कर्नाटक की सियासत का केंद्र इन दिनों दिल्ली बन गया है। राज्य में कांग्रेस सरकार के मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है और इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद दिल्ली पहुंच चुके हैं। तीनों बड़े नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल को और तेज कर दिया है और यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि आखिर मंत्रिमंडल में जगह किसे मिलेगी।
दर्जनों विधायक भी उम्मीद के साथ दिल्ली में डेरा डाले बैठे हैं। हर किसी को यकीन है कि उसकी बारी अब आ सकती है और वह कर्नाटक कैबिनेट में शामिल हो सकता है। इतनी बड़ी संख्या में नेताओं का दिल्ली पहुंचना खुद इस बात का संकेत है कि पार्टी हाईकमान बहुत जल्द कोई अहम फैसला सुना सकता है।
20 खाली कुर्सियां, 40 से ज्यादा दावेदार
मुख्यमंत्री को छोड़कर फिलहाल कर्नाटक सरकार में सिर्फ 14 मंत्री ही काम संभाल रहे हैं, जबकि मंत्रिमंडल में 20 पद अब भी खाली पड़े हैं। इन्हीं 20 कुर्सियों के लिए कांग्रेस के भीतर 40 से ज्यादा वरिष्ठ नेता कतार में खड़े हैं, जिससे पार्टी के अंदर खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है। पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि किसे मौका दिया जाए और किसे नहीं, ताकि आगे चलकर संगठन में कोई गुटबाजी या असंतोष न पनपे। इतने बड़े पैमाने पर दावेदार होने की वजह से हाईकमान के लिए संतुलन बिठाना आसान नहीं रह गया है।
अशोक पट्टन: जाति नहीं, मेहनत के आधार पर मिले मौका
बेलगावी से तीन बार विधायक रह चुके अशोक पट्टन भी दिल्ली पहुंच गए हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। पट्टन ने बताया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के अलावा सिद्धारमैया और बी.के. हरिप्रसाद भी दिल्ली में मौजूद हैं और उन्हें उम्मीद है कि पार्टी नेतृत्व के साथ बहुत जल्द बैठक होगी, अगर आज नहीं तो कल जरूर होगी। खुद को मंत्री पद का दावेदार बताते हुए पट्टन ने यह मलाल भी जताया कि सिद्धारमैया के पिछले कार्यकाल में उन्हें मंत्री बनने का मौका नहीं मिल पाया था। इस बार उन्होंने मंत्रिमंडल में जगह देने की मांग रखी है और साफ कहा कि फैसला जाति के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि उन नेताओं को भी अवसर मिलना चाहिए जिन्होंने वर्षों तक मेहनत करके संगठन के लिए काम किया है। पट्टन के मुताबिक कुल 6 विधायक अपनी बात रखने के लिए दिल्ली आए हैं और वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात भी कर चुके हैं। अब वे के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला से मिलने का समय मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
लक्ष्मण सावदी: बीजेपी से कांग्रेस तक का सफर, अब मंत्री पद पर नजर
पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सावदी ने भी मंत्री बनने की अपनी इच्छा खुलकर जाहिर की है। सावदी लिंगायत समुदाय से आते हैं, जिस समुदाय के तीन नेता पहले से ही मौजूदा मंत्रिमंडल में शामिल हैं। इसके बावजूद सावदी को उम्मीद है कि इस बार भी कैबिनेट में उनके लिए जगह बनेगी। गौरतलब है कि सावदी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे और उनके इस फैसले ने बीजेपी को उस वक्त बड़ा राजनीतिक झटका दिया था। दिलचस्प बात यह भी है कि बीजेपी सरकार के दौरान लक्ष्मण सावदी डिप्टी मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अब उनकी निगाहें कांग्रेस सरकार में मंत्री पद पर टिकी हैं।
टी.बी. जयचंद्र: हाईकमान पर भरोसा, अनुभव के दम पर दावेदारी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और 7 बार विधायक रह चुके टी.बी. जयचंद्र का कहना है कि कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया अब आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुकी है और उम्मीद है कि इस पर बहुत जल्द फैसला हो जाएगा। उन्होंने इस ओर भी इशारा किया कि विधानसभा सत्र जल्द शुरू होने वाला है, इसलिए सरकार का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरी कैबिनेट का गठन जरूरी हो गया है। जयचंद्र ने यह भी स्वीकार किया कि वे खुद भी मंत्री पद के दावेदारों में शामिल हैं, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसे क्या जिम्मेदारी सौंपनी है, यह फैसला पूरी तरह पार्टी हाईकमान करेगा और उन्हें पार्टी नेतृत्व पर पूरा भरोसा है।
अप्पाजी नाडागौडा: मुंबई-कर्नाटक क्षेत्र को बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग
6 बार के विधायक अप्पाजी नाडागौडा ने भी कैबिनेट में अपने लिए दावा ठोका है। उनका कहना है कि मुंबई-कर्नाटक क्षेत्र को मंत्रिमंडल में अभी जितना प्रतिनिधित्व मिला है, वह पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए। नाडागौडा के मुताबिक पार्टी के प्रति वफादार रहे नेताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और जिन्होंने वर्षों तक संगठन के लिए मेहनत की है, उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मुश्किल वक्त में उन्होंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा और उपचुनावों में पार्टी को जीत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। नाडागौडा का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनकी दावेदारी पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
रहीम खान: कल्याण कर्नाटक और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व का सवाल
पूर्व मंत्री रहीम खान ने भी अपनी दावेदारी सामने रखी है। उनका कहना है कि वे कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के वरिष्ठ अल्पसंख्यक नेताओं में गिने जाते हैं, इसलिए उन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह मिलनी चाहिए। रहीम खान के मुताबिक इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक आबादी अच्छी खासी है और यहां से कुल 5 सांसद भी चुने जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि समुदाय के नेता अल्पसंख्यकों के लिए कैबिनेट में चार मंत्री पद की मांग कर रहे हैं और वे इस सिलसिले में पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं से पहले ही मुलाकात कर चुके हैं।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल कर्नाटक कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं का दिल्ली में डेरा जमा हुआ है। मंत्री पद की दौड़ में शामिल नेता लगातार पार्टी हाईकमान से मुलाकात कर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। अब सबकी निगाहें कांग्रेस आलाकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक-दो दिनों के भीतर कैबिनेट विस्तार को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी।











