राजनाथ सिंह ने स्वामी विवेकानंद के साल 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण को भारतीय सभ्यता का निर्णायक मोड़ बतायाद ऑफिस की याद सताने पर जरूर देखें ये 6 बेहतरीन ऑफिस कॉमेडी फिल्में, मिलेगा भरपूर मनोरंजनगंगा के बढ़ते जलस्तर से भोजपुर के घांघर में गहराया चारे का संकट, भुखमरी की कगार पर पहुंचे मवेशीअफगानिस्तान टी20 सीरीज से पहले टीम इंडिया की बढ़ी परेशानी, नेट प्रैक्टिस के दौरान चोटिल हुए ईशान किशननई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति का बिना प्रोटोकॉल वाला इशारा, अजित डोभाल से पुतिन की मुलाकात के क्या हैं कूटनीतिक मायने?कर्क साप्ताहिक राशिफल 13-19 सितंबर के लिए: मंगल के गोचर से करियर और आर्थिक जीवन में बदलाव, जानें अपना भाग्यभाई किंग हेराल्ड के अंतिम संस्कार के दो दिन बाद नॉर्वे की राजकुमारी ऐस्ट्रिड का निधन121 दिनों तक देवगुरु बृहस्पति की वक्री चाल: 6 राशियों के करियर और धन लाभ में आएगा बड़ा मोड़पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य, एयर इंडिया घटना के बाद DGCA का आदेशगूगल फोटोज की इन 10 सीक्रेट सेटिंग्स से बचाएं स्टोरेज और सुरक्षित रखें अपनी प्राइवेसी
बीरभूम में टीएमसी के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी का शव बरामद, सुसाइड नोट में खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को बताया बेबुनियादराजनीति
16 अग॰ 2026, 11:26 am (27 दिन पहले)· 3

बीरभूम में टीएमसी के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी का शव बरामद, सुसाइड नोट में खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को बताया बेबुनियाद

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट में पूर्व मंत्री और 5 बार के टीएमसी विधायक आशीष बनर्जी का शव फंदे से लटका मिला। बरामद सुसाइड नोट में उन्होंने छात्र राजनीति से अपनी शुरुआत का जिक्र करते हुए विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की दुखद खबर सामने आई है। रामपुरहाट स्थित अपने आवासीय कार्यालय में 5 बार के विधायक और पूर्व मंत्री आशीष बनर्जी का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। रविवार को हुई इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलने के तुरंत बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है और मामले की व्यापक जांच शुरू कर दी है।

सुसाइड नोट में राजनीतिक सफर और आरोपों का जिक्र

घटनास्थल से पुलिस को एक पत्र भी मिला है जिसे सुसाइड नोट माना जा रहा है। इस पत्र में आशीष बनर्जी ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन के विभिन्न चरणों का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति के दिनों से हुई थी। इसके साथ ही उन्होंने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले इस वरिष्ठ नेता ने अपने पत्र में लिखा कि उन पर लगाए जा रहे वित्तीय अनियमितताओं के आरोप पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत हैं।

ये भी पढ़ें

विकास प्राधिकरण में अधिकारों और भूमिका पर सफाई

सुसाइड नोट में आशीष बनर्जी ने विशेष रूप से तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी का जिक्र किया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि इस विकास प्राधिकरण में उनके पास कोई वास्तविक प्रशासनिक या वित्तीय अधिकार नहीं थे। वे केवल आम बैठकों में हिस्सा लिया करते थे। उन्होंने न तो किसी विकास योजना को मंजूरी दी थी और न ही किसी वित्तीय चेक पर अपने हस्ताक्षर किए थे। उनका कहना था कि जब उनके पास कोई कार्यकारी शक्ति ही नहीं थी, तो भ्रष्टाचार में उनकी संलिप्तता का सवाल ही पैदा नहीं होता।

पुलिस जांच और राजनीतिक पृष्ठभूमि

बीरभूम पुलिस के अनुसार मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की हर संभावित पहलू से गहन जांच कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके। आशीष बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के एक कद्दावर नेता थे। वे पश्चिम बंगाल विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रहने के साथ-साथ ममता सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। 5 बार विधायक चुने जा चुके बनर्जी के इस तरह अचानक चले जाने से तृणमूल कांग्रेस और उनके समर्थकों में भारी शोक की लहर है।

सवाल-जवाब

आशीष बनर्जी का शव कहां से मिला?
उनका शव पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट में स्थित उनके आवासीय कार्यालय से मिला।
सुसाइड नोट में भ्रष्टाचार के आरोपों पर क्या लिखा गया है?
सुसाइड नोट में उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि तारापीठ विकास प्राधिकरण में उनके पास कोई प्रशासनिक अधिकार नहीं था और उन्होंने कभी किसी चेक या योजना को मंजूरी नहीं दी।
आशीष बनर्जी ने अपना राजनीतिक करियर कैसे शुरू किया था?
अपने पत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति के दिनों से हुई थी।
तृणमूल कांग्रेस और सरकार में आशीष बनर्जी के पास कौन से पद रहे थे?
वे 5 बार के टीएमसी विधायक थे, पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर रहे और ममता सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

यह घटना एक गंभीर प्रशासनिक और कानूनी सवाल खड़े करती है। सुसाइड नोट में भ्रष्टाचार के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए विकास प्राधिकरण की वित्तीय शक्तियों पर स्पष्टीकरण देना यह संकेत देता है कि राजनीतिक दबाव और सार्वजनिक छवि का संकट कितना गहरा हो सकता है। पुलिस और फोरेंसिक जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण कदम के पीछे के वास्तविक ट्रिगर क्या थे और क्या इस मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि जब सार्वजनिक जीवन में शुचिता पर सवाल उठते हैं और प्रशासनिक दबाव बढ़ता है, तो क्षेत्रीय नेताओं पर मानसिक तनाव कितना घातक हो सकता है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक माहौल और व्यवस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस और फॉरेंसिक जांच से सुसाइड नोट के दावों और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर क्या सच्चाई सामने आती है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR