दिल्ली में मोदी-शाह-नवीन की बंद कमरे में हुई बैठक ने यूपी-बिहार की सियासत में मचाई हलचलराजनीति
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दिल्ली में मोदी-शाह-नवीन की बंद कमरे में हुई बैठक ने यूपी-बिहार की सियासत में मचाई हलचल

बुधवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और महासचिव बीएल संतोष की मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार की सियासत में अटकलों का दौर तेज हो गया है, संगठन में फेरबदल से लेकर कैबिनेट विस्तार तक तमाम चर्चाएं गर्म हैं।

बुधवार शाम को विदेश दौरे से लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ एक अहम बैठक की। इसी बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव यानी संगठन प्रभारी बीएल संतोष भी मौजूद रहे। दिलचस्प बात यह है कि इस मुलाकात से ठीक एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद दिल्ली पहुंचे थे और उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह से लंबी बातचीत की थी। इससे भी कुछ दिन पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लखनऊ के दौरे पर गए थे और वहां संगठन के नेताओं से मुलाकात की थी। इन तीनों मुलाकातों की कड़ियां जोड़कर देखें तो राजधानी दिल्ली से लेकर लखनऊ और पटना तक सियासी हलकों में अटकलों का दौर तेज हो गया है, क्योंकि तीनों मुलाकातें बेहद कम अंतराल में और बेहद अहम मौके पर हुई हैं।

उत्तर प्रदेश में संगठन और चुनाव तैयारियों पर मंथन की चर्चा

इस समय देश की सबसे बड़ी सियासी लड़ाई उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की मानी जा रही है और बीजेपी हर हाल में यहां जीत की हैट्रिक लगाना चाहती है, क्योंकि यूपी की सियासी अहमियत पूरे देश की राजनीति की दिशा तय करती है। दूसरी ओर अयोध्या के राम मंदिर में हुई चोरी की घटना ने पहले ही बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी थी, और अब 2024 के लोकसभा चुनाव में आजमाए गए पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले की कामयाबी से समाजवादी पार्टी का हौसला और बढ़ गया है। समाजवादी पार्टी सत्ता से दस साल के वनवास को खत्म करने के मकसद से पूरी ताकत झोंकने में जुटी है। यही वजह है कि बीजेपी के लिए यह चुनाव सिर्फ एक और चुनाव नहीं बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है, और माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसी बैठक में गृहमंत्री शाह, पार्टी अध्यक्ष नवीन और महासचिव संतोष से यूपी की चुनावी तैयारियों, बूथ स्तर की रणनीति और संभावित चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की होगी।

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लखनऊ के सियासी गलियारों में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश संगठन में बड़ा फेरबदल हो सकता है। हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई टीम में कई नए चेहरों को जगह दी थी, ताकि संगठन को चुनावी मोड में लाया जा सके। अब चर्चा है कि अखिलेश यादव के पीडीए समीकरण की काट तलाशने के लिए वह खुद जिला स्तर पर जाकर कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं से सीधा फीडबैक लेंगे, और उसके बाद ही जिलाध्यक्षों में बदलाव को लेकर अंतिम फैसला किया जाएगा। यह कवायद इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती ही यह तय करती है कि पार्टी बूथ स्तर तक अपने वोटरों को कितनी असरदार तरीके से जोड़ पाती है।

तीसरी अटकल यह है कि प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही अपनी केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल करने वाले हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि क्या यूपी चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस राज्य से किसी नए चेहरे को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी, ताकि प्रदेश में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधा जा सके, या फिर मौजूदा मंत्रियों के विभागों में ही फेरबदल देखने को मिलेगा।

चौथी चर्चा यह है कि क्या केंद्रीय नेतृत्व से कुछ बड़े और अनुभवी नेताओं की एक टीम उत्तर प्रदेश भेजी जा सकती है, ताकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आगामी प्रचार अभियान में मदद मिल सके। इसके साथ ही इस कदम से राज्य की टीम तक यह स्पष्ट संदेश भी पहुंचेगा कि केंद्रीय नेतृत्व चुनाव में पूरी तरह उनके साथ खड़ा है और कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

एक और चर्चा भी जोर पकड़ रही है, जो सीधे विपक्ष की रणनीति से जुड़ी है। विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव एनडीए और बीजेपी के कुछ बड़े चेहरों को तोड़कर अपने पाले में लाना चाहते हैं। इसी क्रम में अखिलेश यादव पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वह जब चाहेंगे साक्षी महाराज को अपने साथ ले आएंगे। इसके अलावा पूर्व सांसद और बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह भी हाल के दिनों में पार्टी लाइन से हटकर बयान देते नजर आए हैं, जिसने कयासों को और हवा दी है। वहीं बीजेपी के कुछ नेता और एनडीए के सहयोगी दल सुभासपा के प्रमुख ओपी राजभर लगातार यह दावा कर रहे हैं कि जिस तरह पश्चिम बंगाल में टूट देखने को मिली थी, ठीक उसी तर्ज पर विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के कई सांसद पाला बदल सकते हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इन सभी संभावनाओं और चुनौतियों पर भी आपस में गहन बातचीत की होगी।

