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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर संसद में हंगामा, जयराम रमेश को मिला कड़ा जवाबराजनीति
27 जुल॰ 2026, 4:56 pm (91 दिन पहले)· 0

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर संसद में हंगामा, जयराम रमेश को मिला कड़ा जवाब

संसद परिसर में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। विपक्ष ने नारेबाजी की, तो वहीं धर्मेंद्र प्रधान ने भी जयराम रमेश की टिप्पणी का कड़ा जवाब दिया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से अपने इस्तीफे के दो दिन बाद सोमवार को जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे, तो वहां का माहौल काफी गर्माया हुआ नजर आया। संसद परिसर के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने अपने नेता का गर्मजोशी से स्वागत किया, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों के तेवर काफी हमलावर नजर आए।

संसद परिसर में जोरदार स्वागत और तीखी नारेबाजी

संसद भवन के बाहर कई भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान को पारंपरिक पगड़ी और अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान उनके समर्थकों ने 'प्रधान जिंदाबाद' के नारे भी लगाए, जिससे पूरा परिसर गूंज उठा। दूसरी ओर, विपक्षी सांसदों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की और संसद परिसर में 'चोर-चोर, पेपर लीक' से जुड़े तीखे नारे लगाए। विपक्ष ने देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा तंत्र को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा।

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जयराम रमेश की टिप्पणी पर पलटवार

इसी गहमागहमी के बीच संसद परिसर में एक बेहद दिलचस्प वाकया सामने आया। जब कांग्रेस नेता जयराम रमेश धर्मेंद्र प्रधान के सामने आए, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा होता है। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने बिना समय गंवाए बेहद तीखा और स्पष्ट जवाब दिया कि कुछ नहीं हुआ। उन्होंने आगे कहा कि वह वातानुकूलित कमरों में बैठकर केवल राजनीति करने वाले एक्टिविस्ट नहीं हैं, बल्कि जमीन पर उतरकर संघर्ष करने वाले कार्यकर्ता हैं।

विपक्ष के अन्य नेताओं के तीखे हमले

इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा प्रहार किया था। उन्होंने दावा किया कि धर्मेंद्र प्रधान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे को शिक्षा मंत्रालय के माध्यम से लागू करने के कारण उनके चहेते बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब देश की आम जनता धर्मेंद्र प्रधान की असली और वास्तविक छवि से भली-भांति परिचित हो चुकी है।

इसके अलावा लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह के वास्तविक और जमीनी सुधार को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। गौरव गोगोई ने पेपर लीक रोकने के लिए सरकार की तरफ से लाए गए नए संशोधन विधेयक को महज एक दिखावटी कदम या कॉस्मेटिक बिल करार दिया।

पेपर लीक के विवाद के बीच आया था इस्तीफा

बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को ही अपने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा सौंप दिया था। पिछले कई हफ्तों से नीट परीक्षा विवाद और पेपर लीक के मामलों को लेकर देशभर के छात्रों में भारी आक्रोश था और बड़ा आंदोलन चल रहा था, जिसका नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी कर रही थी। लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के चलते आखिरकार उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ही देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर व्यापक सुधार करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कार्यबल यानी हाई-पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। इस विशेष समिति को परीक्षा प्रणाली को भविष्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के वास्ते ठोस सुझाव देने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है.

नया संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश

इसी कड़ी में सरकार ने सोमवार को लोकसभा के पटल पर पब्लिक एग्जामिनेशन यानी अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन विधेयक-2026 को आधिकारिक तौर पर पेश किया। इस नए प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की धांधली या गड़बड़ी के मामलों में दोषियों के लिए अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।

इसके अतिरिक्त, इस विधेयक में यह भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा गया है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की पुलिसिया और कानूनी जांच प्रक्रिया को दो महीने के भीतर पूरा करना पूरी तरह अनिवार्य होगा। हालांकि, इन तमाम कदमों के बावजूद विपक्ष का साफ तौर पर यही कहना है कि केवल एक नया कानून बना देने मात्र से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता, बल्कि इसके लिए पूरी परीक्षा प्रणाली में गहरे संस्थागत सुधारों की सख्त जरूरत है।

सवाल-जवाब

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा कब दिया था?
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
संसद परिसर में धर्मेंद्र प्रधान के सामने किसने टिप्पणी की थी?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने संसद परिसर में धर्मेंद्र प्रधान के सामने टिप्पणी की थी।
परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए किसकी अध्यक्षता में टास्क फोर्स का गठन हुआ है?
इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया गया है।
नए संशोधन विधेयक में पेपर लीक के लिए क्या सजा का प्रावधान है?
प्रस्तावित कानून में अधिकतम 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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