बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है और सदन की रौनक बढ़ने वाली है। विधानसभा की बैठक सुबह 11 बजे से शुरू होगी, जबकि विधान परिषद की कार्यवाही दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। आज सरकार सदन में कई अहम विधेयक पेश करने वाली है, वहीं विपक्ष भी अलग-अलग मुद्दों पर सत्ता पक्ष को घेरने की पूरी तैयारी में जुटा है, जिसकी वजह से आज भी सदन में हंगामे के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। खबर यह भी है कि सत्ता पक्ष की ओर से सीएम सम्राट खुद मोर्चा संभाल सकते हैं और विपक्ष के सवालों का करारा जवाब देने के मूड में नजर आ सकते हैं।
प्रश्नकाल से शुरू होगी कार्यवाही, फिर उठेंगे स्थानीय मुद्दे
सदन की कार्यवाही की शुरुआत हमेशा की तरह प्रश्नोत्तरकाल से होगी, जिसमें विधायक सरकार से सवाल-जवाब करेंगे। इसके ठीक बाद शून्यकाल शुरू होगा, जिसमें अलग-अलग दलों के विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी समस्याएं और मांगें सदन के सामने रखेंगे। दोपहर के भोजनावकाश के बाद असली कामकाज शुरू होगा, जब सरकार की ओर से कुल सात विधेयक सदन के पटल पर रखे जाएंगे। माना जा रहा है कि इनमें से कुछ विधेयकों पर उसी दिन चर्चा भी शुरू हो सकती है।
सोमवार को सदन में पेश हुए थे आठ बड़े विधेयक
मानसून सत्र के पहले दिन यानी सोमवार को सरकार ने उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि प्रबंधन, कराधान, शहरी विकास और कारोबार सुगमता जैसे अहम क्षेत्रों से जुड़े संशोधन विधेयक पेश किए थे। इनमें बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक, बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, बिहार नगर विकास विधेयक, बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, बिहार माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी (संशोधन) विधेयक और बिहार व्यापार सुगमता विधेयक शामिल थे। इन सभी विधेयकों का मकसद राज्य में प्रशासनिक और कारोबारी व्यवस्था को और बेहतर बनाना बताया जा रहा है।
शिक्षा, बेरोजगारी और बाढ़ पर विपक्ष का हमला तय
दूसरी ओर विपक्षी दलों ने भी आज पूरी तैयारी के साथ सदन में उतरने की रणनीति बनाई है। विपक्ष शिक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था की स्थिति, बेरोजगारी, बाढ़ की समस्या और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने के मूड में है। ऐसे में प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे की पूरी आशंका है। सरकार की कोशिश रहेगी कि हंगामे के बीच भी ज्यादा से ज्यादा विधायी कामकाज निपटाया जाए, जबकि विपक्ष जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर सरकार को जवाब देने पर मजबूर करने की कोशिश करेगा। इन्हीं वजहों से मानसून सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।




















