बिहार के बेगूसराय में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्षी खेमे के नेताओं पर बेहद कड़ा प्रहार किया। राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर की गई बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कसाई के श्राप से गाय नहीं मरा करती। उन्होंने कहा कि हम गाय माता की पूजा करते हैं, जबकि कुछ लोग चाहते हैं कि नुकसान पहुंचे, लेकिन ऐसे श्रापों से कुछ हासिल नहीं होने वाला है।
विकसित भारत संकल्प सभा और सरकार के काम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक सेवा में 25 साल पूरे होने के अवसर पर बेगूसराय के खतोपुर स्थित महाकाल मंदिर परिसर में विकसित भारत संकल्प सभा का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे गिरिराज सिंह ने सरकार की विभिन्न सामाजिक नीतियों और विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने समाज के पिछड़े, वंचित और सामान्य सभी वर्गों के कल्याण के लिए समान रूप से काम किया है। उन्होंने बताया कि इसी समावेशी दृष्टिकोण का नतीजा है कि संघ लोक सेवा आयोग में 104 अभ्यर्थी सवर्ण समाज से चुनकर सामने आए हैं।
यूजीसी कानून के विरोध पर दिया दो टूक जवाब
कार्यक्रम के दौरान जब उनसे यूजीसी कानून लागू करने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपना रुख साफ किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में किसी भी कीमत पर यूजीसी कानून लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं का काम केवल विरोध की खातिर विरोध करना रह गया है, चाहे वास्तविक स्थिति कुछ भी हो।
एसआईआर और विपक्ष की यात्रा पर तीखा तंज
तेजस्वी यादव द्वारा एसआईआर के विरोध में निकाली गई गुस्सा यात्रा पर तंज कसते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि विपक्षी नेता दो महीने तक कई जिलों में घूमते रहे। उन्होंने कहा कि वे राहुल गांधी के साथ लगातार यात्रा करते रहे, लेकिन इसके बावजूद वे निर्वाचन आयोग के समक्ष एक भी ऐसा ठोस नाम पेश नहीं कर पाए जिसका नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से काटा गया हो या जिसे दोबारा जोड़ा जाना चाहिए था।
बांग्लादेशी नागरिकों को वोटबैंक बनाने का आरोप
गिरिराज सिंह ने विपक्ष की राजनीति पर गहरा आरोप लगाते हुए कहा कि यह सारी कवायद केवल बांग्लादेशी मुसलमानों को चुनावी वोटबैंक बनाने के मकसद से की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक केंद्र में एनडीए की सरकार सत्ता में है, तब तक दुनिया की कोई भी ताकत बांग्लादेशी नागरिकों को यहां का वोटबैंक नहीं बनने दे सकती। उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और मतदाता सूची की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।





















