिंचाई करने के लिए सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक निर्बाध बिजली दी जाएगी।
ग्रामीण सड़क निर्माण के टेंडर नियमों में क्या बड़ा बदलाव किया गया है?
राज्य सरकार अब सड़क निर्माण परियोजनाओं में बड़े पैकेजों के बजाय 25 लाख रुपये से लेकर 50 करोड़ रुपये तक के टेंडर में सीधे तौर पर स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता देगी।
बिहार नगर विकास विधेयक 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस विधेयक के तहत राज्य भर में 12 नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बसाए जाएंगे, जिनमें पटना के करीब बनने वाला पाटलिपुत्र टाउनशिप सबसे बड़ी बसाहट होगी।
क्या बिहार में ऑनलाइन जुए पर आधिकारिक प्रतिबंध लगा दिया गया है?
हाँ, बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक 2026 के सर्वसम्मति से पारित होने के बाद राज्य में मोबाइल ऐप और कंप्यूटर के जरिए खेले जाने वाले हर तरह के जुए पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
आंबेडकर आवासीय विद्यालयों के लिए सरकार ने क्या निर्देश जारी किए हैं?
मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश दिया है कि इन विद्यालयों में शिक्षकों के सभी खाली पदों को केवल एक महीने के भीतर भरा जाए और इसकी कड़ी मॉनिटरिंग की जाए।
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