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मराठी सीखने के विवाद पर देवेंद्र फडणवीस का बयान, बोले- किसी के रोजगार पर संकट नहीं आने देंगेराजनीति
24 अग॰ 2026, 6:05 pm (4 घंटे पहले)· 3

मराठी सीखने के विवाद पर देवेंद्र फडणवीस का बयान, बोले- किसी के रोजगार पर संकट नहीं आने देंगे

महाराष्ट्र में मराठी सीखने की अनिवार्यता और ऑटो-टैक्सी चालकों के विरोध पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि किसी की रोजी-रोटी नहीं छीनी जाएगी। साथ ही उन्होंने महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा।

मुंबई: महाराष्ट्र में गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की अनिवार्यता को लेकर चल रहे विवाद पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा है कि इस पूरे मामले पर अनावश्यक राजनीति की जा रही है, लेकिन राज्य की सरकार किसी भी मेहनतकश व्यक्ति की रोजी-रोटी पर आंच नहीं आने देगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि महाराष्ट्र में काम करने वाले उत्तर भारतीय ऑटो और टैक्सी चालकों का कोई भी लाइसेंस रद्द नहीं किया जा रहा है, और न ही सरकार ऐसा कोई कदम उठाएगी जिससे किसी के रोजगार पर संकट आए।

मुख्यमंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि यदि चालकों को बोलचाल की मराठी भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है, तो राज्य सरकार समय सीमा बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार की मंशा किसी को परेशान करने की नहीं, बल्कि केवल इतनी अपेक्षा है कि वे संवाद के लिए बुनियादी मराठी सीख जाएं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य में किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न हो।

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महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन पर कांग्रेस पर तीखा हमला

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केवल भाषा विवाद पर ही बात नहीं की, बल्कि महिला आरक्षण और परिसीमन यानी डीलिमिटेशन के मुद्दे पर भी कांग्रेस पार्टी और पी. चिदंबरम पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस संवेदनशील विषय पर लगातार झूठ बोल रही है। फडणवीस के अनुसार, साल 2023 में भी कांग्रेस महिला आरक्षण बिल का विरोध कर रही थी, लेकिन उसे यह अच्छी तरह पता था कि मौजूदा सरकार के पास सदन में स्पष्ट बहुमत है और बिल हर हाल में पास हो जाएगा। यही वजह थी कि कांग्रेस ने विरोध करने के बजाय उस स्थिति में बहती गंगा में हाथ धो लिया और अपना रुख बदल लिया।

फडणवीस ने जानकारी दी कि 2023 में पारित किए गए महिला आरक्षण कानून में ही डीलिमिटेशन को जोड़ा गया था। वैश्विक महामारी कोविड के कारण देश में समय पर जनगणना नहीं हो सकी थी, और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए 2029 तक नई जनगणना कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर डीलिमिटेशन करना भी संभव नहीं हो पाएगा। इसी बाधा को दूर करने के लिए सरकार ने एक मध्यम मार्ग निकाला है, जिसके तहत पुरानी जनगणना के आधार पर ही डीलिमिटेशन लागू करने का प्रस्ताव सुझाया गया है ताकि प्रक्रिया में रुकावट न आए।

कांग्रेस पर महिलाओं को आरक्षण न देने का आरोप

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर यह गंभीर आरोप भी लगाया कि वह इस योजना का विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि वह वास्तव में महिलाओं को उनका हक और आरक्षण देना ही नहीं चाहती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस किसी भी परिस्थिति में यह नहीं चाहती कि साल 2029 तक महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल सके, इसलिए वह तरह-तरह के बहाने बना रही है।

बता दें कि हाल ही में यह बात सामने आई थी कि महाराष्ट्र में गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के खिलाफ आरटीओ की कार्रवाई की जा रही है, जिसके विरोध में चालक उतर आए हैं। मुंबई के कुर्ला इलाके में हालात तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए जब चालकों ने अपना काम पूरी तरह बंद करके आंदोलन का रास्ता चुन लिया। इन चालकों का यह साफ आरोप है कि सरकार की इस पूरी कार्रवाई और सख्ती के पीछे गहरी राजनीतिक साजिश और राजनीति छिपी हुई है।

सवाल-जवाब

देवेंद्र फडणवीस ने मराठी सीखने के विवाद पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि किसी की रोजी-रोटी नहीं छीनी जाएगी और उत्तर भारतीय चालकों का कोई लाइसेंस रद्द नहीं किया जा रहा है।
क्या चालकों को मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा?
हाँ, मुख्यमंत्री ने कहा है कि यदि चालकों को बोलचाल की मराठी सीखने के लिए अधिक समय चाहिए, तो सरकार समय सीमा बढ़ाने को तैयार है।
महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालक क्यों विरोध कर रहे हैं?
गैर-मराठी चालक आरटीओ द्वारा की जा रही कार्रवाई और मराठी सीखने की अनिवार्यता के विरोध में उतरे हैं, जिसके कारण कुर्ला में काम बंद आंदोलन भी शुरू हुआ।
महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन पर फडणवीस ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
फडणवीस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मामले में झूठ बोल रही है और वह 2029 तक महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिलने देना चाहती है।
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