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चीन की शरण में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान, बीजिंग में शी जिनपिंग से हुई अहम मुलाकातराजनीति
26 जून 2026, 2:37 pm (45 दिन पहले)· 3

चीन की शरण में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान, बीजिंग में शी जिनपिंग से हुई अहम मुलाकात

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा ने भू-राजनीतिक समीकरणों में हलचल पैदा कर दी है, जहां उन्होंने शी जिनपिंग के साथ व्यापार और रक्षा सौदों पर विस्तृत बातचीत की। इस यात्रा के दौरान 24 लड़ाकू विमानों की संभावित डील और सैन्य सहयोग भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकता है।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने शुक्रवार को बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। अपनी चार दिवसीय चीन यात्रा के दौरान इसे सबसे प्रमुख घटनाक्रम माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने व्यापार, बुनियादी ढांचे के विकास, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा की। प्रधानमंत्री के अतिरिक्त प्रेस सचिव अतिकुर रहमान रुमोन ने पुष्टि की कि बीजिंग में शुक्रवार सुबह यह बैठक शुरू हुई, जिसमें प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बांग्लादेश से संबंधित कई अहम विषय राष्ट्रपति शी जिनपिंग के समक्ष रखे।

व्यापार और बुनियादी ढांचे पर जोर

प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता महदी अमीन ने स्पष्ट किया कि इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा व्यापार, निवेश और साझा हितों के क्षेत्रों में तालमेल बढ़ाना था। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, इस दौर के दौरान प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने ढाका के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे चीनी नेतृत्व के सामने रखे। इस मुलाकात से पहले, गुरुवार को तारिक रहमान ने चीन के प्रधानमंत्री ली च्यांग के साथ बैठक की थी। उस चर्चा के दौरान तीस्ता परियोजना, व्यापारिक निवेश जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई थी। नतीजतन, दोनों देशों ने दो समझौतों और 13 समझौता ज्ञापनों (MOU) पर हस्ताक्षर किए।

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मजबूत होती चीन-बांग्लादेश साझेदारी

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया कि दोनों देशों के प्रमुखों की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद हुए ये समझौते द्विपक्षीय साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का संकेत हैं। तारिक रहमान अपनी विदेश यात्रा के पहले चरण के रूप में मलेशिया के दो दिवसीय दौरे के बाद सोमवार रात को चीन के डालियान पहुंचे थे। उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली आधिकारिक विदेश यात्रा है, जो रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

रक्षा सौदों और लड़ाकू विमानों पर नजर

विश्लेषकों का मानना है कि रहमान का यह चीन दौरा मुख्य रूप से आर्थिक और रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। चर्चाओं के केंद्र में 24 J-10 CE लड़ाकू विमानों का संभावित सौदा और ड्रोन यानी यूएवी (UAV) तकनीक का हस्तांतरण है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सैन्य समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो यह ढाका का बीजिंग की ओर बढ़ते गहरे रणनीतिक झुकाव को स्पष्ट करेगा। यह कदम अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक वादों के विपरीत भी जा सकता है।

भारत के लिए बढ़ती चुनौतियां

इस रक्षा सहयोग को लेकर भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं, क्योंकि इन अत्याधुनिक हथियारों और विमानों की तैनाती भारत के रणनीतिक रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के निकट होने की संभावना है। हालांकि, लड़ाकू विमानों और ड्रोन की खरीद पर अमेरिका के साथ हुए किसी व्यापार समझौते में स्पष्ट प्रतिबंध का जिक्र नहीं है। यह समझौता 9 फरवरी को मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने आम चुनाव से महज तीन दिन पूर्व किया था, जिसकी काफी आलोचना भी हुई थी। वर्तमान में शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश की विदेश नीति में स्पष्ट बदलाव दिख रहा है। अब ढाका चीन, तुर्किये और पाकिस्तान के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को पहले से कहीं अधिक प्राथमिकता देने की दिशा में बढ़ रहा है।

सवाल-जवाब

तारिक रहमान की चीन यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य चीन के साथ व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे और रक्षा संबंधों को मजबूत करना है।
चीन और बांग्लादेश के बीच किन प्रमुख रक्षा सौदों पर चर्चा हुई है?
चर्चाओं के केंद्र में 24 J-10 CE लड़ाकू विमानों की खरीद और ड्रोन तकनीक का हस्तांतरण शामिल है।
चीन के साथ इन समझौतों पर भारत की चिंता का कारण क्या है?
भारत को डर है कि इन अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की तैनाती उसके रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के करीब हो सकती है।
क्या अमेरिका के साथ हुए किसी समझौते से यह रक्षा डील प्रभावित हो सकती है?
रिपोर्टों के अनुसार, लड़ाकू विमानों की खरीद पर अमेरिका के साथ पूर्व में हुए किसी व्यापार समझौते में स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है।
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