बिहार में ऑपरेशन लोटस और नेतृत्व बदलाव की अटकलें

इस बैठक को लेकर बिहार में भी अटकलों का बाजार पूरी तरह गर्म है। पहली और सबसे बड़ी चर्चा यह है कि क्या बीजेपी बिहार में भी दलबदल कराने वाली अपनी पुरानी रणनीति, जिसे आमतौर पर ऑपरेशन लोटस कहा जाता है, उस पर काम कर रही है। दरअसल बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की इस बैठक से ठीक पहले आरजेडी के लोकसभा सांसद अभय कुशवाहा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी, और बीते कुछ दिनों में यह उनकी दूसरी ऐसी मुलाकात थी। बार-बार हो रही इन मुलाकातों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अभय कुशवाहा के नेतृत्व में आरजेडी के कुछ सांसद बगावत कर पाला बदलने की तैयारी में हैं। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना में हुई टूट के प्रकरणों के बाद बिहार में भी इसी तरह की अटकलों को और बल मिला है। आरजेडी के फिलहाल चार लोकसभा सांसद हैं, जिनमें तेजस्वी यादव की बड़ी बहन मीसा भारती भी शामिल हैं। चर्चा है कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और पार्टी अध्यक्ष की इस बैठक में यह मुद्दा भी उठा होगा कि अगर आरजेडी के सांसद टूटते हैं तो क्या आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जगह दी जाएगी, क्योंकि यह भी चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग होने वाले कुछ सांसदों को भी मोदी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।

दूसरी बड़ी चर्चा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की छवि को लेकर है। राज्य में बीते कुछ दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं ने बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है, और विपक्ष लगातार इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रहा है। इसी बीच जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव को बहाना बनाकर लगातार सम्राट चौधरी के असली नाम और शिक्षा जैसे मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इस संवेदनशील मुद्दे पर भी कोई फैसला ले सकता है, ताकि आगामी चुनाव से पहले सरकार की छवि को हुए नुकसान की भरपाई की जा सके।

तीसरी चर्चा यह है कि बिहार में भी संगठन के स्तर पर कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य में यह पहली बार है जब बीजेपी की अपनी सरकार चल रही है, इसलिए जातीय और सामाजिक समीकरणों पर मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए संगठन में फेरबदल की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।

चौथी चर्चा यह है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी की आगामी कैबिनेट फेरबदल में बिहार को भी उचित तवज्जो मिलेगी। सवाल यह है कि क्या राज्य से किसी नए चेहरे को मंत्रिमंडल में मौका मिलेगा, या मौजूदा मंत्रियों में से किसी की छुट्टी होगी, या फिर उनके विभागों में ही बदलाव किया जाएगा, ताकि सरकार का प्रदर्शन बेहतर दिख सके।

केंद्रीय स्तर पर संगठन और कैबिनेट में बदलाव की चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री शाह, पार्टी अध्यक्ष नवीन और महासचिव संतोष की इस बैठक को लेकर दिल्ली के सियासी हलकों में भी हलचल कम नहीं है। चर्चा है कि पार्टी की संगठनात्मक टीम में इसी सप्ताह बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, और नई टीम पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की छाप साफ नजर आएगी। कहा जा रहा है कि नई टीम में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा चेहरों को भी पर्याप्त अहमियत दी जा सकती है, ताकि आने वाले चुनावों में नई ऊर्जा के साथ काम किया जा सके।

दूसरी बड़ी चर्चा यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट से कुछ मंत्रियों को हटाकर उन्हें संगठन में जिम्मेदारी सौंप सकते हैं, जबकि संगठन में लंबे समय से काम कर रहे कुछ नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। यानी संगठन और सरकार के बीच नेताओं की यह आपसी अदला-बदली आने वाले दिनों में बीजेपी की समूची चुनावी रणनीति की दिशा तय कर सकती है।

फिलहाल इनमें से किसी भी अटकल की आधिकारिक पुष्टि न तो पार्टी की ओर से हुई है और न ही सरकार की ओर से, लेकिन दिल्ली से लखनऊ और पटना तक चली इन मुलाकातों की कड़ियों ने उत्तर प्रदेश और बिहार, दोनों ही राज्यों की सियासत में हलचल जरूर बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में संगठन और कैबिनेट को लेकर होने वाले फैसले ही यह साफ करेंगे कि इन अटकलों में कितनी सच्चाई थी।

सवाल-जवाब

मोदी-शाह की मीटिंग में कौन-कौन शामिल था?
इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष शामिल थे।
यह मीटिंग कब हुई?
यह बैठक बुधवार शाम को हुई, जब प्रधानमंत्री मोदी विदेश दौरे से लौटे थे।
इस बैठक से पहले और कौन सी मुलाकातें हुई थीं?
एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली जाकर अमित शाह से मुलाकात की थी, और कुछ दिन पहले नितिन नवीन ने लखनऊ का दौरा किया था।
यूपी में इस बैठक को लेकर क्या अटकलें हैं?
चर्चा है कि इसमें चुनावी तैयारी, प्रदेश संगठन में फेरबदल, कैबिनेट विस्तार में यूपी को जगह मिलने और अखिलेश यादव द्वारा एनडीए के कुछ नेताओं को तोड़ने की कोशिशों पर बात हुई होगी।
बिहार में इस बैठक को लेकर क्या चर्चा है?
बिहार में चर्चा है कि क्या बीजेपी वहां ऑपरेशन लोटस के जरिए आरजेडी के सांसदों को तोड़ने की कोशिश कर रही है, और सम्राट चौधरी की छवि तथा संगठन में बदलाव पर भी फैसला हो सकता है।
आरजेडी में फिलहाल कितने सांसद हैं और उनमें कौन शामिल हैं?
आरजेडी के फिलहाल चार लोकसभा सांसद हैं, जिनमें तेजस्वी यादव की बड़ी बहन मीसा भारती भी शामिल हैं।
क्या पीएम मोदी अपनी कैबिनेट में फेरबदल करने वाले हैं?
चर्चा है कि प्रधानमंत्री मोदी जल्द कैबिनेट में फेरबदल कर सकते हैं, जिसमें यूपी और बिहार से नए चेहरों को मौका मिलने की अटकलें हैं।
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