पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली शिकस्त के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ममता बनर्जी पर सीधा और तीखा हमला बोला है। TrendKia को दिए एक इंटरव्यू में ओवैसी का कहना था कि बंगाल में टीएमसी की इस करारी हार के पीछे कोई इकलौती वजह नहीं है, बल्कि आम जनता और खास तौर पर मुस्लिम समुदाय के भीतर पनप रहा गहरा आक्रोश इसका असली कारण है।
'वोट बैंक समझा, संकट में छोड़ दिया'
ओवैसी ने इल्जाम लगाया कि ममता बनर्जी ने राज्य के मुसलमानों को महज एक वोट बैंक की तरह देखा। उनका तर्क है कि जब इस समुदाय को सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत थी, यानी संकट की घड़ी में, तब उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया। यही नाराजगी आखिरकार वोट में बदली और मुस्लिम मतदाताओं ने ममता का साथ छोड़ दिया।
हार की चार बड़ी वजहें
AIMIM प्रमुख ने टीएमसी की पराजय के पीछे मुख्य रूप से चार कारण गिनाए। पहला, ममता सरकार के कार्यकाल में फैला बड़े पैमाने का भ्रष्टाचार। दूसरा, बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था, जिसे उन्होंने कुशासन करार दिया। तीसरा, राज्य की वोटर लिस्ट से जुड़ा एसआईआर का मामला। और चौथा तथा सबसे अहम, मुस्लिम समुदाय के साथ हुआ विश्वासघात। ओवैसी के मुताबिक इन्हीं वजहों ने मिलकर चुनावी नतीजे की पटकथा लिख दी।
उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी सत्ता के अहंकार में जनता से पूरी तरह कट चुकी थीं। उन्हें जमीनी हकीकत का अंदाजा ही नहीं रहा, और इसी दूरी ने जनता को बदलाव की ओर धकेल दिया।
आखिर क्या है '5 लाख वाला गेम'
इस सियासी टकराव में ओवैसी ने जिस '5 लाख वाले गेम' का जिक्र किया, उसकी जड़ ओबीसी (OBC) जाति प्रमाण पत्र में है। उन्होंने याद दिलाया कि आज से करीब डेढ़ से दो साल पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में लगभग 5 लाख ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द कर दिए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इन रद्द हुए 5 लाख प्रमाण पत्रों में से करीब 3 लाख अकेले मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों के थे।
ओवैसी का सवाल है कि जब सत्ता ममता बनर्जी के हाथ में थी, तब वह चाहतीं तो विधानसभा में कानून पारित कर इन लोगों के अधिकारों की हिफाजत कर सकती थीं। मगर उनके मुताबिक इस दिशा में कुछ नहीं किया गया।
दलों को नसीहत
अंत में ओवैसी ने ममता बनर्जी समेत बाकी राजनीतिक दलों को नसीहत दी कि अब वह वक्त आ गया है जब मुसलमानों के साथ भेदभाव पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। उन्होंने दोटूक कहा कि पार्टियां मुसलमानों को सिर्फ चुनाव जीतने का जरिया या वोट बैंक मानना बंद करें और उन्हें देश के बराबरी वाले, सम्मानित नागरिक की तरह देखें। उनका दावा है कि बंगाल चुनाव में मुसलमानों ने अपना गुस्सा दिखाकर साफ कर दिया है कि वे अब हक और हिस्सेदारी की लड़ाई में खामोश बैठने वाले नहीं हैं।













