बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र का चौथा दिन भारी राजनीतिक हंगामे और गर्माहट भरा रहने वाला है। राज्य का विपक्ष देशव्यापी नीट पेपर लीक विवाद और पटना में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज को लेकर सरकार को पूरी तरह से घेरने की तैयारी में है। विपक्ष के नेताओं ने अपनी खास रणनीति तैयार कर ली है और वे सदन के भीतर सत्ता पक्ष से इन अहम मुद्दों पर कड़े जवाब मांगने वाले हैं, जिससे सदन की कार्यवाही में बड़ा व्यवधान होने की आशंका है।
इस संभावित राजनीतिक हंगामे के बावजूद, सदन का आज का विधायी कामकाज काफी अहम है। दिन की शुरुआत तय प्रश्नकाल से होगी, जिसके दौरान विशेष रूप से शिक्षा विभाग और सहकारिता विभाग से जुड़े अहम सवालों के जवाब दिए जाएंगे। इसके बाद, दोपहर के सत्र में सरकार का पूरा ध्यान राज्य के वित्तीय मामलों पर केंद्रित रहेगा।
वित्तीय एजेंडा और अनुपूरक बजट
राज्य के वित्त मंत्री आज वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरणी को सदन के पटल पर रखेंगे। इन अतिरिक्त सरकारी खर्चों को कानूनी और संवैधानिक मंजूरी दिलाने के मकसद से, सरकार इसके साथ ही ‘बिहार विनियोग (संख्या-3) विधेयक, 2026’ भी पेश करेगी, जिससे राज्य के विकास कार्यों के लिए धन का आवंटन सुनिश्चित हो सकेगा।
बुधवार को पारित हुए 13 अहम विधेयक
आज के संभावित हंगामे से ठीक पहले, मानसून सत्र के तीसरे दिन यानी बुधवार को सदन में जमकर विधायी कामकाज हुआ। इस दौरान कुल 13 महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया गया। इनमें शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने वाला बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026 भी प्रमुख रूप से शामिल था।
इस शिक्षा विधेयक पर चर्चा करते हुए, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन को बताया कि यह नया कदम राज्य के युवाओं को एक नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य छात्रों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में जाने से रोकना है। स्थिति की गंभीरता को समझाने के लिए उन्होंने आंकड़े देते हुए बताया कि फिलहाल 30 हजार बिहारी छात्र एमिटी यूनिवर्सिटी में और 11 हजार छात्र लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। लाखों छात्रों के राज्य से बाहर जाने के कारण उनके माता पिता पर पड़ने वाले भारी आर्थिक बोझ का जिक्र करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस पुरानी व्यवस्था को बदलने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है।
सोशल मीडिया पर सख्ती और पेपर लीक
सदन में बिहार अपराध नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2026 को भी सफलतापूर्वक पारित कर दिया गया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस कानून की जरूरत बताते हुए कहा कि बदलती दुनिया के साथ अपराध को अंजाम देने के तरीकों में भी बड़ा बदलाव आया है। नए कानून के तहत अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने या आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें दोषियों के लिए 6 महीने से लेकर 1 साल तक की सजा का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। साथ ही, शिक्षा जगत में हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए पेपर लीक को भी अब सीधे तौर पर संगठित अपराध की श्रेणी में डाल दिया गया है।
शहरी विकास और उद्योग को बढ़ावा
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सदन ने बिहार नगर विकास विधेयक 2026 को भी मंजूरी दे दी है। नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा ने जानकारी दी कि इसके तहत एक नए ‘बिहार नगर विकास प्राधिकरण’ का गठन किया जाएगा। यह नई संस्था मुख्य रूप से शहरों के चौतरफा विकास और वहां के बुनियादी ढांचे को सुधारने की दिशा में काम करेगी।
इसके साथ ही, राज्य में निवेश को आसान बनाने के लिए बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026 भी पास किया गया। उद्योग मंत्री श्रेयषी सिंह ने बताया कि अब निवेशकों की सुविधा के लिए पूरी तरह से एकल खिड़की प्रणाली लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत ‘इन्वेस्ट बिहार’ सचिवालय को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह निवेश से जुड़े सभी आवेदनों का निपटारा महज 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित करे।
पंचायतों को मिला वित्तीय अधिकार
ग्रामीण स्तर पर विकास को गति देने के लिए बिहार पंचायत राज (संशोधन) विधेयक 2026 भी पारित किया गया। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इसके नए नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि अब राज्य की पंचायतें अपने क्षेत्र में लगने वाले होर्डिंग, बैनर और विज्ञापनों पर सीधे तौर पर शुल्क वसूलने की हकदार होंगी। इसके अलावा, अब गांवों में भी बहुमंजिला इमारतों का निर्माण करने से पहले नक्शा पास कराना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। पंचायतों को होल्डिंग टैक्स और यूजर चार्ज वसूलने का नया अधिकार दिया गया है, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और अपने विकास कार्यों के लिए किसी पर निर्भर न रहें।




















