दिल्ली में BJP-RSS बैठक का व्यापक एजेंडा
भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच सोमवार को दिल्ली में एक उच्च स्तरीय संयुक्त बैठक हुई, जिसमें संगठनात्मक पुनर्गठन से लेकर आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारी तक अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विमर्श किया गया। हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक नियुक्ति या निर्णय की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन यह बैठक आने वाले समय में पार्टी की दिशा तय करने वाली कड़ी के रूप में देखी जा रही है।
बैठक में कौन-कौन रहे शामिल
BJP की तरफ से इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महासचिव बीएल संतोष, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। RSS की ओर से सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार और कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाग लिया।
किसे मिल सकती है कौन सी नई भूमिका
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार BJP के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को पंजाब और उत्तराखंड से संबंधित संगठनात्मक कामकाज की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उत्तर प्रदेश में पार्टी के लिए अधिक केंद्रीय और सक्रिय भूमिका देने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। उत्तर प्रदेश BJP की नजर में राजनीतिक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण राज्यों में गिना जाता है और पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अभी से अपनी संगठनात्मक नींव मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
BJP के अनुभवी संगठनकर्ता सुनील बंसल उत्तर प्रदेश में अपनी मौजूदा जिम्मेदारियां बरकरार रख सकते हैं और साथ ही उन्हें मणिपुर में भी संगठन को सुदृढ़ करने की अतिरिक्त भूमिका सौंपी जा सकती है। राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को केंद्रीय नेतृत्व और पार्टी के जमीनी संगठन के बीच एक प्रभावी समन्वयक की भूमिका में देखा जा रहा है।
नियुक्तियों से परे, वैचारिक रणनीति पर भी गहन मंथन
सूत्रों के अनुसार इस बैठक का दायरा केवल संगठनात्मक तैनाती तक सीमित नहीं था। BJP की राजनीतिक संदेश रणनीति, जनसंपर्क अभियानों की योजना और कार्यकर्ताओं के बीच वैचारिक सक्रियता को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विस्तार से बातचीत हुई। RSS नेतृत्व ने पार्टी को अपने वैचारिक मूल्यों और पारंपरिक समर्थक वर्ग के साथ मजबूत तथा निरंतर संवाद बनाए रखने की नसीहत दी।
दत्तात्रेय होसबाले ने हिन्दुत्व पर आधारित जनसंपर्क गतिविधियों और सामाजिक सहभागिता को और अधिक प्रभावशाली बनाने की जरूरत पर विशेष बल दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चुनावी रणनीति तैयार करते समय जातीय समीकरणों पर अत्यधिक निर्भरता से बचना आवश्यक है।
2024 के सबक और 2027 की तैयारी की पहली कड़ी
2024 के लोकसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद BJP के भीतर विभिन्न स्तरों पर सामाजिक समीकरणों और जाति आधारित चुनावी रणनीतियों को लेकर मंथन का दौर तेज हुआ था। इस पृष्ठभूमि में हुई BJP-RSS की यह बैठक पार्टी के लिए आत्ममंथन का अवसर भी है और आगे की राजनीतिक राह तय करने का माध्यम भी। आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और सबसे बड़ी कसौटी के रूप में 2027 का उत्तर प्रदेश चुनाव पार्टी की असली परीक्षा लेंगे और सोमवार की यह बैठक उन चुनौतियों के लिए की जाने वाली तैयारियों की शुरुआत मानी जा रही है।













