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जामिया की दीवारों पर विवादित नारों से मचा बवाल, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष की चुप्पी पर दागे सवालराजनीति
24 अक्तू॰ 2026, 6:46 pm (2 दिन पहले)· 2

जामिया की दीवारों पर विवादित नारों से मचा बवाल, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष की चुप्पी पर दागे सवाल

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग के बीच दीवारों पर देश विरोधी नारे लिखे जाने से विवाद बढ़ गया है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सख्त प्रतिक्रिया दी है।

देश की राजधानी दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के भीतर पिछले 13 दिनों से चल रहा छात्रों का प्रदर्शन अचानक एक गंभीर विवाद में तब्दील हो गया है। कैंपस में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर विद्यार्थी भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे, लेकिन इसी दौरान परिसर की दीवारों पर कई आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लिखे नजर आए। इन नारों में कश्मीर को आजाद करने और शरजील इमाम को रिहा करने जैसी मांगें लिखी गई थीं। इसके अलावा दीवारों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के खिलाफ भी तीखे स्लोगन लिखे पाए गए। इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी के माहौल में भारी तनाव देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि दीवारों पर ये शब्द किसी बाहरी शख्स ने लिखे हैं, जबकि यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इतनी सुरक्षा के बावजूद कोई बाहर का व्यक्ति इतने व्यापक स्तर पर कैंपस में नफरती संदेश कैसे लिख गया।

विपक्ष की चुप्पी पर केंद्रीय मंत्री ने उठाए कड़े सवाल

कैंपस में भड़काऊ नारे दिखने के बाद यह मामला अब बड़े सियासी संग्राम का रूप ले चुका है। भारतीय जनता पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों पर हमलावर रुख अपनाए हुए है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस विवाद पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए प्रमुख विपक्षी नेताओं के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जामिया में लिखे गए इन स्लोगनों पर अब तक राहुल गांधी, कॉकरोच पार्टी और अखिलेश यादव की ओर से कोई बयान क्यों सामने नहीं आया है। उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा कौन पैदा हो गया है जो मुल्क को बांटने का इरादा रखता है।

गिरिराज सिंह ने कहा,

"अब देश के लोगों को, देशभक्तों को यह सोचना पड़ेगा कि ऐसे लोगों का मुंहतोड़ जवाब देना पड़ेगा।"
उन्होंने इलाके का संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि यह वही इलाका है जहां पहले शाहीन बाग का आंदोलन खड़ा हुआ था। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि इस तरह की हरकतें देश को तोड़ने वाली मानसिकता को दर्शाती हैं और समाज को ऐसे तत्वों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में गरमाहट ला दी है।

यूनिवर्सिटी प्रशासन की कड़ी चेतावनी

परिसर की चारदीवारी पर भड़काऊ और आपत्तिजनक बातें लिखे जाने के मामले को यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने बेहद गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि इन हरकतों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर विवादित नारे लिखने में संस्थान के किसी भी छात्र की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ बेहद कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। ऐसे छात्रों को सीधे यूनिवर्सिटी से निष्कासित भी किया जा सकता है। वहीं, अगर जांच में यह साबित होता है कि किसी बाहरी व्यक्ति ने जामिया की साख खराब करने के लिए ऐसा किया है, तो उसके विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आंदोलन में बाहरी दखल का आरोप

यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने इस पूरे मामले में कुछ बाहरी तत्वों और राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशासन के मुताबिक, कुछ बाहरी लोग और राजनीतिक संगठन इस छात्र आंदोलन को हवा देने में लगे हुए हैं, जिस वजह से गतिरोध का कोई शांतिपूर्ण हल नहीं निकल पा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि भूख हड़ताल पर बैठे छात्र अपना धरना समाप्त करने के पक्ष में हैं, परंतु बाहर से आए कुछ राजनीतिक नेता उन्हें उकसा रहे हैं और बातचीत के जरिए मामला सुलझाने में रुकावट बन रहे हैं। प्रशासन कैंपस में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास में जुटा हुआ है।

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सवाल-जवाब

जामिया यूनिवर्सिटी में छात्र किस बात को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं?
छात्र पिछले 13 दिनों से कैंपस में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं।
जामिया की दीवारों पर क्या विवादित नारे लिखे गए थे?
दीवारों पर कश्मीर को आजाद करने, शरजील इमाम को रिहा करने और RSS तथा ABVP के खिलाफ नारे लिखे पाए गए थे।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस घटना पर क्या बयान दिया?
गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश को तोड़ने की कोशिश करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देना होगा।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने विवादित नारों पर क्या रुख अपनाया है?
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने वाले छात्रों को निष्कासित किया जाएगा और बाहरी व्यक्तियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।
जामिया प्रशासन ने आंदोलन को लंबा खींचने का जिम्मेदार किसे ठहराया है?
प्रशासन का आरोप है कि कुछ बाहरी तत्व और राजनीतिक पार्टियां आंदोलन को भड़का रही हैं, जिससे छात्र धरना खत्म नहीं कर पा रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·2 दिन पहले

जब मैं कुछ साल पहले जामिया गया था, तब कैंपस का माहौल बहुत अलग और शांत था। दीवारों पर ऐसे नारे देखकर अजीब लग रहा है कि कैसे चीजें इतनी जल्दी बदल जाती हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

यूनिवर्सिटी कैंपस में ऐसे नारे लिखना और उस पर सियासत होना बहुत दुखद है। छात्र अपनी पढ़ाई और अधिकारों की बात करें, देश तोड़ने की नहीं।

Priya Sharma@priya-sharma·2 दिन पहले

रविकेश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या कोई बाहरी सचमुच इतनी आसानी से दीवारों पर ऐसे नारे लिख सकता है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

यूनिवर्सिटी के अंदर ऐसे नारे लिखना और सुरक्षा पर सवाल उठना वाकई गंभीर बात है।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। मैं खुद कुछ साल पहले जब जामिया कवर करने गया था, तो वहाँ का माहौल देखकर हैरान रह गया था कि अंदर इतनी आसानी से कोई भी ऐसी हरकत कैसे कर जाता है।

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