उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी खेमे को पछाड़ने के लिए एक नया राजनीतिक पैंतरा आजमाया है जिसे 'BH' कार्ड का नाम दिया जा रहा है। इस रणनीति के माध्यम से सत्ताधारी दल ने पूर्व में कांग्रेस शासित और वर्तमान में विपक्षी प्रभाव वाले राज्यों में सामने आए भर्ती घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों को सीधे चुनावी मुद्दा बना दिया है। छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में सामने आई जांच एजेंसियों की कार्रवाइयों को ढाल बनाकर बीजेपी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के तमाम राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त करने का खाका तैयार किया है।
क्या है 'BH' कार्ड और किस तरह कसा गया तंज
इस राजनीतिक रणनीति में 'B' का अर्थ छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से है, जबकि 'H' का तात्पर्य उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत से है। नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के करीबी सहयोगियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा की गई हालिया सख्त कार्रवाइयों का विस्तार से ब्योरा दिया। बांसुरी स्वराज ने इन मामलों को रेखांकित करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी का चर्चित नारा 'मोहब्बत की दुकान' असल में 'भ्रष्टाचार का कारोबार' बनकर रह गया है।
पेपर लीक और भर्ती घोटालों के प्रमुख मामले
बीजेपी ने जिन दो मुख्य मामलों को आधार बनाया है, उनमें पहला मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक से जुड़ा है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व ओएसडी चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी को बीजेपी ने युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का बड़ा प्रमाण बताया है। वहीं दूसरा मामला वर्ष 2016 का उत्तराखंड ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती घोटाला है। इस मामले की जांच के सिलसिले में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व पीए चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर ED ने छापेमारी की थी, जहां से भारी मात्रा में नकदी और सोना बरामद किया गया था। बीजेपी इन दोनों मामलों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि कांग्रेस शासन के दौरान युवाओं के रोजगार के अवसरों में गंभीर अनियमितताएं हुईं।
राहुल गांधी की चुप्पी और बयानों पर उठाए सवाल
संवाददाता सम्मेलन के दौरान बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने संसद से लेकर सड़क तक युवाओं, रोजगार और पेपर लीक का मुद्दा उठाने वाले राहुल गांधी की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जो नेता मंचों से छात्रों के अधिकारों की बात करते हैं, वे अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेताओं के करीबियों पर लग रहे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों पर मौन क्यों साध लेते हैं? उन्होंने सवाल उठाया कि जब अपनी ही पार्टी के नेताओं के करीबी लोग युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, तो राहुल गांधी की आवाज बंद हो जाती है। बीजेपी का दावा है कि इस दोहरे रवैये से कांग्रेस की साख पर गहरा असर पड़ा है।
यूपी चुनाव 2027 और सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए चुनौतियाँ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बनाने का दावा करती आ रही है। ऐसे में यदि आगामी 2027 के चुनाव अभियान के दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी या पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरने का प्रयास करेंगे, तो बीजेपी तुरंत छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मामलों को सामने रखकर पलटवार करेगी। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मजबूत होते चुनावी तालमेल के बीच, यदि कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप गहराते हैं तो अखिलेश यादव के लिए अपने सहयोगी दल का बचाव करना और खुद को निष्पक्ष बनाए रखना एक कठिन चुनौती साबित हो सकता है। यह स्थिति पश्चिम बंगाल के पिछले चुनावों की याद दिलाती है, जहां कटमनी के मुद्दे पर टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को सीधे निशाने पर लिया गया था।




















